ओडिशा: ओडिशा के जनजातिबहुल केन्दुझर जिले के चंपुआ प्रखंड के अधीन बलभद्रपुर गांव में सरकारी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने एक घर का इस्तमाल क्रिश्चियनिटी का प्रचार व कनवर्जन के लिए हो रहा था। ईसाई प्रचारक अक्सर गांव में आकर इस भवन का इस्तमाल कर स्थानीय भोले भाले जनजातीय लोगों को लोभ लालच देकर धर्म परिवर्तन कराने का प्रयास लगातार रहे थे। इसके कारण गांव में सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की शिकायतें मिल रही थीं।
कई बार स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया था । स्थिति को देखते हुए चंपुआ प्रशासन ने संबंधित घर को सील कर दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बलभद्रपुर गांव में खाता नंबर 64, प्लॉट नंबर 413 पर मकरु मुंडा की पत्नी जेमामणि मुंडा के नाम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत एक मकान स्वीकृत हुआ था।
घर में रविवार को होती थी प्रार्थना सभाएं… ईसाई प्रचारक आते थे
प्रधानमंत्री आवास योजना में यह घर बनने के बाद यह मकान धीरे-धीरे चर्च का रूप ले चुका था और इसका इस्तेमाल बाहरी ईसाई प्रचारक रविवार को प्रार्थना सभाओं और प्रचार व कनवर्जन के प्रयास के लिए करने लगे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन सभाओं में जनजातीय समुदाय के भोले-भाले परिवारों को आकर्षित करने और उन्हें कनवर्जन के लिए प्रलोभन देने की कोशिश की जाती थी। इस गतिविधि को लेकर गाँव में लंबे समय से असंतोष और तनाव बना हुआ था।

प्रशासन ने घर को किया सील… सबसे पहले पाञ्चजन्य ने उठाया था मामला
लगातार विरोध और तनावपूर्ण हालात ग्रामीणों ने कई बार इस गतिविधि का विरोध किया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की थी। ग्रामीणों और ईसाई प्रचारकों के बीच टकराव की स्थिति कई बार उत्पन्न हुई। पिछले महीनों में भी पुलिस को मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को शांत कराना पड़ा था। हाल ही में विवाद एक बार फिर भड़क गया और मामला थाने तक पहुंचा। इसके बाद प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए कार्रवाई की। प्रशासन की कार्रवाई केस नंबर 409/2025 के तहत चंपुआ तहसीलदार सजत मार्के, थाना प्रभारी रमाकांत मुदुली और अतिरिक्त तहसीलदार प्रतीक्षा प्रियदर्शिनी की मौजूदगी में संबंधित घर को लोहे के ताले से सील कर दिया गया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस घर में अब किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि नहीं हो सकेगी और प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। पहले भी उठ चुका था विवाद गौरतलब है कि इसी वर्ष जून महीने में साप्ताहिक पत्रिका पांचजन्य ने इस विषय पर रिपोर्ट प्रकाशित की थी।
प्रधानमंत्री आवास योजना के सूचना पट्ट को मिटाकर उस पर लिख दिया था ‘चर्च’
उस समय भी ग्रामीणों ने ईसाई मिशनरियों की कथित कनवर्जन गतिविधियों का विरोध किया था और तनाव इतना बढ़ गया था कि पुलिस बल को तैनात करना पड़ा था। ग्रामीणों का कहना है कि मकान पर लगे प्रधानमंत्री आवास योजना के सूचना पट्ट को मिटाकर उस पर ‘चर्च’ लिख दिया गया था और उसके बाद नियमित रूप से प्रार्थना सभा आयोजित की जाती थी। बाहरी मिशनरियों की आमद से गाँव का सामाजिक ताना-बाना बिगड़ रहा था और इससे स्थानीय आदिवासियों में आक्रोश पनप रहा था। ग्रामीणों का आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन समय रहते कार्रवाई नहीं करता, यही कारण है कि इस तरह की गतिविधियों के प्रति कुछ लोगों के हौसले बढ़ते जा रहे हैं।
उनका कहना है कि सरकारी संसाधनों का उपयोग गैरकानूनी धार्मिक गतिविधियों के लिए होना गंभीर मामला है और इसके पीछे शामिल लोगों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए। हिंदू संगठनों की प्रतिक्रिया इस मामले पर हिंदू जागरण मंच के ओडिशा संगठन मंत्री तन्मय दाश ने कहा कि “बलभद्रपुर का मामला बेहद गंभीर है क्योंकि यहाँ सरकारी पैसे और सरकारी ज़मीन पर बने मकान को ही कनवर्जन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रशासन द्वारा भवन को सील करना स्वागतयोग्य कदम है, लेकिन केवल इतना काफी नहीं है।” उन्होंने मांग की कि इस गतिविधि में शामिल स्थानीय जिम्मेदार व्यक्तियों के साथ-साथ बाहर से आकर कनवर्जन की कोशिश करने वाले ईसाई मिशनरियों और इससे जुड़े अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई की जाए।
तन्मय दाश के अनुसार, “ये लोग न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि समाज में वैमनस्य और अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन को ऐसे तत्वों पर सख्त नियंत्रण करना चाहिए।” उन्होनें कहा कि राज्य में गैर कानूनी तरीके से कनवर्जन को रोकने के लिए कानून है । लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि प्रशासन इस कानून का इस्तमाल नहीं करती । इस कारण विदेशी पैसों से पलने वाले मिशनरी भोले भाले लोगों को बिना रोकटोक कनवर्जन करा रहे हैं । उन्होनें सरकार से मांग की कि ओडिशा में ओडिशा फ्रीडम आफ रिलिजियन्स एक्ट को कडाई से लागू किया जाए । सामाजिक सौहार्द पर असर बलभद्रपुर गाँव की घटना ने एक बार फिर उस संवेदनशील प्रश्न को उठाया है कि किस तरह विकास योजनाओं के नाम पर मिली सुविधाओं का दुरुपयोग किया जा सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर रोक नहीं लगाई जाती तो आदिवासी क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना बुरी तरह प्रभावित हो सकता था। आगे की कार्रवाई फिलहाल प्रशासन ने भवन को सील कर किसी भी प्रकार की गतिविधि पर रोक लगा दी है। पुलिस ने भी स्थिति पर नज़र बनाए रखी है ताकि भविष्य में किसी प्रकार का टकराव न हो।

















