चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा: SIR कब कराना है, ये हम तय करेंगे, कोर्ट नहीं
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चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा: SIR कब कराना है, ये हम तय करेंगे, कोर्ट नहीं

चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर SIR का समय तय करने का अधिकार बताया। अश्विनी उपाध्याय की PIL पर खारिज करने की गुजारिश।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह — edited by कुलदीप सिंह
Sep 14, 2025, 07:50 am IST
in भारत
ECI tells Supreme court on SIR

प्रतीकात्मक तस्वीर

स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर मचे बवाल के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया है कि अदालत SIR का समय तय नहीं कर सकती। ये आयोग का संवैधानिक अधिकार है। इसको लेकर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक एफिडेविट दाखिल करके अपनी बात रखी है। दरअसल, इसको लेकर वकील अश्विनी उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर की है, जिसमें मांग की गई है कि पूरे देश में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को नियमित अंतराल पर कराया जाए। उनका कहना है कि इससे अवैध विदेशी घुसपैठिए वोटर लिस्ट को प्रभावित नहीं कर पाएंगे।

PIL का बैकग्राउंड और उपाध्याय की दलीलें

अश्विनी उपाध्याय की PIL असल में अवैध प्रवासियों की समस्या पर केंद्रित है। वे कहते हैं कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और म्यांमार से आने वाले अवैध तत्वों ने कई राज्यों में वोटर लिस्ट को बिगाड़ दिया है। खासकर बिहार में हर विधानसभा क्षेत्र में 8,000 से 10,000 फर्जी या डुप्लिकेट नाम हो सकते हैं। इससे जनसंख्या का संतुलन बिगड़ गया है और चुनाव प्रभावित हो रहे हैं। उपाध्याय ने मांग की है कि SIR को सालाना या नियमित आधार पर कराया जाए, ताकि वोटर लिस्ट साफ हो सके। ये रिवीजन मतदाता सूची को अपडेट करने का एक खास तरीका है, जिसमें घर-घर जाकर सत्यापन किया जाता है। लेकिन चुनाव आयोग को ये पसंद नहीं आया। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के तहत रिवीजन का पूरा अधिकार आयोग के पास है। अदालत अगर समय तय करेगी, तो ये हमारी स्वायत्तता में दखल होगा।

इसे भी पढ़ें: बांकेबिहारी मंदिर में VIP पर्ची से दर्शन व्यवस्था होगी बंद, अब रेलिंग से होगा दर्शनार्थियों का प्रवेश

चुनाव आयोग की दलीलें

चुनाव आयोग ने हलफनामे में साफ शब्दों में कहा, “SIR कब कराना है, ये अदालत तय नहीं कर सकती।” उनका तर्क है कि कोई कानूनी प्रावधान नहीं है जो फिक्स्ड टाइमफ्रेम पर रिवीजन की बाध्यता बनाए। आयोग हालात के हिसाब से समरी रिवीजन, इंटेंसिव रिवीजन या स्पेशल रिवीजन कर सकता है। वैसे, उन्होंने कोर्ट को बताया कि 1 जनवरी 2026 को क्वालीफाइंग डेट के साथ SIR पहले से शेड्यूल्ड है। सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को तैयारी के निर्देश दे दिए गए हैं। 10 सितंबर 2025 को दिल्ली में CEOs का कॉन्फ्रेंस भी हुआ, जहां प्लानिंग की समीक्षा की गई। आयोग ने जोर देकर कहा कि वोटर लिस्ट की शुद्धता हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन तरीका और समय हम ही चुनेंगे। PIL को खारिज करने की गुजारिश भी की गई।

SIR का विरोध कर रहा विपक्ष

ये मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि राजनीतिक रंग भी ले चुका है। बिहार विधानसभा चुनाव से पहले चल रही स्पेशल रिवीजन पर विपक्षी INDIA गठबंधन ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि ये प्रक्रिया वोटर लिस्ट को पक्षपाती बनाने की कोशिश है। आयोग ने जवाब दिया कि राजनीतिक दल विरोध प्रदर्शन करने की बजाय असली वोटरों की पहचान में मदद करें।

इसे भी पढ़ें: प्रधानमंत्री मोदी और उनकी माता के डीपफेक वीडियो पर FIR, भाजपा ने लगाया बड़ा आरोप

सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला

8 सितंबर 2025 को जस्टिस सूर्य कांत की बेंच ने एक अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि आधार कार्ड को वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए 12वें वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। चुनाव आयोग को ये पसंद नहीं था, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है, पर पहचान और निवास का सबूत जरूर है। इससे लाखों लोगों को आसानी मिलेगी। आयोग ने अपनी चिंताएं जताईं, लेकिन कोर्ट ने इसे मंजूर कर लिया।

Topics: वोटर लिस्टअवैध प्रवासीillegal migrantsSupreme Courtबिहार चुनावसुप्रीम कोर्टSIRअश्विनी उपाध्यायBihar electionsPILचुनाव आयोगElection CommissionAshwini UpadhyayVoter list
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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