गत 18 सितंबर को महाराष्ट्र के संभाजीनगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री मधुभाई कुलकर्णी का निधन हो गया। 88 वर्षीय श्री कुलकर्णी स्थानीय डॉ. हेडगेवार चिकित्सालय में एक माह से भर्ती थे। उन्होंने मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया था। उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार उनका पार्थिव शरीर रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, आर. के. दमाणी मेडिकल कॉलेज को साैंप दिया गया।
मधुभाई का पूरा नाम माधव विनायक कुलकर्णी था। उनका जन्म 17 मई, 1938 को कोल्हापुर में हुआ था। उनकी प्राथमिक शिक्षा चिकौडी (कर्नाटक) में हुई। चिकौडी में ही उन्होंने संघ शाखा में जाना प्रारंभ किया। 1954 में उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा विद्यापीठ हाईस्कूल, कोल्हापुर से उत्तीर्ण की। उन्होंने रूपारेल कॉलेज, मुंबई से 1958 में बी. ए. की डिग्री प्राप्त की
। कुछ समय उन्होंने मुंबई में बिक्री कर कार्यालय में नौकरी भी की। फिर उन्होंने दयानंद शैक्षणिक महाविद्यालय, सोलापुर से 1960-61 में बी. एड. की शिक्षा पूर्ण की। मधुभाई 1962 में संघ के प्रचारक निकले। उन्होंने संघ में अनेक दायित्वों का निर्वहन किया।
1962 से 1963 तक वे जलगांव जिले में तालुका प्रचारक रहे। 1963 से 1970 तक छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में जिला प्रचारक का दायित्व निभाया। 1970 से 1980 तक सोलापुर में विभाग प्रचारक, 1980 से 1984 तक पुणे में महानगर प्रचारक रहे।
1984 से 1996 तक उन्होंने गुजरात में प्रांत प्रचारक के नाते संघ कार्य को आगे बढ़ाया। 1996 से 2003 तक पश्चिम क्षेत्र के क्षेत्र प्रचारक और 2003 से 2009 तक अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख का दायित्व निभाया। 2009 में उन्हें अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल का सदस्य बनाया गया। इस दायित्व को उन्होंने 2015 तक निभाया।
2015 के पश्चात दायित्व मुक्त होकर वे अपने अनुभव का लाभ स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं को देते रहे। इस दौरान उनका केंद्र संभाजीनगर रहा। अभी कुछ समय पहले उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त 10 कड़ियों की एक लेखमाला लिखी थी जो पाञ्चजन्य में ससम्मान प्रकाशित हुई थी। अस्पताल में भर्ती होने से पहले तक वे नित्य शाखा में जाते थे। ऐसे कर्मयोगी को पाञ्चजन्य परिवार की भावभीनी श्रद्धांजलि।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक श्री मधुभाई कुलकर्णी
द्वारा
संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त 10 कड़ियों की एक लेखमाला

















