बाड़मेर। आत्मनिर्णय व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। बाड़मेर जिले में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे उपखंड सेड़वा में भील बस्ती निवासी 65 वर्षीय मुकनाराम भील ने इसे चरितार्थ कर दिखाया। मुकनाराम ने सेड़वा एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई को बताया कि वह गलत संगत के कारण युवावस्था में ही नशे की लत के जाल में फंस गया था। नशा छोड़ने के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए लेकिन वह कामयाब नहीं हुए । सेड़वा के शिक्षक बख्ताराम भील युवाओं को नशा मुक्ति के लिए प्रेरित करते रहते हैं। अपने प्रयासों और सामाजिक जागरूकता के माध्यम से, मुकनाराम ने धूम्रपान छोड़ने का संकल्प लिया।उन्होंने दसवीं तक की पढ़ाई की है। अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए उन्होंने भगवान श्री राम के चरित्र और भारतीय संस्कृति का अध्ययन किया। जिससे उनकी चित्त वृत्तियां सात्त्विक हुईं और उनके संकल्प और विश्वास को और मजबूती मिली। आखिरकार एक दिन नशे का हमेशा के लिए त्याग कर दिया।
इसके पश्चात उन्होंने वर्ष 2013 में अपने कुछ साथियों के साथ चारधाम की यात्रा की । उन्होंने बताया कि वहां से लौटने के बाद उनका जीवन राम-मय हो गया । अब वे प्रतिदिन 5-6 घंटे रामनाम लिखते हैं और अब तक 70 लाख बार रामनाम लिख चुके हैं। उनका लक्ष्य एक करोड़ रामनाम लिखने का है। जिसे पूरा करने के बाद वह इसे वाराणसी स्थित रामनाम कोष में जमा कराएंगे। एसडीएम सेड़वा बद्रीनारायण विश्नोई से चर्चा के दौरान मुकनाराम भील ने बताया कि भगवान श्रीराम के चरित्र से प्रेरणा लेकर उन्होंने गलत संगत, बुरी आदतें और नशे को हमेशा के लिए त्याग दिया ।
सीमांत क्षेत्र के भील समाज के मुकनाराम अब पेड़-पौधों के संरक्षण और नशा मुक्ति के लिए युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं । उपखंड अधिकारी सेड़वा बद्रीनारायण विश्नोई ने मुकनाराम को श्रीफल,दुपट्टा और कल्याण पत्रिका की प्रति भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई ने युवाओं से संत वाणियों और अच्छा साहित्य पढ़ने की अपील की।

















