मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम ने 9-16 सितंबर तक भारत की एक सप्ताह की राजकीय यात्रा पूरी की। प्रधानमंत्री के रूप में डॉ. रामगुलाम की वर्तमान कार्यकाल में यह पहली भारत यात्रा है। डॉ. रामगुलाम ने नई दिल्ली के अलावा वाराणसी, अयोध्या, मुंबई और तिरुपति का दौरा किया। इस प्रकार, यह यात्रा प्रधानमंत्री रामगुलाम के लिए कूटनीतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक आयाम रखती है।
इस साल मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉरीशस यात्रा के बाद हो रही इस मौजूदा यात्रा ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत किया है। इस साल मार्च में पीएम मोदी की मॉरीशस यात्रा के दौरान, भारत-मॉरीशस संबंधों को एक उन्नत रणनीतिक साझेदारी (Enhanced Strategic Partnership) के रूप में विकसित किया गया था। वर्तमान यात्रा ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत किया है। इस महत्वपूर्ण यात्रा के बाद भारत-मॉरीशस संबंधों के रणनीतिक महत्व को सही परिप्रेक्ष्य में रखने की आवश्यकता है।
मॉरीशस की स्ट्रैटिजिक स्थिति
मॉरीशस हिंद महासागर में एक द्वीप राष्ट्र है, जो पूर्वी अफ्रीका के पूर्वी तट से लगभग 2000 किमी दूर है। भारत से लगभग 5000 किमी दूर, मॉरीशस देश में 2040 वर्ग किमी का एक मुख्य द्वीप है और दो अन्य बड़े द्वीप भी शामिल हैं। मॉरीशस में 20 लाख वर्ग किमी में फैला एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (Exclusive Economic Zone) है। देश की आबादी लगभग 12.5 लाख है और इस आबादी का 67% भारतीय मूल का है। मॉरीशस की लगभग 50% आबादी हिंदू है, इसके बाद 32% ईसाई हैं। यह अफ्रीकी क्षेत्र में सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
रणनीतिक रूप से मॉरीशस हिंद महासागर के पश्चिमी भाग में स्थित है जो भारत को हिंद महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region,IOR) में संचार के समुद्री रास्ते (Sea Lines of Communication, एसएलओसी) को सुरक्षित करने में मदद करता है। प्रधान मंत्री मोदी ने IOR में समुद्री सहयोग बढ़ाने के लिए विजन सागर यानि क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास (Security and Growth for All in the Region, SAGAR) का लॉन्च वर्ष 2015 में किया। समुद्री सहयोग में मानवीय सहायता और आपदा राहत भी शामिल है। भारत ने कोविड-19 महामारी के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र के देशों को आवश्यक सहायता, खाद्य पदार्थ और टीके प्रदान किए। विजन सागर का व्यापक रणनीतिक उद्देश्य भारत के समुद्री प्रभाव को IOR में और सुदृढ़ करना है।
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अफ्रीका में बढ़ी भारतीय उद्योंगों की भागीदारी
मॉरीशस का महत्व भारत की अफ्रीका में बढ़ती रुचि है। मॉरीशस अफ्रीका में भारत के व्यापार और निवेश के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, विशेष रूप से पूर्वी अफ्रीकी देशों के साथ। हाल के वर्षों में एक महत्वपूर्ण विकास अफ्रीका में भारतीय निजी उद्योग की सक्रिय भागीदारी रही है। प्रमुख निवेश क्षेत्रों में तेल और गैस, खनन, नवीकरणीय ऊर्जा, फार्मास्यूटिकल्स और दूरसंचार शामिल हैं। निजी उद्योग से निवेश 75 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और टाटा, महिंद्रा और भारती टेलीकॉम जैसी कंपनियों को मॉरीशस के रास्ते अफ्रीका तक का सुरक्षित मार्ग फायदेमंद साबित हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मॉरीशस के साथ घनिष्ठ संबंधों के प्रमुख चालक रहे हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री रामगुलाम की यात्रा को व्यक्तिगत रूप से यादगार बनाने का कष्ट उठाया है। पीएम मोदी ने दो हिंदू बहुल देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों की बात को आगे बढ़ाने के लिए वाराणसी में अपने मॉरीशस समकक्ष की मेजबानी की। इस तरह के व्यक्तिगत संबंध आवश्यक हैं क्योंकि चीन ने पिछले एक दशक में मॉरीशस पर अपना प्रभाव बढ़ाया है।
चीन ने मॉरीशस में कर रखा है भारी निवेश
हाल में चीन ने मॉरीशस में अपना निवेश बढ़ाया है और चतुराई से कई बंदरगाहों और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को विकसित करने में निवेश किया है। चीन पहले से ही अफ्रीका में सबसे बड़ा निवेशक है और IOR के माध्यम से व्यापारिक माल के सुरक्षित मार्ग की इच्छा रखता है। यहीं पर भारत और चीन के सामरिक और समुद्री हित टकराते हैं। चीन की तुलना में भारत समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध मछली पकड़ने के खतरों से मॉरीशस को समुद्री सुरक्षा प्रदान करने में बेहतर स्थिति में है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर इसका उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन यह माना जा सकता है कि भारत ने मॉरीशस में चीनी उपस्थिति के बारे में अपनी चिंताओं से अवगत कराया होगा।
भारत के लिए संभावनाएं अपार
भारत और मॉरीशस के बीच उन्नत रणनीतिक साझेदारी की स्थिति के साथ, व्यापार और आर्थिक साझेदारी को और बढ़ाने की संभावनाएं बहुत अधिक हैं। हिंदू धर्म के जुड़ाव के साथ, मॉरीशस पहले से ही भारतीयों के लिए एक पसंदीदा पर्यटन स्थल है। मॉरीशस के लोगों के लिए वाराणसी और अयोध्या और भी आकर्षक टूरिस्ट डेस्टिनेशन होने जा रहे हैं। यह लोगों से लोगों का जुड़ाव है जो भारत-मॉरीशस संबंधों की रूपरेखा को व्यापक आकार देगा।
सामरिक दृष्टिकोण से देखें तो भारत को मॉरीशस के अगालेगा द्वीप में बुनियादी ढांचे के विकास में चीन से आगे निकलना होगा। यहां भारतीय उपस्थिति से भारतीय जहाजों की निगरानी क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। यहां तक कि हमारे प्राइवेट इंडस्ट्री को भी मॉरीशस में अधिक निवेश करना चाहिए क्योंकि यहाँ अफ्रीका के मुकाबले अधिक शांति और स्थिरता है। मॉरीशस में भारतीय कार्यबल भारतीय प्रवासियों के समर्थन से एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।
पिछले छह महीनों में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की दो यात्राओं ने भारत और मॉरीशस के बीच संबंधों को अगले स्तर पर पहुंचा दिया है। आज भारत-मॉरीशस संबंध दो हिंदू बहुल देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी के शीर्ष स्तर पर हैं। संबंधों को और बेहतर बनाने के साथ, भारत और मॉरीशस के बीच रणनीतिक साझेदारी हिंद महासागर क्षेत्र में उभरती चुनौतियों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।

















