नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ कप सिरप पीने से बच्चों के मौत के मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि प्रतिबंधित दवा को अभियान चलाकर घर-घर से रिकवर किया जाएगा। सीएम मोहन यादव ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर उच्च स्तरीय बैठक ली और उसमें अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सूबे की सरकार इस प्रकरण में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। छिंदवाड़ा में कफ सिरप पीने से 9 बच्चों की मौत हो गई थी। इसके बाद औषधि निरीक्षक छिंदवाड़ा गौरव शर्मा, औषधि निरीक्षक जबलपुर शरद कुमार जैन, उप संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन शोभित कोस्टा को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य को स्थानांतरित किया गया है।
घर-घर से रिकवर की जाएगी बैन दवा, डॉक्टरों के खिलाफ भी होगी कार्यवाही
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि कोल्ड्रिफ सिरप के विक्रय पर बैन लगाने के साथ ही दुकानों में मौजूद स्टॉक को भी जब्त किया जाएगा। छिंदवाड़ा और आसपास के जिलों में जिन परिवारों ने यह दवा ली है अभियान चलाकर उनके घरों से इसे रिकवर किया जाएगा। इसके लिए आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं के साथ ही सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। साथ ही दवाओं पर लिखी जाने वाली चेतावनी और सावधानियों की भी जांच होगी। नियमों का पालन नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। जो भी डॉक्टर चार साल से कम उम्र के बच्चों को कॉम्बिनेशन ड्रग नहीं देने की व्यवस्था का पालन नहीं करेगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

छिंदवाड़ा में सर्वे के जरिए मरीजों को किया गया चिन्हित
सीएम मोहन यादव ने कहा कि ऐसी स्थिति दोबारा न बने इसके लिए सभी आवश्यक सावधानियां बरती जाएं। उन्होंने कहा कि छिंदवाड़ा जिले में सर्वे के माध्यम से प्रभावित मरीजों को चिन्हित किया गया है। बैठक में कहा गया कि छिंदवाड़ा से गंभीर प्रकरणों की जानकारी मिलते ही राज्य स्तर से चिकित्सकों का दल छिंदवाड़ा भेजा गया। नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल और सेंट्रल ड्रग्स स्टेण्डर्ड कंट्रोल आर्गेनाइजेशन का भी जांच में सहयोग लिया गया। आठ मरीजों की जांच के लिए उनके नमूने पुणे लैब में भेजे गए। इसके अलावा यहां से विभिन्न दवाओं के सैम्पल लेकर उनकी जांच कराई गई। प्रभावित मरीजों को चिन्हित करने के लिए सर्वे आरंभ किया गया है। इसके साथ ही ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया तथा हिमाचल व तमिलनाडु के ड्रग कंट्रोलर्स को भी सूचना दी गई है। उन्होंने बताया कि अधिकांश मरीजों को कोल्ड्रिफ दवा लिखने तथा अपने परिवार के सदस्य के माध्यम से कोल्ड्रिफ दवा की बिक्री कराने वाले डॉक्टर के निलंबन और दवा निर्माता के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करने की कार्यवाही की गई है।
कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से हुई 18 से अधिक बच्चों की मौत
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से 18 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में कोल्ड्रिफ सिरप पीने के बाद 11 बच्चों की किडनी फेल होने से मृत्यु हुई थी जिसके बाद पूरे देशभर में हंगामा चल गया था। जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि कोल्ड्रिफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकोल (Diethylene Glycol, DEG) नामक जहरीला रसायन अत्यधिक मात्रा में मौजूद है। जिसका सीधा असर किडनी, लिवर और बॉडी पर पड़ता है। इस कफ सिरप पीने के बाद अधिकांश बच्चों को उलटी हुई और बुखार चढ़ गया। इसके बाद बच्चों की किडनी फेल हो गई। कई बच्चे अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं जिनका इलाज चल रहा है।
कोल्ड्रिफ कफ सिरप में पाया गया 48.6% डायथिलीन ग्लाइकॉल
कोल्ड्रिफ कफ सिरप की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि इस सिरप में 48.6 फीसदी डायथिलीन ग्लाइकॉल पाया गया है। यह एक जहरीला रसायन है। मध्य प्रदेश पुलिस ने चेन्नई स्थित ‘श्रीसन फार्मास्युटिकल मेकर’ के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ये ही कंपनी इस सिरप को बेचती है। इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की स्थापना 1990 में हुई थी।

















