काबुल (हि.स.) । अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने इंटरनेट पर प्रतिबंध लगाने के बाद विश्वविद्यालयों से महिलाओं द्वारा लिखी पुस्तकों को भी हटा दिया है। साथ ही नए नियमों के तहत मानवाधिकार और यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिक्षण को गैरकानूनी घोषित किया गया है।
18 विषयों पर रोक
विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया गया कि उन्हें अब 18 विषयों को पढ़ाने की अनुमति नहीं है। तालिबान अधिकारी के अनुसार ये विषय शरिया के सिद्धांतों और तालिबान नीतियों के विपरीत हैं। इसके तहत “सेफ्टी इन द केमिकल लैबोरेटरी” जैसी पुस्तक समेत महिलाओं द्वारा लिखी लगभग 140 पुस्तकों पर प्रतिबंध लगाया गया है।
इंटरनेट और शिक्षा पर प्रभाव
तालिबान के आदेश पर 10 प्रांतों में फाइबर-ऑप्टिक इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। यह कदम सरकार ने अनैतिकता रोकने के लिए उठाया बताया, लेकिन इसका सबसे ज़्यादा असर महिलाओं और लड़कियों पर पड़ा है। उन्हें छठी कक्षा से आगे की शिक्षा प्राप्त करने से रोका जा रहा है।
महिलाओं से जुड़े विषयों पर विशेष रोक
प्रतिबंधित 18 विषयों में छह विशेष रूप से महिलाओं से संबंधित हैं, जिनमें लिंग और विकास, संचार में महिलाओं की भूमिका और महिला समाजशास्त्र शामिल हैं। महिलाओं द्वारा लिखी सभी पुस्तकों को पढ़ाने की अनुमति अब नहीं है।
समीक्षा पैनल और पाबंदी का उद्देश्य
तालिबान सरकार के उच्च शिक्षा मंत्रालय के उप-शैक्षणिक निदेशक ज़ियाउर रहमान आर्युबी ने बताया कि ये निर्णय धार्मिक विद्वानों और विशेषज्ञों के पैनल द्वारा लिए गए हैं। पैनल के सदस्य ने कहा कि यह प्रतिबंध अफ़ग़ान पाठ्यक्रम में “ईरानी सामग्री की घुसपैठ रोकने” के उद्देश्य से लगाया गया है।

















