चाबहार बंदरगाह: अमेरिका ने नहीं दी छूट तो भारत पर क्या होगा असर? विदेश मंत्रालय का रुख क्या?
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चाबहार बंदरगाह: अमेरिका ने नहीं दी छूट तो भारत पर क्या होगा असर? विदेश मंत्रालय का रुख क्या?

चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में है। भारत और ईरान व्यापार एवं संपर्क बढ़ाने के लिए इस पर टर्मिनल विकसित कर रहे हैं। टर्मिनल बनने से ईरान और भारत के व्यापारिक रिश्तों को मजबूती मिलेगी। लेकिन अमेरिका ने पेंच फंसा दिया है।

Written byLalit FularaLalit Fulara
Sep 19, 2025, 06:18 pm IST
inभारत, विश्व

नई दिल्ली:  ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर अमेरिकी फैसले पर भारत ने प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि पूरे मामले को अच्छी तरह से देखा जा रहा है। चाबहार पर अमेरिकी फैसले का भारत अध्ययन कर रहा है। इस फैसले के भारत पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच की जा रही है। यह बात विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कही है।

2018 में अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियों पर दी थी छूट…
गौरतलब है कि अमेरिका ने कहा था कि ईरान के चाबहार बंदरगाह का संचालन करने वाले लोगों पर सितंबर महीने के अंत से प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। इस फैसले का असर भारत पर भी पड़ेगा क्योंकि भारत इस रणनीतिक बंदरगाह पर एक टर्मिनल बना रहा है। दरअसल अमेरिका ने 2018 में चाबहार बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियों पर विशेष छूट दी थी। जिसे उसने अब वापस लेने का फैसला किया है। अमेरिका ने यह छूट इसलिए दी थी ताकि अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और व्यापार से जुड़ी परियोजनाएं ईरान पर लगे प्रतिबंधों से प्रभावित न हों। लेकिन अब अमेरिका का कहना है कि 29 सितंबर 2025 से छूट खत्म हो जाएगी और प्रतिबंध लागू हो जाएंगे।

ईरान को अलग-थलग करने की अमेरिकी रणनीति का भारत पर भी असर
चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में है। भारत और ईरान व्यापार एवं संपर्क बढ़ाने के लिए इस पर टर्मिनल विकसित कर रहे हैं। टर्मिनल बनने से ईरान और भारत के व्यापारिक रिश्तों को मजबूती मिलेगी। कहा जा रहा है कि चाबहार में कामकाज के लिए 2018 में दी गई छूट को वापस लेना राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को अलग-थलग करने की की रणनीति का हिस्सा है। लेकिन इसका असर भारत पर भी पड़ेगा। इसी कारण से विदेश मंत्रालय इस मामले को अच्छी तरह से देख रहा है। भारत ने 2023 में चाबहार बंदरगाह का उपयोग अफगानिस्तान को 20,000 टन गेहूं की सहायता भेजने के लिए किया था।

अमेरिका ने नहीं दी छूट तो क्या होगा?
चाबहार बंदरगाह के जरिए भारत को मध्य एशिया तक समुद्री रास्ते से पहुंचने का सीधा मार्ग मिलता है। अगर अमेरिका ने पाबंदी लगा  दी और छूट नहीं दी तो इस बंदरगाह पर काम करने वाली भारतीय कंपनियों और अफगानिस्तान तक पहुंचने वाले माल-ढुलाई प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है। भारत ने साल  2003 में ही इस बंदरगाह के विकास का प्रस्ताव रखा था ताकि भारतीय माल के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का एक प्रवेश द्वार मुहैया कराया जा सके। 13 मई 2024 को भारत ने इस बंदरगाह के संचालन के लिए 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट किया था। जिससे उसे मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह पहला मौका था जब भारत ने विदेश में किसी बंदरगाह के प्रबंधन की जिम्मेदारी ली थी। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से बंदरगाह का काम धीमा हो गया था और अब अमेरिका ने प्रतिबंधों पर छूट वापस लेने की घोषणा कर दी है।

Topics: IndiausIranChabahar portMinistry of Foreign Affairs
Lalit Fulara
Lalit Fulara
उत्तराखंड के अल्मोड़ा ज़िले के सुदूर स्थित छोटे से गाँव 'पटास' में पैदाइश. कला-साहित्य में विशेष रुचि. पहला नॉवेल 'घासी: लाल कैंपस का भगवाधारी' प्रकाशित. विगत 12 सालों से पत्रकारिता में सक्रिय. करियर की शुरुआत दैनिक भास्कर से हुई और उसके बाद ज़ी न्यूज़, न्यूज़18, राजस्थान पत्रिका, अमर उजाला और इंडियाडॉटकॉम होते हुए वर्तमान में पांचजन्य डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. पत्रकारिता में एम.ए माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के नोएडा कैंपस से किया है. [Read more]
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