देशभर में गणेश उत्सव मनाया जा रहा है। इसी क्रम में सीमा पर पाकिस्तान अधिक्रांत कश्मीर (POJK) से सटे थितवाल गांव में भी श्रद्धालुओं ने पूरे हर्षोल्लास के साथ गणेश प्रतिमा का जुलूस निकाला। इस दौरान स्थानीय लोगों ने भी गणेश उत्सव को देखा। अच्छी बात ये रही कि इस दौरान किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।
कहा जा रहा है कि स्थानीय लोगों ने इससे पहले भगवान गणेश जी की प्रतिमा नहीं देखी थी। इससे भी विशेष बात यह रही कि जो लोग कभी मूर्ति पूजा का विरोध करते थे वो भी इस शांतिपूर्ण और भक्तिमय वातावरण को देखते रहे। ये दिखाता है कि केंद्र सरकार के सकारात्मक प्रयासों के कारण राज्य में शांति और सुरक्षा का वातावरण सही तरीके से पनप रहा है। इस बीच बेंगलुरू निवासी मंजूनाथ शर्मा और उनकी टीम ने कई हिंदू संगठनों और दक्षिण भारत के अनेक हिंदू कार्यकर्ताओं के सहयोग से बेंगलुरु के श्रृंगेरी शंकर मठ से मूर्ति ले जाकर वहाँ स्थापित की थी।
शामिल हुए अधिकारी
सुबह कुपवाड़ा के डेप्युटी कमिश्नर श्रीकांत बालासाहेब सुसे और भारतीय सेना के कई उन्नत अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। पूजा और आरती के बाद, डी सी सुसे ने स्वयं पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गणेश प्रतिमा को गाँव के मुख्य मार्ग पर ले जाकर विराजमान किया। देश के विभिन्न हिस्सों से आए भक्त भी इस शोभायात्रा में शामिल हुए।
ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर बनाई गई गणेश प्रतिमा
पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए सेना के द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर को प्रतिबिंबित करने के लिए भगवान गणेश जी की प्रतिमा को उसी तर्ज पर बनाया गया है। इसमें भगवान गणेश जी हाथ में मिसाइल पकड़े हुए दिखते हैं। गणपति प्रतिमा को गणेश चतुर्थी के दिन श्रृंगेरी मठ सहायता निर्मित शिलामय शारदा मंदिर में स्थापित किया गया था। जम्मू कश्मीर के राजधानी श्रीनगर के मध्य स्थित लाल चौक पर भगवान की प्रतिमा की पूजा की गई और फिर सीमा की ओर बढ़ने से पहले उसी घंटाघर क्षेत्र में एक शोभायात्रा निकाली गई।
यह शोभायात्रा, जो टिटवाल गाँव की मेन रोड से होकर गुजरी, भारत और पाकिस्तान को जोड़ने वाले क्रॉसिंग पुल पर पहुँची। शांति मंत्रों के जाप के बाद, स्थानीय ज़िला मजिस्ट्रेट (डी सी)ने जय हिंद, भारत माता जय, गणपति बप्पा मोरिया, जय गणेश के नारों के बीच मूर्ति को पवित्र किशन गंगा नदी में विसर्जित किया। इस दौरान राज्य पुलिस और सेना की ओर से सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। तिथवाल की शोभायात्रा में कश्मीरी पंडित श्री रवींद्र पंडित, स्थानिक निवासी अजाज ख़ान और हिन्दू समुदाय के कई सदस्य शामिल हुए और सीमा की ओर अपनी यात्रा शुरू की।

















