भुवनेश्वर: जाजपुर जिला धीरे-धीरे गौ तस्करी का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। इस जिले से लगातार गौ तस्करी की खबरें आ रही हैं। इसी कड़ी में जाजपुर जिले के बड़चना थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक कंटेनर जब्त किया, जिसमें दर्जनों गायों को अमानवीय परिस्थितियों में ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। पुलिस ने कंटेनर से कुल 48 गायें बरामद कीं, लेकिन अमानवीय परिस्थितियों में ले जाए जाने के कारण 28 गायों की मौत हो गई। घटना के प्रकाश में आते ही इलाके में तनाव और गुस्सा फैल गया।
स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि प्रशासन और सरकार गौ तस्करी रोकने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठा रही है। पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से मृत गायों को खैरा के पास जंगल में दफना दिया, जबकि जीवित गायों को चौद्वार स्थित गौशाला भेज दिया गया। हालांकि, पुलिस द्वारा उन्हें पकड़ने से पहले ही कंटेनर का चालक और खलासी वाहन छोड़कर मौके से भागने में सफल रहे।
बड़चणा पुलिस की कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, जाजपुर के बालीचंद्रपुर इलाके से यूपी नंबर के एक कंटेनर में 48 गायों को कोलकाता भेजा जा रहा था। बड़चणा थाने की प्रभारी मधुस्मिता बेहरा को जब इस बारे में गुप्त सूचना मिली, तो उन्होंने अपनी टीम के साथ तुरंत कार्रवाई की। पुलिस ने कंटेनर का पीछा करते हुए चंडीखोल के पास कुडल बेणापुर पुल के समीप गाड़ी को रोक लिया। पुलिस को देखते ही चालक और हेल्पर वाहन से कूदकर फरार हो गए। जब कंटेनर खोला गया, तो उसके अंदर गायों को बेहद दयनीय हालत में पाया गया। पुलिस ने उन्हें बाहर निकाला, लेकिन तब तक 28 गायों की दम घुटने से मौत हो चुकी थी। बची हुई गायों को चौद्वार गौशाला भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।
गौ तस्करी की बढ़ती घटनाएं
जाजपुर जिले में गौ तस्करी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। तस्कर नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर गायों को एक जिले से दूसरे राज्य में ले जा रहे हैं। कभी-कभी पुलिस कार्रवाई करती है, लेकिन ज्यादातर मामलों में गौ तस्कर गायों से भरे वाहनों के साथ आसानी से सीमा पार कर जाते हैं। बड़चणा पुलिस ने पिछले दिनों में 11 से अधिक बार गोवंश से भरे वाहन पकड़े हैं।
जाजपुर ज़िले के ब्रह्मबरदा क्षेत्र में बैल से लदा ऑटो जब्त, एक व्यक्ति हिरासत में
पुलिस ने जाजपुर जिले के रसूलपुर ब्लॉक के अंतर्गत दादाबाड़ी क्षेत्र से 48 गायों को जीवित बचाने के साथ ही बैलों से भरा एक ऑटो भी जब्त किया है। पुलिस ने ऑटो से तीन बैलों को बरामद किया और चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। जानकारी के अनुसार, ब्रह्मबरदा बैंक चौक क्षेत्र से एक ऑटो (OD 05 AZ 9752) में तीन बैल लादकर ले जाए जा रहे थे। स्थानीय लोगों की नज़र जब ऑटो में ठूँसे हुए बैलों पर पड़ी, तो उन्होंने गाड़ी को रोककर ब्रह्मबरदा पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और तीनों बैलों को बरामद कर थाना परिसर में ले आई। इस बीच, ऑटो को ज़ब्त कर चालक से पूछताछ जारी है। इस संबंध में एसआई संतोष कुमार सेठी ने जानकारी दी कि इस मामले में थाना स्तर पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बैल धर्मशाला ब्लॉक के इस्तमापड़िया क्षेत्र में ले जाए जा रहे थे।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
स्थानीय लोगों और गौरक्षकों का आरोप है कि केवल बड़चना पुलिस ही सक्रिय है, जबकि अन्य थाना क्षेत्रों की पुलिस खामोश रहती है। पिछले चार महीनों में बड़चणा थाना पुलिस ने 11 गाड़ियाँ जब्त की हैं और लगभग 400 से अधिक गायों को बरामद किया है। लोग पूछ रहे हैं कि जब यही वाहन दूसरे इलाकों से गुजरते हैं तो वहां की पुलिस उन्हें क्यों नहीं पकड़ती? क्या तस्करों को पुलिस संरक्षण प्राप्त है?
साहापुर हाट: गौ-तस्करों का अड्डा
जाजपुर जिले के पानीकोइली थाना अंतर्गत साहापुर हाट अब गौ तस्करी का बड़ा केंद्र बन गया है। यहां दूर-दूर से गायों को इकट्ठा किया जाता है और रात में उन्हें बड़े कंटेनरों में भरकर बाहर भेज दिया जाता है। स्थानीय गौरक्षकों का आरोप है कि प्रतिदिन सैकड़ों गायों को अत्यंत क्रूर तरीके से रस्सियों से बांधा जाता है तथा निर्धारित संख्या से कहीं अधिक संख्या में उन्हें वाहनों में लादा जाता है। इस दौरान कई गायें दम घुटने और चोट लगने से मर जाती हैं।
प्रशासन पर गौरक्षकों के आरोप
गौरक्षकों ने कहा कि ओडिशा में गाय की हत्या पर सख्त कानून है और गायों की बिक्री व परिवहन पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं। इसके बावजूद खुलेआम हजारों गायें प्रतिदिन ट्रक और मैजिक जैसे वाहनों में लादकर दूसरे राज्यों में भेजी जा रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस केवल औपचारिकता निभाती है। कुछ गाड़ियाँ जब्त कर तस्करों को छोड़ देती है। इससे प्रतीत होता है कि गौ-तस्करों को पुलिस से “अभयदान” मिला हुआ है।
पड़ोसी ज़िलों से भी आ रहा गो-तस्करी का सिलसिला
केवल जाजपुर ही नहीं, बल्कि केंद्रापड़ा, ढेंकानाल और कटक ज़िले से भी बड़े-बड़े कंटेनरों में गायों को लाया जा रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि ये गाड़ियाँ राष्ट्रीय राजमार्गों पर खुलेआम बिना किसी डर के चल रही हैं और किसी विभाग की नज़र उन पर नहीं जाती। गोरक्षकों का कहना है कि सीमा पर वन विभाग के चेकपोस्ट और थाना मौजूद होने के बावजूद तस्करी कैसे बेरोकटोक चल रही है, यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है।
गौरक्षकों की मांग
स्थानीय गौरक्षकों का कहना है कि अगर सभी थानों की पुलिस मिलकर योजना बनाए और हर वाहन की सख्ती से जांच करे तो गौ तस्करी रोकी जा सकती है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से माँग की है कि तुरंत प्रभाव से इस अवैध कारोबार को रोकने के लिए कठोर कदम उठाए जाएँ और गो-तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
















