नई दिल्ली। विदेशी फंडिंग से जुड़े मामले में सोनम वांगचुक के एनजीओ की गड़बड़ियां सामने आई हैं। इस पर सरकार ने स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख (SECMOL) का विदेशी फंडिंग से जुड़ा एफसीआरए लाइसेंस रद कर दिया है। गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की है और इसका कारण एफसीआरए नियमों का उल्लंघन बताया है।
एनजीओ को 20 अगस्त को ही कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद 10 सितंबर को रिमाइंडर भी भेजा गया। बीते 19 सितंबर को जवाब मिलने के बाद गृह मंत्रालय ने एफसीआरए लाइसेंस रद किया। एनजीओ के बैंक अकाउंट से फंड का ट्रांसफर भी हुआ है, इसलिए ईडी भी मामले की जांच कर सकती है।
गृह मंत्रालय को जांच में पता चला कि SEMCOL ने एफसीआरए नियमों का कई बार उल्लंघन किया है। उसने विदेशी दान प्राप्त करने का उचित विवरण भी नहीं दिया। विदेश से मिले करीब तीन लाख रुपये को खाते में सही से नहीं दिखाया गया।
सीबीआई कर रही वांगचुक के संगठन की जांच
उधर, सूत्रों का कहना है कि सीबीआई सोनम वांगचुक के संगठन हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव लर्निंग (HIAL) की जांच कर रही है। अगस्त में लद्दाख प्रशासन नें उसे दी गई जमीन का आवंटन रद किया था। वजह यह थी कि जिस काम के लिए जमीन आवंटित की गई थी, उस उद्देश्य के तहत उसका उपयोग नहीं किया जा रहा था। इसकी जांच अभी सीबीआई कर रही है। हालांकि अभी इसको लेकर कोई मामला नहीं दर्ज किया गया है।
लेह हिंसा के लिए जिम्मेदार
गृह मंत्रालय ने उन्हें लेह में हुई हिंसा के लिए भी सोनम वांगचुक को जिम्मेदार ठहराया है। मंत्रालय का कहना है कि जिन मांगों को लेकर श्री वांगचुक भूख हड़ताल पर थे, वे एचपीसी में चर्चा का अभिन्न अंग हैं। कई नेताओं द्वारा भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह करने के बावजूद, उन्होंने भूख हड़ताल जारी रखी और अरब स्प्रिंग शैली के विरोध प्रदर्शनों और नेपाल में Gen Z के विरोध प्रदर्शनों का भड़काऊ उल्लेख करके लोगों को गुमराह किया।
















