नई दिल्ली । 2008 के मालेगांव विस्फोट मामले में बरी किए गए लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब कर्नल पद पर पदोन्नत कर दिया गया है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता गिरिराज सिंह ने पुरोहित को वर्दी में वापसी और पदोन्नति पर बधाई दी, उन्हें देशभक्त बताया और कहा कि सरकार साहस और निष्ठा के साथ देश की सेवा करने वाले अधिकारियों के साथ मजबूती से खड़ी है।
मालेगांव विस्फोट मामला और बरी होने की प्रक्रिया
पुरोहित उन सात आरोपियों में शामिल थे जिन्हें 31 जुलाई को विशेष एनआईए अदालत ने बरी किया। अदालत ने कहा कि केवल संदेह सबूत की जगह नहीं ले सकता और मामले में विश्वसनीय और ठोस सबूतों के अभाव का हवाला दिया। 29 सितंबर 2008 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव में मस्जिद के पास विस्फोट हुआ था, जिसमें छह लोग मारे गए और 100 से अधिक घायल हुए। इस मामले में कुल 14 लोग गिरफ्तार किए गए थे, लेकिन केवल सात आरोपियों पर मुकदमा चला।
पुरोहित की जेल यात्रा और राजनीतिक साजिश के आरोप
पुरोहित ने 9 साल जेल में बिताए और कोर्ट में दावा किया कि उन्हें राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हिरासत में रहते हुए उनसे दबाव डाला गया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अन्य नेताओं का नाम मामले में लें। उनके साथ बरी किए गए अन्य आरोपियों में पूर्व बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर, मेजर (सेवानिवृत्त) रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर चतुर्वेदी, सुधांकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी शामिल हैं।
कानूनी टीम और प्रक्रिया संबंधी चुनौतियां
पुरोहित की कानूनी टीम ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और प्रक्रिया संबंधी खामियों की ओर भी इशारा किया। सेना सूत्रों के अनुसार, उनके करियर पर 16 साल से लगा डिसिप्लिन एंड विजिलेंस (DV) बैन हटाया गया, जिससे प्रमोशन और अन्य सर्विस हक बहाल करने की प्रक्रिया शुरू हुई। इस फैसले के बाद पुरोहित अब फुल कर्नल बन गए हैं।
करियर और पदोन्नति का महत्व
साल 1994 में मराठा लाइट इन्फेंटरी में कमीशंड हुए प्रसाद श्रीकांत पुरोहित का यह पदोन्नति उनके लंबे और विवादास्पद सफर का अहम मोड़ है, जिसमें न्यायालय ने उन्हें निर्दोष साबित किया और सेना ने उनके करियर की रोक हटाकर उन्हें सम्मानपूर्वक वर्दी में वापसी दिलाई।

















