इसे घोर लापरवाही ही कहा जाएगा, जिसने 11 मासूमों की जिंदगियां छीन ली। ये दिल को दहलाने वाली घटना मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा की है। जहां किडनी फेल होने के कारण इन बच्चों की मौत हो गई। कहा जा रहा है कि इन सभी बच्चों को सर्दी खांसी की सीरप ‘कोल्ड्रिफ’ दी गई थी, जो कि इनके लिए जहर हो गई।
ये बच्चे 5 साल से कम उम्र के थे, जो प्राइवेट क्लिनिक में डॉक्टरों को दिखाने के बाद ये दवा ले रहे थे। परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है, और अब पुलिस ने डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।
क्या है पूरा मामला
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सब कुछ अगस्त के आखिर से शुरू हुआ। छिंदवाड़ा के परासिया तहसील के गांवों में बच्चों को हल्का बुखार और खांसी हुई। लोकल डॉक्टरों ने रूटीन दवाओं के साथ कोल्ड्रिफ सीरप लिख दी। शुरू में तो सब नॉर्मल लगा, लेकिन जल्दी ही हालात बिगड़ गए। बच्चे उल्टी करने लगे, बेहोश होने लगे, और फिर किडनी फेल हो गई। अगस्त के अंत से सितंबर तक 11 बच्चों की मौत हो गई। इनमें से 9 मौतें छिंदवाड़ा में ही रहीं, और बाकी केस भी इसी चेन से जुड़े दिखे।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 30 दिनों में 9 बच्चे किडनी प्रॉब्लम से मरे, लेकिन अब टोटल 11 हो गया। पांच बच्चे अभी नागपुर के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में रिकवर कर रहे हैं, जहां डॉक्टरों की पूरी टीम डटी हुई है। परिवार बताते हैं कि बच्चे पहले तो ठीक लग रहे थे, लेकिन रातोंरात सब उलट-पुलट हो गया। एक दादी ने कहा, “मेरा पोता बस खांसी की दवा पीया और कभी न जागा।”
आरोपी डॉक्टर गिरफ्तार
इस मामले में पुलिस ने परासिया के पेडियाट्रिशियन डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। ज्यादातर बच्चे उनके क्लिनिक में इलाज करवा रहे थे, और उन्होंने ही कोल्ड्रिफ प्रेस्क्राइब की थी। डॉक्टर सोनी पर लापरवाही का आरोप है। पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया है, और पूछताछ चल रही है। एक तरफ जहां परिवार गुस्से में हैं, वहीं डॉक्टर के पक्ष वाले कहते हैं कि वो भी शिकार हैं, क्योंकि दवा फैक्ट्री की गलती थी।
लैब रिपोर्ट ने चौंकाया
तमिलनाडू की लैब ने जो रिपोर्ट भेजी, वो कन्फर्म कर गई – कोल्ड्रिफ सीरप में 48.6% डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) मिला था, जो एक खतरनाक इंडस्ट्रियल केमिकल है। ये एंटीफ्रीज और ब्रेक फ्लूइड में यूज होता है, और बच्चों के लिए जहर के समान है। बैच नंबर SR-13 (मई 2025 में बनी, अप्रैल 2027 तक वैलिड) को ‘नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी’ बताया गया। ये वही टॉक्सिन है जो पहले भी कई देशों में बच्चों की मौत का सबब बना। मैन्युफैक्चरर तमिलनाडू के कांचीपुरम की स्रेसन फार्मास्यूटिकल्स है। कंपनी पर भी केस हो गया है, और पूरे स्टॉक को जब्त करने के आदेश हैं।
मृतकों को 4 लाख रुपए का मुआवजा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे ‘बहुत दर्दनाक’ बताया और हर प्रभावित परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा घोषित किया। एमपी गवर्नमेंट ने कोल्ड्रिफ और कंपनी की सारी दवाओं पर बैन लगा दिया। साथ ही, नेक्स्ट्रो-डीएस जैसी दूसरी सीरप्स पर भी रोक। सेंट्रल हेल्थ मिनिस्ट्री ने एडवाइजरी जारी की – 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ-कोल्ड मेडिसिन न दें। अब मल्टी-स्टेट चेकिंग चल रही है, ताकि ऐसी मिलें पकड़ी जाएं। लेकिन ये कदम कितने बच्चों को बचा पाएंगे, ये सोचकर रूह कांप जाती है।
















