गत 22 सितंबर को जयपुर में राष्ट्रीय शक्ति मंच ने मातृशक्ति सम्मेलन आयोजित किया। इसमें मातृशक्ति के महत्व और समाज-निर्माण में उसकी भूमिका पर विचार-विमर्श हुआ।
मुख्य अतिथि साध्वी समदर्शी दीदी ने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था ही हमारी पहचान है। परिवार में संस्कार रोपना, पूजा-पाठ को महत्व देना और संबंधों को सहेजना ही समाज को मजबूत बनाता है। विदेशों में परिवार विघटन और विवाद की जड़ हैं, जबकि भारत में परिवार समाज की सबसे सुदृढ़ इकाई है। विशिष्ट अतिथि बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि हिंदू धर्म महान और प्राचीन है।
मातृशक्ति की शक्ति को पहचानना, उसका समर्थन करना और उसे सशक्त बनाना ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। मुख्य वक्ता काजल हिंदुस्तानी ने कहा कि बॉलीवुड की फिल्में युवाओं की मानसिकता को दूषित कर रही हैं, जिससे परिवारों के टूटने की घटनाएं बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि लव जिहाद कोई साधारण विषय नहीं, बल्कि समाज पर गहरी चोट है। हमें इसे रोकने को ठोस प्रयास करने होंगे। कार्यक्रम के अध्यक्ष जुगल किशोर ने कहा कि परिवार समाज की नींव है और मातृशक्ति ही उस नींव की आधारशिला। जब परिवार बचेगा, तभी समाज बचेगा और तभी राष्ट्र बचेगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जयपुर के गणमान्यजन उपस्थित थे।
श्रद्धालुओं के लिए चिकित्सा शिविर
गत 7 से 21 सितंबर तक गया में पितृ पक्ष का मेला लगा। इस अवसर पर देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु गया आए और अपने पितरों का श्राद्ध किया। इन श्रद्धालुओं के लिए सेवा भारती, बिहार द्वारा 6 सितंबर से निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किया गया। शिविर का उद्घाटन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र कार्यवाह डॉ. मोहन सिंह ने किया।
उन्होंने कहा कि आश्विन कृष्ण पक्ष या पितृपक्ष में विश्व भर के हिंदू अपने पितरों की शांति के लिए यहां आते हैं। सेवा भारती द्वारा न सिर्फ चिकित्सा शिविर लगाया जाता है, बल्कि यह अपने आप में एक सहायता केंद्र का भी कार्य करता है। शिविर के संचालक डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि गया जी में दो स्थानों पर शिविर लगाए गए। एक स्थान पर एलोपैथिक और दूसरे स्थान पर होम्योपैथिक पद्धति से चिकित्सा हुई। शिविरों में प्रतिदिन लगभग 500 श्रद्धालुओं ने लाभ उठाया।
















