केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड (टीडीबी) से सुप्रीम कोर्ट में दी गई अपनी पुरानी राय को वापस लेने की मांग की है, जिसमें बोर्ड ने महिलाओं के मंदिर प्रवेश का समर्थन किया था। यह मांग एक वैश्विक अय्यप्पा भक्त सम्मेलन से पहले उठी है, जिसे लेकर बीजेपी ने कड़ा रुख अपनाया है।
बीजेपी का रुख और मांग
केरल बीजेपी के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने रविवार को एक बयान में कहा कि टीडीबी ने 6 फरवरी, 2019 को सुप्रीम कोर्ट में जो रुख अपनाया था, वह अय्यप्पा भक्तों की आस्था के खिलाफ था। उनका कहना है कि पिनराई विजयन सरकार के निर्देश पर बोर्ड ने यह रुख लिया, जिससे लाखों भक्तों की भावनाएं आहत हुईं। चंद्रशेखर ने मांग की कि टीडीबी सार्वजनिक रूप से अपनी पुरानी राय को वापस ले और भक्तों से माफी मांगे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर बोर्ड ऐसा नहीं करता, तो यह भक्तों के विश्वास के साथ विश्वासघात होगा।
वैश्विक सम्मेलन और राजनीतिक विवाद
20 सितंबर, 2025 को पम्पा में होने वाले वैश्विक अय्यप्पा भक्त सम्मेलन को लेकर भी बीजेपी ने आपत्ति जताई है। चंद्रशेखर ने इस आयोजन को सीपीआई(एम) और केरल सरकार की ओर से एक “राजनीतिक ड्रामा” और “चुनावी स्टंट” करार दिया। उनका आरोप है कि सरकार इस सम्मेलन का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रही है। बीजेपी ने यह भी मांग की कि 2018 में महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले भक्तों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएं।
नायर सेवा सोसाइटी का रुख
नायर सेवा सोसाइटी (एनएसएस) ने इस सम्मेलन को सशर्त समर्थन दिया है, लेकिन शर्त रखी है कि सबरीमाला की परंपराएं और पवित्रता बरकरार रहनी चाहिए। एनएसएस के महासचिव जी. सुकुमारन नायर ने कहा कि आयोजन का उद्देश्य मंदिर के विकास और परंपराओं का सम्मान होना चाहिए, न कि राजनीति।
सरकार और टीडीबी की स्थिति
केरल सरकार और टीडीबी का कहना है कि यह सम्मेलन मंदिर के विकास और “तत्वमसि” के संदेश को दुनिया तक पहुंचाने के लिए है। लेकिन बीजेपी और हिंदू संगठनों का मानना है कि यह आयोजन गैर-जरूरी और गैर-संवैधानिक है।
















