कर्नाटक के धर्मस्थल से जुड़ा विवाद अब और गहराता जा रहा है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी फंडिंग के जरिए सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिशों की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। वहीं, पुलिस ने दो सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो फैलाने के आरोप में मामला दर्ज किया है।
सोशल मीडिया पर भड़काऊ वीडियो- मंगलुरु पुलिस ने बताया कि जिन दो कार्यकर्ताओं पर केस दर्ज किया गया है, उनके नाम गिरीश मत्तनवर और महेश शेट्टी टिमरोडी हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो साझा किए जो सांप्रदायिक सद्भाव को बिगाड़ने वाले थे। वीडियो में धर्मस्थल से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और लोगों में गुस्सा फैलाने की कोशिश की गई। ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत जांच शुरू की है। एजेंसी उन संस्थाओं, एनजीओ और व्यक्तियों की जानकारी जुटा रही है जिन पर आरोप है कि उन्होंने विदेश से फंड लेकर समाज में तनाव फैलाने की कोशिश की। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि कहीं ये पैसे धर्मस्थल विवाद को हवा देने के लिए तो इस्तेमाल नहीं किए गए।
विवाद की शुरुआत कैसे हुई- इस पूरे विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब एक पूर्व सफाई कर्मचारी चिन्नैया ने आरोप लगाया कि उसे महिलाओं और नाबालिगों के शव धर्मस्थल क्षेत्र में दफनाने के लिए मजबूर किया गया था। चिन्नैया ने दावा किया कि इन शवों पर यौन उत्पीड़न के निशान भी थे। उसका इशारा धर्मस्थल के कुछ मंदिर प्रशासन से जुड़े लोगों की ओर था। हालांकि बाद में, कर्नाटक सरकार द्वारा गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) ने जांच की और पाया कि चिन्नैया के आरोप झूठे थे। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। इस विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दक्षिण कन्नड़ जिले में एक रैली निकाली। पार्टी ने आरोप लगाया कि धर्मस्थल को बदनाम करने की एक साजिश रची जा रही है। भाजपा नेताओं ने मांग की कि इस पूरे मामले की जांच एनआईए (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) या सीबीआई से कराई जाए। रैली के अगले ही दिन ईडी ने अपनी जांच शुरू कर दी, जिससे साफ होता है कि केंद्र सरकार भी मामले को गंभीरता से ले रही है।

















