उत्तराखंड में 11 सालों में 27,000+ प्राकृतिक आपदा घटनाएं: 3,839 मौतें, भूस्खलन और बाढ़ का कहर
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उत्तराखंड में 11 सालों में 27,000+ प्राकृतिक आपदा घटनाएं: 3,839 मौतें, भूस्खलन और बाढ़ का कहर

उत्तराखंड में 2015-2025 तक 27,197 प्राकृतिक आपदाओं से 3,839 मौतें, 6,207 घायल। अतिवृष्टि, भूस्खलन, बाढ़ जैसी घटनाओं का विश्लेषण। केदारनाथ आपदा को छोड़कर आंकड़े। देवभूमि की चुनौतियां और सरकार की राहत प्रयास।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Sep 21, 2025, 09:08 am IST
inउत्तराखंड
Uttarakhand natural disaster

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के आगे सरकार भी बेबस हो गई है। गर्मियों में जंगल की आग, बरसात में दरकते पहाड़ों से होने वाले जान माल के नुकसान से स्थानीय निवासी प्रभावित हो रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि देवालयों की भूमि मानी जाती शिवालिक और हिमालय की पहाड़ियां कब कहर बन कर टूट जाए कहा नहीं जा सकता।

11 साल में 3000 से अधिक मौतें

साल 2015 से 2025 तक उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं से जानमाल का भारी नुकसान हुआ है, जिसमें कई लोगों की जान गई है। यहां तक कि हजारों की संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। पिछले 11 सालों में 27,197 घटनाएं हुई हैं, जिसमें अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ 14,237 की घटनाएं हुई हैं। इसके अलावा राज्य में बड़ी मात्रा में इन 11 सालों में 5830 भूस्खलन भी हुए हैं। 11 सालों में 3839 लोगों की मौत हुई है। 6207 लोग घायल हुए थे। वहीं 312 लोग लापता भी हुए थे। यह सभी आंकड़े उत्तराखंड स्टेट डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के सचेत डैशबोर्ड पर दर्ज है।

किस वर्ष कौन सी आपदा आई

पिछले 11 सालों में सिर्फ अतिवृष्टि या तुरंत बाढ़ के अलावा भूस्खलन की घटनाएं ही नहीं हुई हैं बल्कि इसमें आग, आंधी तूफान, डूबना या फिर बह जाना, बाढ़ ,भूकंप, वज्रपात ,सड़क दुर्घटना और हिमस्खलन जैसी घटनाओं के आंकड़े शामिल हैं। अगर हर एक साल में हुई प्राकृतिक आपदाओं की बात करें तो साल 2015 में 224 घटनाएं हुई, जिसमें अति वृष्टि/त्वरित बाढ़ की 155 घटनाएं हुई थी, 32 भूस्खलन की घटनाएं हुई साल 2015 में 54 लोगों की मौत और 63 घायल हुए थे।

साल 2016 में 103 घटनाएं हुई अतिवृष्टि त्वरित बाढ़ की, 18 भूस्खलन की घटनाएं हुई थी 2016 में 108 लोगों की मौत हुई थी 83 घायल हुए थे। 2017 में 63 घटनाएं हुई थी जिसमें 14 घटनाएं अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ की हुई थी 19 भूस्खलन की घटनाएं हुई थी 2017 में 72 लोगों की मौत हुई थी 38 घायल हुए थे और 21 लापता हुए थे। 2018 में 5056 घटनाएं हुई थी, 3706 घटनाएं अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ की हुई थी, 496 भूस्खलन की घटनाएं हुई थी साल 2018 में 720 लोगों की मौत 1207 घायल हुए थे और पांच लापता। 2019 में 2191 घटनाएं हुई थी अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ की 1205 घटनाएं हुई थी 291 भूस्खलन की घटनाएं और 532 लोगों की मौत हुई थी इसके अलावा 980 लोग घायल हुए थे और चार लापता हुए। साल 2020 में 3132 घटनाएं हुई थी 1627 अत्यावृष्टि या त्वरित बाढ़ की घटनाएं हुई थी भूस्खलन की 973 घटनाएं हुई थी 2020 में 301 लोगों की मौत 460 लोग घायल हुए थे और 6 लापता हुए।

इसे भी पढ़ें: लव जिहाद: सोनू बनकर इकबाल ने हिन्दू युवती से किया दुष्कर्म, 50,000 रुपए भी ऐंठे, गिरफ्तार

2021 में 2839 घटनाएं हुई अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ की 2121 घटनाएं हुई 356 भूस्खलन की घटनाएं हुई 2021 में 393 लोगों की मौत ,366 लोग घायल हुए थे और 133 लोग लापता हुए। 2022 में 3156 घटनाएं हुई 2265 अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ की घटनाएं हुई। 245 भूस्खलन की घटनाएं हुई। साल 2022 में 518 लोगों की मौत 679 लोग घायल और 09 लापाता हुए। 2023 में 4990 घटनाएं हुई 2161 अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ की घटनाएं हुई। 2157 भूस्खलन की घटनाएं हुई साल 2023 में 497 लोगों की मौत 956 लोग घायल और 21 लापता हुए थे।

2024 में 3244 घटनाएं हुई 2408 अतिवृष्टि या त्वरित कर की घटनाएं हुई 209 पोस्ट की घटना हुई 2024 में 384 लोगों की मौत 809 लोग घायल और 17 लापता लोग हुए थे। साल 2025 में सितंबर 20 तक 2199 घटनाएं हो चुकी है जिसमें 700 घटनाएं अतिवृष्टि या त्वरित बाढ़ की हुई है. इसके अलावा 1034 भूस्खलन की घटनाएं भी हो चुकी है वहीं साल 2025 में 20 सितंबर तक 260 लोगों की मौत हो चुकी है 566 लोग घायल हुए है और 96 लोग लापता है।

केदारनाथ आपदा के आंकड़े नहीं जोड़े गए

आपदा के इन आंकड़े में केदारनाथ की साल 2013 में 16 और 17 जून को आए जल प्रलय के आंकड़े नहीं दर्ज किए गए हैं। उस दौरान अकेले केदारनाथ में ही 4400 से ज्यादा लोग या तो लापता हो गए थे या फिर मारे गए थे। केदारनाथ नगरी में आई इस  आपदा में भारी नुकसान हुआ था। अब इन प्राकृतिक आपदाओं की बात करें तो उत्तराखंड के सबसे ज्यादा पिथौरागढ़ ,चमोली ,रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, टिहरी, पौड़ी, चंपावत जैसे जिले शामिल है जहां सबसे ज्यादा प्राकृतिक आपदाएं आई है। जबकि इस साल देहरादून जिले में भी मानसून की आपदा ने दर्जनों लोगों की जान ले ली और बड़ी संख्या में मकान दुकानें होटल रिसॉर्ट भी बरसाती नदियों में बह गए है। नैनीताल जिला भी प्राकृतिक आपदाओं से अछूता नहीं रहा है। मैदानी जिले हरिद्वार और उधम सिंह नगर में भी नदियों के रौद्र रूप ने भारी नुकसान किया है।

आपदा एक बड़ी चुनौती

देवभूमि उत्तराखंड में आई आपदाओं के बाद प्रभावित लोगों के बीच सबसे पहले पहुंचने वाले सीएम पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि प्राकृतिक आपदाएं हमारे लिए हर साल चुनौतियां पैदा कर रही है। ये ऐसी चुनौतियां हैं जिसके बारे में पहले से कुछ नहीं कहा जा सकता। कभी जंगल की आग है तो कभी मानसून में बारिश के बादल फट रहे हैं। ऐसे हालात देखे हैं कि मौसम खुला है और पहाड़ दरक गए। धराली की जल प्रलय के बारे में किसी ने नहीं सोचा था। फिर भी हमारी सरकार इन प्राकृतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। हम प्रभावितों को मदद पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी, गृह मंत्री श्री शाह ने लगातार संपर्क में रह कर हमें हौंसला दिया है।

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