इसे बेशर्मी से और दादागीरी ही कहेंगे, जो दुनिया की दिग्गज टेक कंपनी मेटा ने किया है। ये मामला इतना सीधा नहीं है कि इसे ऐसे ही छोड़ दिया जाए। दरअसल, मेटा ने ब्रिटेन में नाबालिग स्कूली लड़कियों की फोटो को बिना इजाजत के अपने नए ऐप थ्रेड को प्रमोट करने के लिए ऐड में चला दिया, ताकि पुरुषों को आकर्षित किया जा सके।
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, मेटा ने ब्रिटेन में ऐसे ही कुछ स्कूली लड़कियों की फोटोज का इस्तेमाल किया। ये फोटोज माता-पिता ने बैक-टू-स्कूल पोस्ट के तौर पर अपलोड की थीं, लेकिन मेटा ने इन्हें थ्रेड्स के ऐड में डाल दिया। अब इन लड़कियों के माता-पिता हैरान-परेशान हैं। वे इसे ‘घिनौना’ और ‘परेशान करने वाला’ बता रहे हैं। खास बात है कि इन लड़कियों की उम्र महज 13 साल की थीं, चेहरे साफ दिख रहे थे, नाम तक लिखे हुए। और ये ऐड सिर्फ एक 37 साल के लंदन वाले आदमी को टारगेट करने के लिए था। मेटा की वैल्यू 2 ट्रिलियन डॉलर है, लेकिन प्राइवेसी का क्या?
क्या हुआ आखिर?
बताया जाता है कि माता-पिता ने इंस्टाग्राम पर अपनी बेटियों की फोटोज शेयर कीं – यूनिफॉर्म में, छोटे स्कर्ट्स पहने, स्टॉकिंग्स या नंगे पैर। कुछ अकाउंट प्राइवेट थे, लेकिन मेटा के सेटिंग्स की वजह से ये पोस्ट्स ऑटोमैटिक थ्रेड्स पर क्रॉस-पोस्ट हो गईं। वहां से इन्हें ‘सजेस्टेड थ्रेड्स’ के नाम से उस 37 साल वाले के इंस्टाग्राम फीड में धकेल दिया। वो आदमी जो खुद पिता है, ने बताया कि कई दिनों तक सिर्फ लड़कियों वाली पोस्ट्स ही आईं – कोई लड़के की यूनिफॉर्म वाली नहीं। नाम, चेहरे सब क्लियर। मेटा का कहना है कि ये पब्लिक पोस्ट्स थे, जो एडल्ट अकाउंट्स से शेयर हुए, टीनएजर्स के नहीं। लेकिन माता-पिता को पता ही नहीं था कि उनकी प्राइवेसी सेटिंग्स ऐसी अनुमति दे रही हैं।
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अभिभावक कर रहे विरोध
इस घटना के बाद लोग लगातार मेटा का विरोध कर रहे हैं। एक मां, जिसकी 15 साल की बेटी की फोटो यूज हुई, बोलीं, “ये तो मेरी बेटी की स्कूल जाने वाली पिक्चर थी। मुझे आईडिया भी नहीं था कि इंस्टाग्राम ने इसे प्रमोशन के लिए पकड़ लिया। ये बिल्कुल घिनौना है। वो नाबालिग है!” उसी मां ने कहा, “मैं कभी कंसेंट ना देती। दुनिया की कोई कीमत पर अपनी लड़की को यूनिफॉर्म में ऐड के लिए यूज नहीं होने देती।” वहीं एक अन्य बच्ची के पिता, जिसकी 13 साल की बेटी की इमेज यूज हुई, ने कहा, “जब पता चला कि बड़ी कंपनी ने इसे सेक्शुअलाइज्ड तरीके से एक्सप्लॉइट किया, तो डिस्गस्ट फील हुआ।” दूसरी मां बोलीं, “मेटा ने जानबूझकर ऐसा किया, बिना बताए, कंटेंट जेनरेट करने के लिए। ये घिनौना है। कौन जिम्मेदार है जो बच्चों की फोटोज से बूढ़े मर्दों को प्लेटफॉर्म पर खींच रहा?” और वो 37 साल वाला यूजर बोला, “पिता होने के नाते, ये डीपली इनअप्रोप्रिएट लगता है। बच्चों की सेफ्टी रिस्क में डालना एक्सप्लॉइटिव है।”
मेटा की बेशर्मी का असर
मेटा की इस बेशर्मी का असर ये हुआ है कि एक मां के पोस्ट पर 267 फॉलोअर्स थे, लेकिन व्यूज हो गए 7,000! 90% नॉन-फॉलोअर्स से, आधे 44 साल से ऊपर के, और 90% मर्द। ये दिखाता है कि कैसे पब्लिक पोस्ट्स वायरल हो जाते हैं, बिना कंट्रोल के। मेटा के सिस्टम्स टीन शेयर्स को रेकमेंड नहीं करते, लेकिन एडल्ट पब्लिक पोस्ट्स को हां। यूजर्स कंट्रोल कर सकते हैं कि उनके पोस्ट्स सजेस्ट हों या ना।
बेशर्मी पर उतरा मेटा
मेटा के स्पोक्सपर्सन ने कहा, “ये इमेजेस हमारी पॉलिसी वायलेट नहीं करतीं। पेरेंट्स ने पब्लिकली पोस्ट की थीं। हमारे पास सिस्टम्स हैं टीन कंटेंट को रोकने के लिए।” हाउस ऑफ लॉर्ड्स मेंबर और चिल्ड्रन राइट्स कैंपेनर बीबन किड्रॉन ने इस मामले को लेकर कहा कि स्कूल गर्ल्स को बैट की तरह यूज करना मेटा का नया लो है। वो हमेशा प्रॉफिट को सेफ्टी पर तरजीह देते हैं। बच्चों की प्राइवेसी को रिस्क में डालकर 37 साल वाले को भेजना – मेटा जानबूझकर लापरवाह कंपनी है।
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भारत के लिए चेतावनी
ब्रिटेन में मेटा की ये हरकत भारत के लिए चेतावनी है। क्योंकि, जो कंपनी अपने बिजनेस को बढ़ाने के लिए ब्रिटेन में ऐसा कर सकती है, वो भारत में भी ऐसा कर सकती है। इंस्टाग्राम और फेसबुक के भारत में भी करोंड़ों यूजर हैं। ऐसे में उनके डेटा से छेड़छाड़ की आशंका बढ़ गई है।











