इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सोमवार को दिल खोलकर बात की। उन्होंने माना कि उनका देश दुनिया से अलग-थलग पड़ गया है। वित्त मंत्रालय के अकाउंटेंट जनरल के सम्मेलन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इजरायल को खुद पर ही निर्भर रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा,”हम एक ऐसी अर्थव्यवस्था बना रहे हैं जो आत्मनिर्भर हो।” वह कहते हैं कि हालांकि उन्हें ये शब्द पसंद नहीं। लेकिन हकीकत यही है कि हालात उन्हें मजबूर कर रहे हैं। ये पहली बार है जब नेतन्याहू ने इतनी साफगोई से इस अलगाव को स्वीकार किया।
आर्थिक दबाव में देश
नेतन्याहू ने चिंता जताई कि यूरोपीय देश इजरायल पर हथियार प्रतिबंध लगा सकते हैं। इससे न सिर्फ रक्षा क्षेत्र प्रभावित होगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा, “हमें अपना रक्षा उत्पादन खुद बढ़ाना होगा। न सिर्फ रिसर्च, बल्कि असली हथियार बनाने की क्षमता भी।” ये प्रतिबंध अगर लगे, तो इजरायल को विदेशी मदद पर कम भरोसा करना पड़ेगा। नेतन्याहू का मानना है कि ये बदलाव इजरायल को मजबूत बनाएंगे, लेकिन ये आसान नहीं होगा। आर्थिक अलगाव का मतलब है कि व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारियां सब प्रभावित होंगी।
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दो बड़ी चुनौतियां जो इजरायल को घेर रही
पहली चुनौती है यूरोप में मुस्लिम आबादी का बढ़ना। नेतन्याहू ने कहा कि मुस्लिम देशों से लगातार लोग यूरोप जा रहे हैं। अब वहां मुस्लिम समुदाय इतना बड़ा हो गया है कि वो सरकारों पर इजरायल-विरोधी फैसले लेने का दबाव डाल रहे हैं। “ये जनसांख्यिकीय बदलाव इजरायल के लिए खतरा बन रहा है,” उन्होंने जोर देकर कहा। दूसरी समस्या डिजिटल दुनिया की है। कतर, चीन जैसे देश और कुछ एनजीओ सोशल मीडिया और एआई का इस्तेमाल करके पश्चिमी मीडिया को इजरायल के खिलाफ भड़का रहे हैं। खासकर टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म पर ये अभियान तेज हैं। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद से ये दोनों चुनौतियां और बढ़ गई हैं। इजरायल को युद्ध के बीच ये सब संभालना पड़ रहा है।
घरेलू मोर्चे पर सियासी तूफान
नेतन्याहू के बयान पर इजरायल में ही हंगामा मच गया। विपक्ष के नेता याएर लैपिड ने तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “अलगाव कोई किस्मत नहीं, ये नेतन्याहू की गलत नीतियों का नतीजा है।” डेमोक्रेट्स पार्टी के याएर गोलन ने भी आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपा रही है। उद्योग जगत ने भी चिंता जताई कि ये अलगाव अर्थव्यवस्था को कमजोर करेगा। लेकिन नेतन्याहू का कहना है कि ये चुनौतियां इजरायल को और मजबूत बनाएंगी।

















