नई दिल्ली: एक मुहावरा है ‘गरीबी में आटा गीला’। पाकिस्तान की स्थिति ऐसी ही हो गई है। वहां लोग आटे के लिए तरस रहे हैं। पहले से ही गरीबी और भुखमरी झेल रहे पाकिस्तान के ऊपर नया संकट आटे का आ खड़ा हुआ है। यह संकट पंजाब में गेहूं की अंतर-प्रांतीय आवाजाही पर अघोषित प्रतिबंध के कारण पैदा हुआ है। यह बात खुद पाकिस्तान का अखबार DAWN कह रहा है। वहां आई बाढ़ के कारण गेहूं को दूसरे राज्यों में भेजने की किल्लत पैदा हो गई जिससे अन्य प्रांतों में आटे की भारी कमी और कीमतों में भारी उछाल आया है।
आटे की किल्लत के कारण सिर फुटव्वल की स्थिति…
आटे की किल्लत के कारण पाकिस्तान में राजनेताओं और मिल मालिकों के बीच सिर फुटव्वल की स्थिति पैदा हो गई है। हालांकि पंजाब के अधिकारियों ने औपचारिक प्रतिबंध से इनकार किया है। लेकिन असामान्य गेहूं की आवाजाही पर अंकुश लगाने के लिए जांच चौकियां स्थापित करने की बात स्वीकार की है। वहां के दूसरे राज्य कह रहे हैं कि ऐसा करना फ्री मार्केट की भावना के विपरित है और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।
20 किलो आटा 2800 रुपये का…….
पंजाब फ्लोर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रियाजुल्ला खान का कहना है कि प्रांत के बॉर्डर पर चौकियां बनाकर अन्य क्षेत्रों में गेहूं और आटे के परिवहन को रोका जा रहा है। जिसके कारण खैबर पख्तूनख्वा में आटे की कीमतें आसमान छू रही हैं। यहां 20 किलो आटा 2,800 पाकिस्तानी रुपए तक बिक रहा है। पंजाब प्रांत में 20 किलो आटा 1,800 पाकिस्तानी रुपए में बिक रहा है। वहां के गवर्नर फैसल करीम कुंडी का कहना है कि गेहूं को दूसरे राज्यों में भेजने का प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 151 का घोर उल्लंघन और राष्ट्रीय एकता का गंभीर उल्लंघन है।
वहीं, पंजाब प्रांत के अधिकारी खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और जमाखोरी और तस्करी रोकने का हवाला देकर प्रतिबंधों का बचाव कर रहे हैं। अधिकारी कह रहे हैं कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए गेहूं को चारा मिलों में ले जाने या अन्य प्रांतों में बढ़ी हुई दरों पर बेचने से रोकना महत्वपूर्ण था। खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में गेहूं पंजाब प्रांत से आता है और आटा के लिए यहीं की निर्भरता है। इस कारण खैबर पख्तूनख्वा और सिंध में इस कदम की आलोचना हो रही है और सिर फुटव्वल जैसा माहौल है।
















