उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में पिछले 1 वर्ष में 1 हजार से ज्यादा अतिक्रमण को हटाया गया है. इस अतिक्रमण में करीब 68 हेक्टेयर जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया था. इस जमीन को भी खाली कर लिया गया है. संभल जनपद के चकरोड, बंजर जमीन और तालाब पर अतिक्रमण कर लिया गया था. अतिक्रमण की वजह से आम जन मानस को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट
उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 24 नवंबर को संभल में हुई हिंसा के बाद गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया गया है. सूत्रों के अनुसार, विगत एक साल में करीब 35 से ज्यादा अवैध मजहबी स्थलों को भी हटाया गया है. अवैध मजार और मस्जिद बनाकर करीब 2 हेक्टेयर सरकारी जमीन को कब्जा कर लिया गया था. इन सरकारी जमीनों को खाली कर लिया गया है. बता दें कि संभल हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया था. न्यायिक आयोग ने गत बृहस्पतिवार को अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंप दी है.
रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
बताया जा रहा है कि यह रिपोर्ट 450 पेज की है. इसमें संभल में दंगों का इतिहास, आजादी के बाद जनसंख्या परिवर्तन और सांप्रदायिक राजनीति के बारे में विस्तार से विवरण दिया गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि हिंदू आबादी पहले की अपेक्षा काफी कम हो गई है. लगातार संभल में दंगा होने के कारण हिंदू वहां से पलायन करता गया. इस वजह से हिंदुओं की आबादी वहां पर घटती चली गई और मुसलमानों की आबादी धीरे-धीरे काफी बढ़ गई.
संभल में हुए दंगे
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि संभल में वर्ष 1947 से लेकर अब तक करीब 15 दंगे हुए हैं जिसमें वर्ष 1948, वर्ष 1953, वर्ष 1958, वर्ष 1962, वर्ष 1978, वर्ष 1980, वर्ष 1990, वर्ष 1992, वर्ष 1995, वर्ष 2001 और 2019 के दंगे शामिल हैं.
संभल हिंसा और सर्वे विवाद
यह भी उल्लेखनीय है कि गत वर्ष नवंबर माह में जब संभल में हिंसा हुई थी. उस समय न्यायालय के आदेश पर सर्वे का कार्य हो रहा था. इस दौरान कुछ लोग हिंसा पर उतारू हो गए और सर्वे करने वाले अधिवक्ताओं और सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया था. उस दिन मौके पर पथराव की घटना की गई थी.
न्यायिक आयोग का गठन
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से न्यायिक आयोग का गठन किया गया था. उसमें जज देवेंद्र अरोड़ा की अध्यक्षता में पूर्व आईपीएस अधिकारी ए के जैन और अमित प्रसाद को सदस्य बनाया गया था.

















