प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कोलकाता में 16वीं संयुक्त कमांडर्स सम्मेलन (सीसीसी) का उद्घाटन करते हुए सेना की सुरक्षा स्थिति और ऑपरेशनल तैयारी की समीक्षा की। उन्होंने पिछले दो सालों में लागू किए गए रक्षा सुधारों पर नजर डाली और आने वाले दो सालों के लिए नई योजनाओं पर बात की। ये सम्मेलन सेना के आला अफसरों के लिए बड़ा मंच है, जहां देश की सुरक्षा चुनौतियों पर खुलकर चर्चा होती है।
सेना के हर पहलू को प्रधानमंत्री ने छुआ
कोलकाता में हुए इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने सेना के हर पहलू को छुआ। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह, फॉरेन सेक्रेटरी विक्रम मिस्री और डिफेंस प्रोडक्शन सेक्रेटरी जैसे बड़े अधिकारी मौजूद थे। सम्मेलन में ऑपरेशन सिंदूर और भविष्य के युद्ध पर फोकस रहा, जहां नई तकनीक और रणनीतियों की भूमिका पर चर्चा हुई।
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रक्षा सुधारों की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने सेना के सुधारों की खूब तारीफ की। 2025 को रक्षा में ‘सुधारों का साल’ घोषित किया गया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो सालों में जो बदलाव आए हैं, वो कमाल के हैं। आने वाले दो सालों में और मजबूती लाने की योजना है। खासतौर पर जॉइंटनेस (तीनों सेनाओं का एकजुट होना), आत्मनिर्भरता (खुद की चीजें बनाना) और इनोवेशन (नई सोच) पर जोर दिया। उन्होंने डिफेंस मिनिस्ट्री को निर्देश दिए कि भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तेजी से कदम उठाए जाएं। चाहे कोई भी हालात हो, सेना हमेशा तैयार रहे।
युद्ध तैयारियों की समीक्षा
प्रधानमंत्री मोदी को सेना की बैटल रेडीनेस पर पूरी जानकारी दी गई। ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में ऑपरेशनल तैयारी पर ब्रीफिंग हुई, जहां उभरती तकनीक और टैक्टिक्स के चलते युद्ध का स्वरूप बदल रहा है। सेना ने राष्ट्र निर्माण, एंटी-पाइरेसी मिशन, संघर्ष क्षेत्रों से भारतीयों को सुरक्षित लाना और दोस्त देशों को मानवीय मदद व आपदा राहत देने के कामों में अपनी भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने इन सबकी सराहना की और कहा कि सेना न सिर्फ सीमाओं की रक्षा करती है, बल्कि दुनिया में भारत की अच्छी छवि बनाती है।

















