सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसमें तमिलनाडु सरकार के मंदिरों के फंड से मैरिज हॉल बनाने के फैसले को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने मंदिरों के धन का उपयोग मैरिज हॉल बनाने के फैसले पर सवाल उठाते हुए मंगलवार (16 सितंबर) को कहा कि धार्मिक स्थलों की संपत्ति और परिसर का उपयोग ऐसे हॉल के निर्माण के लिए नहीं किया जाना चाहिए, जहां अश्लील डांस और गाने बजाए जा सकते हैं। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संदीप मेहता की पीठ ने कहा, “श्रद्धालुओं द्वारा दिया गया दान मैरिज हॉल के निर्माण के लिए नहीं है। यहां न केवल लोग अश्लील गानों पर डांस करेंगे, बल्कि लोग शराब परोसने की भी मांग करेंगे। अगर इसकी अनुमति दी गई तो इस तरह की गतिविधियों पर कोई नियंत्रण नहीं रहेगा। इसका उपयोग मंदिर के सुधार के लिए हो सकता है।”
‘भक्त मैरिज हॉल बनाने के लिए दान नहीं करते हैं’
वहीं, मंदिर परिसर का दुरुपयोग होने की आशंका पर तमिलनाडु सरकार ने कहा कि मैरिज हॉल का निर्माण सार्वजनिक उद्देश्य के लिए किया गया था, क्योंकि राज्य में मंदिर परिसर में विवाह करना बहुत सामान्य बात है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और जयदीप गुप्ता ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने कहा कि मंदिरों में विवाह हमेशा धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार बिना गाने और डांस के संपन्न होते हैं। यहां धार्मिक स्थल की पवित्रता का उल्लंघन नहीं होता है। इस पर शीर्ष अदालत ने सुझाव दिया कि मैरिज हॉल के बजाय इस धन का उपयोग शैक्षणिक संस्थानों, अस्पताल बनाने जैसे धर्मार्थ कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। पीठ ने आगे कहा, “भक्त मैरिज हॉल बनाने के लिए दान नहीं करते हैं। जो लोग दान करते हैं, वे इस बात पर सहमत नहीं होंगे कि इन गतिविधियों की अनुमति दी जाए।”
‘मंदिर का एक भी पैसा खर्च करना अवमानना के समान’
दरअसल, हाई कोर्ट ने तमिलनाडु के विभिन्न स्थानों पर स्थित पांच मंदिरों के फंड के उपयोग की अनुमति देने वाले सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। वस्तुतः राज्य प्राधिकरण को मंदिर के धन का उपयोग न करने पर रोक लगा दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मंदिर का एक भी पैसा खर्च करना अवमानना के समान होगा।
बता दें कि मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर को होगी। पीठ ने स्पष्ट करते हुए यह भी कहा, “हम इस मामले की सुनवाई करेंगे। मुद्दा यह है कि सरकार का फैसला सही था या गलत। हम याचिकाकर्ताओं को कोई स्थगन आदेश नहीं दे रहे हैं।”















