उत्तराखंड: संवेदनशील स्थानों पर अवैध मजारें, ताबीज़, झाड़े, चादर का चल रहा धंधा
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होम भारत उत्तराखंड

उत्तराखंड: संवेदनशील स्थानों पर अवैध मजारें, ताबीज़, झाड़े, चादर का चल रहा धंधा

उत्तराखंड की धामी सरकार ने सरकारी जमीनों पर बनी अवैध मजारों को हटाने की मुहिम शुरू की है। नैनीताल हाई कोर्ट के निर्देश पर सर्वे कमेटी गठित, सुरक्षा चिंताओं और अंधविश्वास के बीच कार्रवाई तेज।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Apr 27, 2025, 07:23 am IST
in उत्तराखंड
Uttarakhand Illegel Majar

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून: उत्तराखंड की धामी सरकार ने सरकारी भूमि से अवैध मजारों को हटाने की मुहिम के पीछे एक मकसद और भी सामने आया है वो ये कि ज्यादातर मजारें अति संवेदनशील स्थानों पर बनाई गई है और इसे सुरक्षा कारणों से जोड़कर देखा जा रहा है।

नैनीताल हाई कोर्ट ने भी उत्तराखंड के मुख्य सचिव को निर्देशित किया है कि वे मजारों के लिए जिला अधिकारियों को सर्वे कमेटी बना कर कोर्ट में पेश करें। प्रारंभिक जानकारी में कोटद्वार, देहरादून के कैंट एरिया में अवैध मजारें बनी हुई हैं, विकास नगर यमुनोत्री हाईवे पर मजार बनी हुई है। जबकि आसान बैराज के पास की मजार को हटाया गया है। कालसी वन विभाग क्षेत्र में उत्तराखंड हिमाचल सीमा पर भूरे शाह की फ्रेंचाइजी मजार  है।

खास बात ये भी सामने आ रही है कि सरकारी जमीनों पर कब्जे की नियत से अवैध मजार बना कर उसे फिर वक्फ बोर्ड में दर्ज करवा दिया गया है। देहरादून के दून हॉस्पिटल में अवैध मजार बनाई थी जिसे धामी सरकार के बुल्डोजर ने ध्वस्त कर दिया। कुछ माह पहले दून कैंट एरिया के द्वार पर दून स्कूल के भीतर मजार बनाई जा रही थी जिसे जिला प्रशासन ने तुरंत हटा दिया। ‘

इसे भी पढ़ें: रुड़की में अवैध रूप से चल रहे मदरसे सील, एक्शन में धामी सरकार 

दून के एफ आर आई रेंजर्स कैंपस में अवैध मजार 

जानकारी के मुताबिक देहरादून बीच शहर में वन अनुसंधान केंद्र के रेंजर्स कैंपस में एक अवैध मजार वन भूमि पर कब्जा कर बनाई गई है, मजार पुरानी बताई जाती और कथित रूप से  यहां एक हजार में ताबीज और झाड़े का पांच रु लिया जाता है,बाहर सड़क पर गुरुवार के दिन चादर, प्रसाद अगरबत्ती आदि का धंधा मुस्लिमों द्वारा चलाया जाता है। जानकारी के मुताबिक यहां मुस्लिम नहीं जाते क्योंकि वो खुदा के अलावा कहीं किसी के आगे सर नहीं झुकाते। अंध विश्वास की कहानियां सुनकर हिंदुओं का ही आना जाना है।

अन्य संवेदनशील स्थानों पर मजारें

आईएसबीटी देहरादून के पास मजार देखी जा सकती है जो कि हाल ही में बनी है। ऐसी ही एक मजार रेलवे स्टेशन के करीब भी बनी हुई है। एमडीडीए शॉपिंग कांप्लेक्स के भीतर मजार बना कर उसे पक्का कर दिया गया। एक सर्वे के मुताबिक राजधानी देहरादून में ही 53 फ्रेंचाइजी अवैध मजारें है, एक ही नाम की पांच छ अवैध मजारें मिल जाएंगी। हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज के भीतर मजार, हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के करीब और काठगोदाम पुल और रेलवे स्टेशन के पास सरकारी जमीन पर कब्जा कर मजार कैसे बनी? टेढ़ी पुलिया के सामने मार्ग में आर्मी कैंट के पास मजार, राजपुरा में एफसीआई गोदाम में मजार, आखिर इनको किसने बनने दिया?

कोटद्वार में आर्मी कैंट एरिया में मजार किसने बनवाई? जबकि, आर्मी में मुस्लिम की भर्ती लगभग नहीं होने से यहां इबादत की कोई परम्परा नहीं है। लेकिन यहां खादिम मुस्लिम का आना जाना बेरोकटोक है। सनातन नगरी हरिद्वार में जिला अदालत के पास, बी एच ई एल कॉलोनी में अवैध मजार किसने बनवाई? हरिद्वार में ॐ घाट के पास फ्लाई ओवर में हरि चादर लिपटा हुआ बक्सा रख दिया है फ्लाई ओवर के नीचे मजार बना दी गई? किसी ने उसे रोका तक नहीं। हाल ही में हरिद्वार के  संघ कार्यालय के पास से मजार को सड़क से हटाया गया।

सनातन नगरी हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में गैर हिंदुओ के धर्मस्थलों के निर्माण पर रोक है ऐसे में मजारों का बनना संदेह पैदा करता है। बताता गया है एक योजना के तक मुस्लिम समुदाय द्वारा इन मजारों में धीरे-धीरे नमाज भी पढ़ी जाने लगी है, यानि ये मस्जिद का रूप लेने लगी है। उधम सिंह नगर जिले में भी यही हालात बनते जा रहे है, मुख्य राष्ट्रीय मार्गों से अवैध मजारें हटाने के बावजूद अभी भी खादिमों के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं और मजारें खड़ी हो रही है, जसपुर काशीपुर मार्ग में नई मजार बना दी गई है और प्रशासन खामोश दिखाई दे रहा है। वन विभाग की संरक्षित भूमि पर कालू सैय्यद की फ्रेंचाइजी मजार ने कई एकड़ भूमि कब्जाई हुई है। हाई कोर्ट के निर्देश पर शासन अब मजारों को लेकर सर्वे करवाने जा रहा है, जिसमें ये स्पष्ट हो जाएगा कि किसकी जमीन पर बनी हुई है और कब और क्यों बनी है ?

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