भारत के लिए एक बड़ी खबर! भगोड़े कारोबारी विजय माल्या और नीरव मोदी को भारत लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। हाल ही में ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस (CPS) की एक टीम ने दिल्ली की तिहाड़ जेल का दौरा किया। इसका मकसद था जेल की स्थिति और सुविधाओं का जायजा लेना, ताकि ब्रिटिश कोर्ट को भरोसा दिलाया जा सके कि प्रत्यर्पित अपराधियों को यहां सुरक्षित और मानवीय माहौल मिलेगा। यह कदम भारत की उन कोशिशों का हिस्सा है, जो इन आर्थिक अपराधियों को वापस लाने के लिए सालों से चल रही हैं।
तिहाड़ जेल का निरीक्षण
जुलाई 2025 में ब्रिटिश CPS की पांच सदस्यीय टीम, जिसमें ब्रिटिश हाई कमीशन के प्रतिनिधि भी शामिल थे, ने तिहाड़ जेल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जेल नंबर 4 के हाई-सिक्योरिटी वार्ड का मुआयना किया, जहां पहली बार के अपराधी और हाई-प्रोफाइल कैदी रखे जाते हैं। टीम ने कैदियों से बातचीत की और जेल की बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं की जांच की। भारतीय अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जरूरत पड़ने पर हाई-प्रोफाइल कैदियों के लिए खास इंतजाम किए जा सकते हैं, जैसे कि एक अलग सुरक्षित क्षेत्र बनाना।
इसे भी पढ़ें: बंगाल में ‘The Bengal Files’ की स्क्रीनिंग की मांग तेज, सिनेमा हॉल के बाहर हुआ प्रदर्शन
प्रत्यर्पण की चुनौतियां
विजय माल्या, जो 9,000 करोड़ रुपये के बैंक लोन डिफॉल्ट केस में आरोपी हैं, और नीरव मोदी, जो 13,800 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी हैं, लंबे समय से ब्रिटेन में हैं। ब्रिटिश कोर्ट ने पहले भारत की जेलों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके चलते कुछ प्रत्यर्पण याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। उदाहरण के लिए, हथियार डीलर संजय भंडारी का प्रत्यर्पण इस साल फरवरी में जेल की स्थिति के कारण रद्द कर दिया गया था। भारत ने अब ब्रिटेन को गारंटी दी है कि प्रत्यर्पित कैदियों के साथ कोई गलत व्यवहार या अवैध पूछताछ नहीं होगी।
भारत की कोशिशें
भारत ने 178 प्रत्यर्पण अनुरोध विभिन्न देशों को भेजे हैं, जिनमें से 20 ब्रिटेन में लंबित हैं। इनमें माल्या, नीरव मोदी, और खालिस्तानी नेताओं जैसे नाम शामिल हैं। विदेश सचिव विक्रम मिश्री ने जुलाई में कहा था कि भारत ब्रिटेन के साथ मिलकर इन मामलों को सुलझाने के लिए सक्रिय है।

















