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उपराष्ट्रपति चुनाव : जनसेवा से उपराष्ट्रपति तक ‘राधाकृष्णन’

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन का जीवन सार्वजनिक सेवा, राजनीति और नेतृत्व की मिसाल है। तमिलनाडु से राजनीति में कदम रखते हुए वे सांसद, राज्यपाल और संगठनकर्ता के रूप में सक्रिय रहे। 40 वर्ष के अनुभव, विनम्रता और समर्पण के साथ उन्होंने देश की सेवा की और अब संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभाएंगे

Written byPanchjanyaPanchjanya
Sep 13, 2025, 08:25 pm IST
in भारत, विश्लेषण
उपराष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत के बाद सी. पी. राधाकृष्णन को बधाई देते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

उपराष्ट्रपति चुनाव में शानदार जीत के बाद सी. पी. राधाकृष्णन को बधाई देते प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी

भारत के 15वें उपराष्ट्रपति चंद्रपुरम पोनूसामी राधाकृष्णन (सी.पी. राधाकृष्णन) का जीवन सार्वजनिक सेवा, राजनीति और नेतृत्व की मिसाल है। 9 सितंबर, 2025 को राजग के समर्थन से वे उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। तमिलनाडु के छोटे शहर तिरुपुर से भारत के दूसरे सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की यात्रा उनकी कड़ी मेहनत, समर्पण और नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है। चार दशक से अधिक के राजनीतिक जीवन में उन्होंने समर्पण, विनम्रता और बुद्धिमत्ता के मानक स्थापित किए हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

राधाकृष्णन का जन्म 20 अक्तूबर, 1957 को तमिलनाडु के तिरुपुर में हुआ था। उनके पिता एलआईसी एजेंट थे और माता गृहिणी। कोंगु वेल्लालर गाउंडर ओबीसी समुदाय से आने वाले पहले उपराष्ट्रपति हैं। वे बचपन से ही पढ़ाई और खेल दोनों में सक्रिय रहे। वे कॉलेज में टेबल टेनिस के चैम्पियन और लंबी दूरी के धावक भी रहे। उन्होंने वी.ओ. चिदंबरम कॉलेज, कोयंबतूर से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री प्राप्त की, जिसने उन्हें प्रबंधन और संगठनात्मक कौशल में दक्ष बनाया, जो आगे उनके राजनीतिक करियर में सहायक साबित हुआ। उन्होंने नागरिक शास्त्र में शोध किया और ‘सामंतवाद का पतन’ विषय पर पीएचडी उपाधि प्राप्त की।

रा.स्व.संघ से जुड़ाव

राधाकृष्णन 16 साल की उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। 1974 में भारतीय जनसंघ की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य बने और संगठनात्मक कार्य में योगदान दिया। वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सहायक भी रहे। 1998 में कोयंबतूर से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव जीत कर वे राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर आए। उस समय कोयंबतूर में बड़े आतंकी हमले के बाद विकास और सुरक्षा के मुद्दे प्रमुख थे, जिन्हें उन्होंने चुनाव प्रचार में प्रमुखता दी। 1999 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने फिर जीत दर्ज की और संसद के कपड़ा मंत्रालय की स्थायी समिति के अध्यक्ष रहे। साथ ही वे स्टॉक एक्सचेंज घोटाले की जांच के लिए बनी विशेष समिति के सदस्य भी थे। 2004 में वे भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने वाले सांसद बने।

उपराष्ट्रपति नए, लेकिन पाठक पुराने

संगठनात्मक और संवैधानिक दायित्व

तमिलनाडु में भाजपा को स्थापित करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2004 से 2007 तक वे तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने पार्टी को मजबूत किया और 19,000 किलोमीटर की ‘रथ यात्रा’ निकाली। यह यात्रा 93 दिनों तक चली, जिसमें उन्होंने नदियों के एकीकरण, समान नागरिक संहिता, आतंकवाद विरोधी जागरूकता, अस्पृश्यता उन्मूलन और मादक पदार्थों के दुरुपयोग पर रोक जैसे विषयों पर जोर दिया। उन्होंने तमिलनाडु के लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया। उनकी इस यात्रा ने भाजपा को दक्षिण भारत में मजबूती दी। 2016 में वे कॉयर बोर्ड के अध्यक्ष भी नियुक्त हुए। उनके कार्यकाल में कॉयर निर्यात में रिकॉर्ड वृद्धि हुई। 2020 से 2022 तक वे केरल भाजपा के प्रभारी भी रहे। फरवरी 2023 में उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। वहां उन्होंने 24 जिलों का दौरा किया तथा जनता की समस्याओं के निवारण पर जोर दिया।

मार्च 2024 में उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी के तहत तेलंगाना तथा पुदुचेरी का राज्यपाल भी बनाया गया। जुलाई 2024 में वे महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल बने। राज्यपाल के रूप में उन्होंने संवैधानिक और प्रशासनिक मामलों में प्रभावी भूमिका निभाई और जनता की समस्याओं के समाधान पर ध्यान केंद्रित किया। उनके सहनशीलता और अनुशासन जैसे गुण नेतृत्व और राजनीति में भी प्रभावी रहे। जनता से जुड़ाव और सादगी उनकी सबसे प्रमुख पहचान है। हाल के राजनीतिक संदर्भों में वह भाजपा के ‘मिशन दक्षिण’ के लिए भी महत्वपूर्ण नेता माने जाते हैं।

उपराष्ट्रपति चुनाव और जीत

21 जुलाई, 2025 को पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह पद रिक्त हो गया था। 9 सितंबर, 2025 को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव हुआ। राजग की ओर से राधाकृष्णन को उम्मीदवार बनाया गया। उन्होंने 452 प्रथम वरीयता मत प्राप्त कर विपक्ष के उम्मीदवार पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 मतों से हराया। मतदान में 98.20 प्रतिशत मतदान हुआ, जिसमें 767 सांसदों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सी.पी. राधाकृष्णन की जीत पर उन्हें बधाई दी और कहा कि उनका जीवन लगातार समाज सेवा, वंचितों को सशक्त बनाने और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए समर्पित रहा है। मोदी ने उनके बुद्धिमत्ता, विनम्रता, और जनसेवा के कार्यों की प्रशंसा की। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि राधाकृष्णन राज्यसभा के सफल संचालन में सक्षम होंगे।

पारिवारिक जीवन

1985 में श्री राधाकृष्णन का विवाह आर. सुमति से हुआ, उनके दो बच्चे हैं। वे सादगीपूर्ण जीवनशैली और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। उनकी मां जानकी अम्माल ने मीडिया से कहा कि उन्होंने अपने बेटे का नाम पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के सम्मान में रखा था। यह उनके लिए बहुत गर्व की बात है कि उनका बेटा इस पद पर पहुंचा। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने अपने बेटे का नामकरण किया था, तब उनके पति ने कहा था कि क्या वे यह नाम इसलिए रख रही हैं ताकि उनका बेटा एक दिन राष्ट्रपति बने। 62 साल बाद यह ठीक वैसा ही हुआ। राधाकृष्णन के भाई सी.पी. कुमारेश ने भी खुशी व्यक्त की और कहा कि राधाकृष्णन अब राज्यसभा का सफल संचालन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व की बात है और वे प्रधानमंत्री मोदी के विश्वास को बनाए रखेंगे। उपराष्ट्रपति के रूप में उनका पांच वर्ष का कार्यकाल होगा, जिसमें वे राज्यसभा के सभापति का कार्य भी करेंगे। उनके पास विधायी और संवैधानिक मामलों का व्यापक ज्ञान है। उनका अनुभव और नेतृत्व इस पद के लिए बहुत उपयुक्त है। वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 67 और 68 के अनुसार अपने पद की जिम्मेदारी निभाएंगे। उनका कार्यकाल देश के संवैधानिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।
सी. पी. राधाकृष्णन का जीवन एवं कार्य लंबी सेवा, निर्देशन और जनसेवा का सशक्त मिश्रण है। उन्होंने राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं।

Topics: अस्पृश्यता उन्मूलनरा.स्व.संघसमान नागरिक संहिताउपराष्ट्रपति चुनावपाञ्चजन्य विशेषसी.पी. राधाकृष्णनतमिलनाडु से राजनीतिआतंकवाद विरोधी जागरूकता
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