उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित हापुड़ रोड पर बनी अब्दुल्ला रेजीडेंसी पर प्रशासन ने बुलडोज़र चलाया। आरोप था कि यहां हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। पैमाइश के दौरान सामने आया कि बिल्डर महेंद्र गुप्ता और जावेद इक़बाल ने चाहरदीवारी बनाने के लिए सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा किया था। आवास विकास अधिकारियों ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।
अधिकारियों से बदसलूकी और मुकदमा
कार्रवाई के दौरान बिल्डरों की ओर से अधिकारियों के साथ बदसलूकी भी की गई। इस मामले में दोनों बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
गैंगस्टर शारिक से जुड़ा प्रोजेक्ट
खास बात यह है कि अब्दुल्ला रेजीडेंसी का संबंध कुख्यात गैंगस्टर शारिक से है। आरोप है कि पुलिस के डर से गैंगस्टर ने हिंदू बिल्डर का सहारा लेकर इस प्रोजेक्ट को तैयार किया।
गैंगस्टर परिवार पर पुराने आरोप
शारिक के दादा पर भी पहले कीमती सरकारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने के गंभीर आरोप लग चुके हैं। परिवार का विवादित इतिहास इस प्रोजेक्ट को और ज्यादा संदिग्ध बनाता है।
सरकार और मंत्रियों के आरोप
यूपी सरकार के मंत्रियों ने पहले ही आरोप लगाया था कि इस रेजीडेंसी में हिंदुओं को “नो एंट्री” का नियम बनाया गया था। इस पर सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।
सैकड़ों करोड़ की ज़मीन पर बनी रेजीडेंसी
सैकड़ों करोड़ रुपये की इस ज़मीन पर बनी अब्दुल्ला रेजीडेंसी के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई अभी भी जारी है। सरकार का कहना है कि किसी भी कीमत पर अवैध कब्ज़ा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

















