नई दिल्ली: केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो के बयान को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि भारत ने यूक्रेन युद्ध के बाद रूस से तेल खरीदने में कोई नियम नहीं तोड़ा है। भारत की ऊर्जा व्यापार नीति ने वैश्विक बाजार को स्थिर रखने और कीमतों को नियंत्रित करने में मदद की है।
यूक्रेन युद्ध से पहले से ही भारत चौथा बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अपने एक लेख में कहा है कि भारत ने कोई मुनाफाखोरी नहीं की है। रूस की ओर से फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमले से बहुत पहले से ही भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद भी भारत का निर्यात और मुनाफा लगभग समान बना हुआ है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि भारत रूसी तेल के लिए ‘लॉन्ड्रोमैट’ बन गया है। इससे ज्यादा गलत बात कुछ नहीं हो सकती।

भारत का हर लेन-देन वैध,ईरान-वेनेजुएला की तरह रूसी तेल पर सीधा प्रतिबंध नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी लगातार भारत को रूस से तेल खरीदने पर निशाने पर ले रहे हैं। रूस से तेल खरीदने के कारण ही ट्रंप ने भारत पर 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया। लेकिन भारत ट्रंप के दबाव के आगे बिल्कुल भी नहीं झुका और उल्टा मोदी ने ट्रंप के कई फोन कॉल उठाये तक नहीं। पीटर नवारो भी लगातार भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं। उन्होंने अपनी एक पोस्ट में यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध’ तक बता दिया था। हरदीप सिंह पुरी का कहना है कि ईरान या वेनेजुएला की तरह रूसी तेल पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है। उनका कहना है कि भारत का हर लेन-देन वैध है। भारत दशकों से दुनिया का चौथा सबसे बड़ा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यातक रहा है और उसके रिफाइनर दुनियाभर के तेल को प्रोसेस करते हैं।
पीटर नवारो लगातार दे रहे हैं विवादित बयान
पीटर नवारो लगातार भारत के खिलाफ विवादित बयान दे रहे हैं। उन्होंने रूसी तेल से खरीदने पर एलीट वर्ग पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाया है। उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि रूस से तेल खरीद में केवल एलीट वर्ग को मुनाफा हो रहा है। जबकि तेल की कीमत पूरा देश चुका रहा है। पीटर अमेरिकी अर्थशास्त्री हैं और जनवरी 2025 से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापार और विनिर्माण मामलों के वरिष्ठ सलाहकार हैं। उन्होंने 2017 में व्यापार पर ट्रंप प्रशासन को ज्वाइन किया था। इस दौरान वह राष्ट्रीय व्यापार परिषद के डायरेक्टर पद पर रहे और राष्ट्रपति ट्रंप को संरक्षणवादी व्यापार नीतियों को लागू करने के लिए प्रोत्साहित किया।

















