मुजफ्फराबाद, 29 सितंबर (हि.स.)। पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में सोमवार को पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ। जनता की आवाज को दबाने के लिए शहबाज शरीफ सरकार ने हजारों सैनिक उतारे। विरोध प्रदर्शन में दो लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 लोग घायल हो गए हैं। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस को भी जमकर पीटा है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार के खिलाफ हुए इन प्रदर्शनों में मुजफ्फराबाद में सरकारी सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। विरोध प्रदर्शन नागरिक समाज गठबंधन, अवामी एक्शन कमेटी (एएसी) द्वारा किया गया था। रविवार को मीरपुर, कोटली, रावलकोट, नीलम घाटी, केरन आदि जगहों पर प्रदर्शन शुरू हुए, जिसके तहत आमजन को उनके अधिकार दिलाने का “स्पष्ट संदेश” देने के लिए सोमवार को लॉकडाउन की घोषणा की गई थी।
पाकिस्तान सरकार ने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए क्षेत्र में सुरक्षाबलों के सशस्त्र काफिलों के अलावा पंजाब से हजारों सैनिकों की तैनाती की। इस्लामाबाद से 1,000 अतिरिक्त पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे।
सूत्रों के मुताबिक अधिकारियों ने आधी रात से इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दीं। पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (आईएसआई) से जुड़े संगठन मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के हथियारबंद लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की।
इस बीच एएसी ने पाकिस्तानी सरकार के समक्ष 38-सूत्रीय मांगपत्र का प्रस्ताव रखा है। संगठन पीओके में भ्रष्टाचार, उपेक्षा और बुनियादी अधिकारों से वंचित लोगों को एकजुट कर सरकार के खिलाफ दबाव बनाने के लिए प्रयासरत है।
संगठन की मांगों में पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आवंटित पीओके विधानसभा की 12 सीटों को हटाना, सब्सिडी वाला आटा और उचित बिजली मूल्य निर्धारण और इस्लामाबाद की शहबाज सरकार द्वारा लंबे समय से विलंबित सुधारों के वादों को पूरा करना शामिल है।
70 साल से मौलिक अधिकारों से वंचित हैं लोग
एएसी नेता शौकत नवाज मीर ने कहा कि उनका अभियान किसी संस्था के खिलाफ नहीं बल्कि 70 से अधिक वर्षों से वंचित लोगों को मौलिक अधिकार दिलाने के लिए है। उन्होंने कहा कि ये जूतों से मानने वाले हैं, बातों से नहीं। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि या तो वे उनकी मांगों को पूरा करें अन्यथा उन्हें जन आक्रोश का सामना करना होगा। ये प्रदर्शन हाल ही में एएसी, पाकिस्तानी सरकार के मंत्रियों और पीओके प्रशासन के बीच वार्ता के विफल होने के बाद शुरू हुए हैं।

















