इस वर्ष बाढ़ और बारिश अपने रिकॉर्ड तोड़ रही है। इसका सबसे बुरा असर हुआ है पंजाब पर, जहां इस साल आई बाढ़ ने 1988 का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। इस बीच अब केंद्र सरकार लगातार बाढ़ग्रस्त पंजाब की मदद कर रही है। इसी क्रम में केंद्र सरकार ने पंजाब को ‘गंभीर बाढ़ प्रभावित’ घोषित करने पर सहमति दे दी है। इससे न सिर्फ राहत फंड में भारी इजाफा होगा, बल्कि घरों के मलबे में दबे लोगों को भी अब 3 लाख तक का मुआवजा मिल सकेगा। साथ ही साथ अब पंजाब सरकार को अगले 50 साल के लिए 595 करोड़ रुपए का सॉफ्ट लोन भी मिलेगा। इससे क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के पुनर्निमाण में सहायता होगी।
बाढ़ से 13,289 करोड़ का नुकसान
बाढ़ की विभीषिका ने पंजाब को हिला कर रख दिया। 7 सितंबर 2025 को केंद्र को सौंपी गई अस्थायी रिपोर्ट में कुल 13,289 करोड़ रुपये का नुकसान बताया गया। जल संसाधन विभाग को 1,520 करोड़, ग्रामीण विकास और पंचायती राज को 5,043 करोड़ का नुकसान हुआ। स्वास्थ्य विभाग का नुकसान 780 करोड़, पंजाब मंडी बोर्ड को 1,022 करोड़, लोक निर्माण विभाग को 1,970 करोड़। कृषि विभाग को 317 करोड़, शिक्षा को 542 करोड़, बिजली को 103 करोड़ और पशुपालन को भी 103 करोड़ का नुकसान हुआ।
केंद्र की मदद से बंपर बढ़ोतरी: घरों के लिए 3 लाख तक मुआवजा
केंद्र ने राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता (SASCI) योजना के तहत पंजाब को 595 करोड़ रुपये का सॉफ्ट लोन देने का ऐलान किया है। ये लोन 50 साल के लिए है। इसका इस्तेमाल बाढ़ से क्षतिग्रस्त सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को ठीक करने में होगा – सड़कें, पुल, स्कूल, सब दुरुस्त होंगे। एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष) के तहत घरों के मुआवजे में भी बड़ा बदलाव आया है। पहले पूरी तरह से नष्ट हुए घर के लिए 1.20 लाख रुपये मिलते थे, अब ये राशि 3 लाख तक हो गई। फसल नुकसान के मुआवजे में कोई बदलाव नहीं, लेकिन राज्य सरकार पहले ही प्रति एकड़ 20,000 रुपये की घोषणा कर चुकी है। एसडीआरएफ में ये सिर्फ 6,800 रुपये है। फंडिंग का अनुपात केंद्र और राज्य का 75:25 है, यानी पंजाब को भी अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी।
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केंद्रीय मंत्री कर रहे पंजाब का दौरा
बाढ़ की त्रासदी को करीब से देखने केंद्र के मंत्री भी उतर पड़े। गुरुवार को जितेंद्र सिंह और जितिन प्रसाद ने पठानकोट व गुरदासपुर के बाढ़ग्रस्त इलाकों का दौरा किया। उन्होंने नुकसान का आकलन किया, लोगों से बात की। ये विजिट सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि केंद्र की संवेदनशीलता दिखाती है।
19 सितंबर 2025 को चीफ सेक्रेटरी के.ए.पी. सिन्हा की अगुवाई में हाई-लेवल मीटिंग होनी है। यहां तय होगा कि केंद्र से कितने अतिरिक्त फंड मांगे जाएं। ये मीटिंग पंजाब की रिकवरी की दिशा तय करेगी।

















