हरिद्वार: जिन मदरसों के संचालक ही गरीब बच्चों को मिलने वाली मिड डे मील का पैसा हजम कर जाएं तो वो क्या छात्रों को शिक्षा देंगे? ये घटना हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र की है जहां के संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक चंद्र ने चार मदरसों में ये गड़बड़ झाला पकड़ा है।
जानकारी के मुताबिक रुड़की ब्लॉक के चार मदरसों में मिड डे मिल ( मध्यान्ह में स्कूल में मिलने वाला सरकार द्वारा दिया जाने वाला भोजन) को लेकर मिली शिकायतों की जांच करने पर ये मामला सामने आया है कि जो बच्चे दो साल पहले मदरसा छोड़ कर चले गए उनके नाम पर भी सरकार से मिड डे मिल लिया जा रहा है। भगेड़ी महावतपुर के मदरसा आलिम पब्लिक स्कूल के संचालक अपने मदरसे खाते में मिड डे मील का तीन लाख रु ले रहे थे।
चार मदरसों में मिली गड़बड़ी
संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक चंद्र और तहसीलदार विकास अवस्थी ने ऐसे चार मदरसों की जांच पड़ताल की जिसमें मिड डे मील के सरकारी फंड को लेकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा था, ऐसी भी शिकायतें मिली है कि बच्चों को दी जाने वाली डाइट में भी गड़बड़झाला है। बच्चों से की गई पूछताछ में कुछ ऐसी ही जानकारी सामने आने पर प्रशासन ने अब जांच पड़ताल का दायरा और बढ़ा दिया है। जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि जिले के अन्य मदरसों की भी जांच पड़ताल की जा रही है ताकि बच्चों को दिए जाने वाले मध्यान भोजन उसकी गुणवत्ता और फंड संबंधी शिकायतों को दूर किया जा सके।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि शासन स्तर से ये निर्देश हैं कि ऐसे मदरसों के खिलाफ सख्त कारवाई करें जो बच्चों के भविष्य और उनके खानपान का ध्यान नहीं रख रहे। बाल आयोग की अध्यक्ष गीता खन्ना ने भी ऐसे मामलों में सरकार से कड़ा रुख अपनाने को कहा है।
अपलसंख्यक मामलों के विशेष सचिव डा पराग मधुकर धकाते ने भी सभी जिला अल्पसंख्यक अधिकारियों से कहा है कि वो ऐसे मदरसों पर नजर रख सख्त कारवाई करें जो बच्चों के अधिकारों का हनन कर रहे हैं।












