विकास का भारतीय अनुभव, दर्शन और 2047 की राह
September 8, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम सम्पादकीय

PanchjanyaAIC25 : विकास का भारतीय अनुभव, दर्शन और 2047 की राह

भारत का लक्ष्य केवल आधारभूत ढांचे का केंद्र बनना नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार और ऊर्जा का भी केंद्र बनना है। ग्राम स्वावलंबन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने वाले ढांचे पर बल देना होगा। क्योंकि यही एकात्म मानव दर्शन को साकार करने का मार्ग है।

Written byहितेश शंकरहितेश शंकर
Sep 19, 2025, 02:49 pm IST
inसम्पादकीय, पाञ्चजन्य इवेंट
दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक मुकुल कानिटकर। साथ में हैं (बाएं से) पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता व भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण कुमार गोयल।

दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक मुकुल कानिटकर। साथ में हैं (बाएं से) पाञ्चजन्य के संपादक हितेश शंकर, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता व भारत प्रकाशन के प्रबंध निदेशक अरुण कुमार गोयल।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय

राष्ट्र के इस संरचनात्मक कायाकल्प के पीछे है समाज के हर व्यक्ति की चिंता और सबसे निर्बल को सबल बनाने का संकल्प। क्योंकि इस पूरे विमर्श को दिशा देता है पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन। उन्होंने कहा था कि विकास का केंद्र मानव होना चाहिए, वह जो पंक्ति में सबसे अंतिम स्थान पर हो। सड़क, बिजली, आवास जैसी परियोजनाएं तभी सफल होंगी जब वे व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक बनें और समाज की समरसता को बढ़ाएं।

 

“विेकसित भारत 2047” केवल आर्थिक प्रगति का नारा नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प की ठोस नींव है, आधारभूत ढांचा। सड़कें, रेल, ऊर्जा, डिजिटल नेटवर्क, शहरी योजना-ये सब केवल ईंट-पत्थर की रचनाएं नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की गति को दिशा देने वाले उपकरण हैं। 2014 के बाद भारत ने जिस तरह इन्फ्रास्ट्रक्चर को विकास की धुरी बनाया, उसने यह प्रमाणित किया कि यदि नीति, नवाचार और कार्यान्वयन एक साथ आगे बढ़ें, तो परिवर्तन केवल संभावना नहीं, बल्कि अनिवार्यता बन जाता है। “आधार – Infra Confluence 2025” जैसे आयोजन इसी चेतना को पुष्ट करते हैं।

भारत की परंपरा में आधारभूत संरचना का आशय केवल भौतिक साधनों से कभी सीमित नहीं रहा। हमारे नगर-नियोजन में लोकमंगल को केंद्र में रखा गया। नगर नियोजन का उद्देश्य नागरिक जीवन को सुगम और सामूहिक जीवन को समरस बनाना था। इसके साथ पर्यावरणीय संतुलन पर भी बराबर बल दिया गया। वृक्ष, नदियां, सरोवर और जल-प्रबंधन को योजनाओं का अभिन्न हिस्सा माना गया। इसी तरह सांस्कृतिक आयाम नगरों की आत्मा थे। मंदिर, सभागार, नाट्यशाला और पुस्तकालय केवल आस्था या मनोरंजन के स्थल नहीं, बल्कि सामुदायिक जीवन की धुरी थे।

हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, वैशाली और पाटलिपुत्र जैसे नगर इसके जीवंत प्रमाण हैं। चौड़ी सड़कों, जलनिकासी की सटीक व्यवस्था, सुरक्षा तंत्र और सांस्कृतिक केन्द्रों का समन्वय बताता है कि भारतीय दर्शन में आधारभूत प्रगति का अर्थ संस्कृति, सुगमता और पंचमहाभूतों के संतुलन से था।

इस परंपरा को थामते हुए भारत ने, विशेष रूप से पिछले दस वर्षों में, आधारभूत संरचना को नये आयाम दिए हैं। भारतमाला परियोजना ने हज़ारों किलोमीटर हाईवे और एक्सप्रेसवे का जाल खड़ा किया। दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, पेरिफेरल परियोजनाएं और महाराष्ट्र-गोवा कनेक्टिविटी ने नए आर्थिक गलियारे बनाए।

रेलवे क्षेत्र में वंदे भारत रेलों ने गति और सुविधा का नया मानक स्थापित किया। अमृत भारत योजना के अंतर्गत स्टेशन ‘री-डेवलपमेंट’ और ‘डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ ने लॉजिस्टिक्स और उद्योग को नई ऊर्जा दी।
शहरी ढांचे में स्मार्ट सिटी मिशन से सौ शहरों को नई दृष्टि मिली। बीस से अधिक शहरों में मेट्रो रेल और इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं, जिससे ग्रीन मोबिलिटी का आधार बना।

ऊर्जा और डिजिटल क्षेत्र में भारत आज विश्व में अग्रणी है। नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 180 GW से अधिक हो चुकी है और सौर ऊर्जा में भारत ने विश्व का नेतृत्व किया है। भारतनेट और 5G की पहुंच ने गांव-गांव में डिजिटल जुड़ाव संभव किया है।
सागरमाला परियोजना और गंगा जलमार्ग जैसे प्रयासों ने समुद्री और अंतर्देशीय व्यापार को नई गति दी है।

इन उपलब्धियों के पीछे नीतिगत संकल्प और ठोस कार्यान्वयन है। जीएसटी और डिजिटलीकरण से लॉजिस्टिक लागत घटी और पारदर्शिता बढ़ी है। PPP मॉडल और निजी निवेश ने परियोजनाओं के विस्तार में अहम भूमिका निभाई है। PM GatiShakti मास्टरप्लान ने मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को एकीकृत दृष्टि दी है।

इसके साथ ही, मेक इन इंडिया और PLI योजनाओं ने उद्योग व इंफ्रास्ट्रक्चर का तालमेल साधा। स्पष्ट है कि भारत केवल गति पर नहीं, बल्कि पारदर्शिता और समावेशिता पर भी बराबर जोर दे रहा है।

आज यदि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो भारत प्रतिमान गढ़ रहा है, कीर्तिमान भी बना रहा है। उसकी पहचान केवल एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार के रूप में नहीं, बल्कि संतुलित और सुनियोजित आधारभूत विकास के मॉडल देश के रूप में बन रही है।

G20, SCO, BRICS जैसे मंचों पर भारत के अनुभव साझा हो रहे हैं। अफ्रीका और एशिया के अनेक देश भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) प्रणाली को अपनाने का प्रयास कर रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि भारत का विकास मॉडल अंत्योदय की भावना पर आधारित है, यानी सबसे अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचना। यही उसे पश्चिमी मॉडलों से अलग पहचान देता है।
आधारभूत संरचना के विकास की इस राह में चुनौतियां और अवसरों का दोराहा भी पड़ता है।

यह यात्रा चुनौतियों से मुक्त नहीं है। तेज़ शहरीकरण जनसंख्या दबाव बढ़ा रहा है, जिसके चलते सतत शहरी ढांचा बनाना अनिवार्य है। पर्यावरणीय संतुलन के लिए ग्रीन एनर्जी, कार्बन-न्यूट्रल योजनाएं और वृक्षारोपण की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। डिजिटल समावेशन केवल स्मार्ट सिटी तक सीमित न रहकर स्मार्ट विलेज तक पहुंचना चाहिए। सांस्कृतिक समावेशन भी आवश्यक है, शहरों और गांवों में सांस्कृतिक स्थल, सामुदायिक केन्द्र और पुस्तकालय समानांतर विकसित हों।

वास्तव में, यही चुनौतियां भारत के लिए अवसर भी हैं। इनके समाधान से ही भारत 2047 तक वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभा सकेगा। इतिहास व परम्परा से मिले अनुभव और आधुनिक समन्वय इस संतुलन की कुंजी हैं।

संदेह नहीं कि भारत की राह है परंपरा और आधुनिकता का समन्वय। सतत विकास का अर्थ केवल सड़कें और गलियारे नहीं, बल्कि वृक्षारोपण, जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा का सम्मिलन है। ग्राम-केंद्रित ढांचा ग्रामीण भारत को स्वास्थ्य, शिक्षा और इंटरनेट की सुविधाओं से सशक्त करेगा। आर्थिक समावेशिता यह सुनिश्चित करेगी कि आधारभूत संरचनाएं केवल महानगरों तक सीमित न रहकर छोटे कस्बों और गांवों को भी जोड़ें। और राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से सीमा सड़कें, रक्षा गलियारे और आंतरिक ढांचा भारत के स्वाभिमान को सुदृढ़ करेंगे।

राष्ट्र के इस संरचनात्मक कायाकल्प के पीछे है समाज के हर व्यक्ति की चिंता और सबसे निर्बल को सबल बनाने का संकल्प। क्योंकि इस पूरे विमर्श को दिशा देता है पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन। उन्होंने कहा था कि विकास का केंद्र मानव होना चाहिए, वह जो पंक्ति में सबसे अंतिम स्थान पर हो। सड़क, बिजली, आवास जैसी परियोजनाएं तभी सफल होंगी जब वे व्यक्ति के सर्वांगीण विकास में सहायक बनें और समाज की समरसता को बढ़ाएं।

इसी विचार की व्यावहारिक परिणति है अंत्योदय, विकास की हर धारा अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। यही भारतीय विकास मॉडल का सार है और यही उसे पश्चिमी दृष्टि से अलग करता है।

लक्ष्य स्पष्ट हो तो आगे की राह स्पष्ट हो जाती है। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य स्पष्ट है, ट्रांसपोर्ट, ऊर्जा और डिजिटल इंडिया को त्रिवेणी की तरह जोड़ना। भारत का लक्ष्य केवल आधारभूत ढांचे का केंद्र बनना नहीं, बल्कि वैश्विक नवाचार और ऊर्जा का भी केंद्र बनना है। ग्राम स्वावलंबन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने वाले ढांचे पर बल देना होगा। क्योंकि यही एकात्म मानव दर्शन को साकार करने का मार्ग है। पं. दीनदयाल उपाध्याय की इसी भावभूमि, इसी मंत्र को अंगीकार कर कल्पना की गई थी इस आधार- Infra Confluence 2025 की।

यह रोडमैप भारत को आत्मनिर्भर, सांस्कृतिक रूप से प्रामाणिक और पर्यावरणीय रूप से संतुलित बनाकर विश्व में एक नई पहचान देगा।

‘आधार – Infra Confluence 2025’ जैसे आयोजन केवल विमर्श का मंच नहीं, बल्कि कार्यान्वयन का खाका हैं। यदि भारत अपनी परंपरा की समग्र दृष्टि को आधुनिक नवाचार और पारदर्शिता के साथ जोड़ सके, तो ‘विकसित भारत 2047’ का सपना केवल घोषणापत्र नहीं, बल्कि यथार्थ होगा।

आधारभूत ढांचा इस यात्रा का इंजन है, जो राष्ट्र को गति, समाज को समरसता और व्यक्ति को अवसर देता है। यही है भारत का अनुभव, यही है उसका दर्शन और यही है 2047 की राह।

X@hiteshshankar

Topics: Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS)#PanchjanyaAIC25#PanchjanyaAIC25 : विकास का भारतीय अनुभवदर्शन और 2047 की राह Aadhaar Infra Confluence 2025राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघमुकुल कानिटकर: Mukul Kanitkar. (Name of a personपंडित दीनदयाल उपाध्यायa prominent figure in the RSS.)पाञ्चजन्य विशेषविेकसित भारत 2047Pandit Deendayal UpadhyayaRoadmap to make India self-reliant.मुख्यमंत्री रेखा गुप्ताहितेश शंकर: Hitesh ShankarChief Minister Rekha Guptaआधार Infra Confluence 2025
हितेश शंकर
हितेश शंकर
हितेश शंकर पत्रकारिता का जाना-पहचाना नाम, वर्तमान में पाञ्चजन्य के सम्पादक [Read more]
Share
Tweet
SendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

न्यूयॉर्क में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री मोहनराव भागवत

सरसंघचालक जी का विदेश प्रवास : बात भारत की

आघात की राजनीति

Delhi Building Collapse: सत्य निकेतन हादसे में 3 की मौत, CM रेखा गुप्ता बोलीं- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे 

श्री मोहन भागवत, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

संघ का शताब्दी वर्ष और विश्व के लिए भारत का संदेश

शिकागो में 1893 में आयोजित विश्व धर्म संसद के मंच पर विराजमान स्वामी विवेकानंद। इसी मंच से उन्होंने पश्चिम को हिंदू धर्म और वेदांत से परिचित कराते हुए अपना पहला भाषण दिया था।

सरसंघचालक श्री मोहन भागवत का विदेश प्रवास : क्षण-विलक्षण

सरसंघचालक मोहन भागवत का लंदन दौरा: खालसा जत्था गुरुद्वारे में मत्था टेका, स्वामी नारायण मंदिर में पूजा

Load More

ताज़ा समाचार

पुलिस की गिरफ्त में आरोपी शाकिब

प्रयागराज : गाय चोरी करने वाला शाकिब गिरफ्तार 

विदेशी अंशदान का नियमन : आज के समय की आवश्यकता

विद्यार्थियों के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

मुख्यमंत्री युवा भविष्य निर्माण योजना : पहले चरण में 11 हजार छात्र-छात्राओं को मिलेगी फ्री ऑनलाइन कोचिंग

Weather Update: 8 सितंबर को उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और बंगाल में भारी बारिश, 70KM प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी आंधी

प्रतीकात्मक चित्र

ब्रिटेन: सोशल मीडिया पोस्ट के चलते 5 साल में 60 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार, अभिव्यक्ति की आजादी पर छिड़ी बहस

प्रतीकात्मक तस्वीर

‘हिंदू बहन-बेटियों पर बुरी नजर रखते हैं जिहादी’, VHP ने गरबा के लिए तय किए दिशा-निर्देश, हिंदू परंपरा का करना होगा पालन

हिमालय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में दीप प्रज्जवलित करते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी।

हिमालय दिवस: मुख्यमंत्री धामी की घोषणा- हर वर्ष प्रदान किया जाएगा ‘हिमालय विभूति सम्मान’

कोर्ट का फैसला (प्रतीकात्मक चित्र)

हल्द्वानी : शुद्धिकरण विवाद पर हाईकोर्ट में 2 FIR, सरकार ने दिया जवाब, याचिका निस्तारित

आज का सोना चांदी भाव

Gold Silver Price Today: सोना-चांदी के दाम में नरमी, जानें शहर का ताजा भाव

Weather Update: 12 घंटे के भीतर 20 राज्यों में मूसलाधार बारिश… मौसम विभाग ने जारी कर दी चेतावनी

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies