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ब्रिटेन के शहरों में पर्यटक हुए कम, होटल शरणार्थियों के लिए आरक्षित

सागर किनारे बसा बौर्नेमौथ भी ऐसा ही एक शहर है, जिसकी पहचान लगभग पूरी तरह से बदल गई है। स्काई न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार वहां के लोग इस विषय में बात तो करना चाहते हैं, मगर कैमरे पर नहीं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Sudhir Kumar Pandey
Sep 14, 2025, 09:18 pm IST
in विश्व
ब्रिटेन में शरणार्थियों का हो रहा है विरोध, बुकिंग निरस्त करा रहे पर्यटक

ब्रिटेन में शरणार्थियों का हो रहा है विरोध, बुकिंग निरस्त करा रहे पर्यटक

ब्रिटेन इनदिनों उबल रहा है। कीर स्टार्मर की नीतियों से लोग गुस्से में हैं। इसमें सबसे चर्चित नीति है शरणार्थियों को मिल रही सुविधाएं। इस वजह से कई शहरों का रंग-रूप पूरी तरह से बदल गया है। कई शहरों में पर्यटक भी कम हो रहे हैं। लोग ये प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर होटल में अवैध शरणार्थियों को क्यों रखा जा रहा है? जिन होटल में इन शरणार्थियों को टिकाया जा रहा है, उनकी लागत कितनी है?

सागर किनारे बसा बौर्नेमौथ भी ऐसा ही एक शहर है, जिसकी पहचान लगभग पूरी तरह से बदल गई है। स्काई न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार वहां के लोग इस विषय में बात तो करना चाहते हैं, मगर कैमरे पर नहीं। एक महिला ने कहा कि बौर्नेमौथ लोगों के प्रवासन के कारण बहुत बदल गया है। यहां का पूरा माहौल बदल गया है। यहां विदेशी भाषा बोलने वाले बहुत लोग हो गए हैं। ब्रिटिश लोग बहुत कम दिखने लगे हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, “शहर की जनसांख्यिकी में बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। 2011 और 2021 की जनगणना के बीच, बौर्नेमौथ में गैर-ब्रिटिश मूल की आबादी में 47% की वृद्धि हुई, और तब से ब्रिटेन में आने वाले लोगों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।”

लोगों का कहना है यह शहर अब ब्रिटिश नहीं रह गया है। यहां के होटल में शरणार्थी आकर बस गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इस शहर में भी उन होटल के बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जहां पर शरणार्थियों को टिकाया गया है। इनका विरोध करने वाले लोगों में से एक ने कहा कि वे इन्हें नहीं जानते। ये कौन लोग हैं? इन्हें देखकर आपको लगेगा ही नहीं कि आप इंग्लैंड में है?
हालांकि लोगों का कहना है कि यह शहर हमेशा से ही संघर्षों का केंद्र है। पहले यहाँ पर पोलिश लोग और पूर्वी यूरोपीय लोगों के बीच होता था, और अब यह शरणार्थियों और आम लोगों के बीच है।

एक ही शहर नहीं जहां ऐसा विरोध हो रहा है

केवल बौर्नेमौथ ही नहीं है, ऐसे विरोध-प्रदर्शन लगभग हर शहर में हो रहे हैं। Skegness में भी ऐसे ही मामले सामने आ रहे हैं और वहां पर लोग छुट्टियां निरस्त कर रहे हैं। यह शहर भी सागर के किनारे बसा है। यहां भी कई होटल में शरणार्थियों को टिकाया गया है। अब उन होटलों में, जिनमें आधे में शरणार्थी रह रहे हैं और कुछ हिस्से को पर्यटकों के लिए रखा गया है, वहां बुकिंग निरस्त हो रही है। प्रवासी लोग इस सीमा तक इस शहर में आ गए हैं कि लोग इस शहर में आना पसंद नहीं कर रहे हैं।

एक्सप्रेस.को.यूके कि रिपोर्ट के अनुसार तीन साल से शरणार्थियों को टिका रहे द कन्ट्री होटल में भी विरोध प्रदर्शन हुए हैं। नॉर्थ परैड होटल की संचालिका जुलिएन बंक ने कहा कि पिछले 25 वर्षों से यह होटल चल रहा है, मगर अब इन दिनों बढ़ते हुए प्रवासियों की संख्या के कारण बुकिंग निरस्त हो रही हैं।

‘द सन’ के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि उनके साथ कोच कंपनियां पिछले पंद्रह वर्षों से छुट्टियों को आयोजित कर रही थीं, मगर अब वे निरस्त करने का प्रयास कर रही हैं। अब लोग उन होटलों का भी विरोध कर रहे हैं, जिनमें शरणार्थी नहीं रहते हैं। डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का कहना है कि वह होटलों को शरणार्थियों से मुक्त करने के लिए और पर्यटकों के लिए शहर खोलने के लिए कानूनी कार्यवाही के विकल्प तलाश रही है। ईस्ट लिंडसे काउंसिल के नेता का कहना है कि उन्होंने सरकार को अपना पक्ष बता दिया था कि वे इस नीति के खिलाफ हैं।

बड़े होटलों में इन शरणार्थियों को क्यों बसाया जा रहा?

लोग सरकार से प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर उन्हीं के पैसों से बड़े होटलों में इन शरणार्थियों को क्यों बसाया जा रहा है? क्यों इन्हें इतनी सुविधाएं दी जा रही हैं और जो यहां के आम साधारण और गरीब लोग हैं, वे सड़कों पर अपना जीवन बिता रहे हैं? जो ब्रिटेन के चेहरे को बदल रहे हैं, उन्हें हर प्रकार की सुविधाएं, आरामदायक जीवन, बढ़िया भोजन, मोबाइल आदि क्यों दिया जा रहा है? इस क्यों का उत्तर शायद किसी के भी पास नहीं है, सिवाय कुछ लोगों द्वारा स्थापित किये जा रहे इस सिद्धांत को छोड़कर कि यह जनसंख्या का रिप्लेसमेंट है।

 

Topics: होटल में शरणार्थीजनसांख्यिकी में बदलावजनसंख्या का रिप्लेसमेंटकीर स्टार्मरशरणार्थी नीतिब्रिटेन शरणार्थी संकटब्रिटनब्रिटेन अवैध प्रवासीजनसंख्या बदलाव ब्रिटेन
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