भुवनेश्वर: मालकानगिरी जिले में सुरक्षा बलों ने माओवादी हथियारों और विस्फोटकों का बड़ा जखीरा बरामद किया है। इससे सुरक्षा कर्मियों पर होने वाला एक संभावित बड़ा हमला टल गया। देश के सर्वाधिक माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में से एक मालकानगिरी जिले में माओवादी नेटवर्क को नष्ट करने के लिए यह अभियान सीमा सुरक्षा बल और डिस्ट्रिक्ट वल्य़ोंटयरी फोर्स (DVF) के संयुक्त प्रयास से संचालित किया गया था।
सीमा सुरक्षा बल द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार विश्वसनीय खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए, COB बोडीगेट्टा और 142 बटालियन बीएसएफ की टीमों ने डीवीएफ मलकानगिरी के साथ मिलकर कालिमेला पुलिस थाना क्षेत्र के कठिन और दूरदराज जंगल क्षेत्र में अभियान चलाया। खोज मुख्य रूप से बेज्जंगीवाडा रिजर्व फॉरेस्ट के इलाकों में, एलकानूर और दयालटुंगी गांवों के बीच, कुरमाणुर ग्राम पंचायत के पास केंद्रित रही।

इस दौरान सुरक्षा बलों को माओवादी हथियारों और विस्फोटक उपकरणों का जखीरा मिला। बरामद सामग्रियों में शामिल थे: 2 टिफिन आईईडी (प्रत्येक 3 लीटर स्टील कंटेनर में), 1 इम्प्रोवाइज्ड ग्रेनेड, 24 जेलाटिन स्टिक, 40 मीटर कॉर्डेक्स वायर, 1 नंबर 36 ग्रेनेड, 22 इलेक्ट्रिक डेटोनेटर, 1 भारमर (देशी ताबीज़), 2 रिमोट, 1 इलेक्ट्रिक मोटर, 3 सिलेंडर (प्रत्येक 5 किग्रा), 15 आयरन प्लेट, 345 ग्राम आयरन नट-बोल्ट और 50 इस्तेमाल की गई 12-बोर कारतूस कैप।
सीमा सुरक्षा बल ने बताया कि ये सामग्री माओवादी समूहों द्वारा सुरक्षा बलों और पुलिस कर्मियों पर संभावित हमलों के लिए जमा की गई थी। इस जखीरे की बरामदगी न केवल तत्काल खतरे को टालती है बल्कि माओवादी रणनीतियों को विफल करती है और उन क्षेत्रों में उनका मनोबल घटाती है, जहां सुरक्षा एजेंसियों का प्रभुत्व बढ़ रहा है।
मालकानगिरी लंबे समय से माओवादी गतिविधियों का गढ़ रहा है जहां विद्रोही और उनके समर्थक दूरदराज गांवों में प्रभाव रखते हैं। जंगलों और अलग-थलग इलाकों का उपयोग हथियार, गोला-बारूद और आईईडी उपकरण रखने के लिए किया जाता रहा है। सीमा सुरक्षा बल ने कहा कि ऐसे अभियान क्षेत्र नियंत्रण बनाए रखने और स्थानीय निवासियों व सुरक्षा कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अहम हैं। इस बरामदगी के बाद जिले में खोज और गश्त अभियान तेज किया जाएगा ताकि शेष खतरों को समाप्त किया जा सके। अधिकारियों ने कहा कि संयुक्त बलों का बढ़ता दबाव माओवादी को अपने जखीरे छोड़ने और पहले नियंत्रित क्षेत्रों से पीछे हटने के लिए मजबूर कर रहा है, जिससे विद्रोही प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है।

















