जापान दौरे के बाद चीन पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच तियानजिन में आज, 31 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण मुलाकात होने जा रही है। यह बैठक शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान हो रही है, जिसमें भारत और चीन के रिश्तों को और मजबूत करने की कोशिश होगी। यह मुलाकात इसलिए भी खास है क्योंकि यह पीएम मोदी का सात साल बाद चीन का पहला दौरा है। इस बीच, अमेरिका की नजर भी इस बैठक पर टिकी है, क्योंकि भारत-अमेरिका के बीच हाल में ट्रंप प्रशासन द्वारा 50% टैरिफ लगाए जाने से तनाव बढ़ा है।
क्यों है यह मुलाकात अहम?
भारत और चीन के बीच 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद रिश्ते तनावपूर्ण रहे। लेकिन पिछले साल अक्टूबर में रूस के कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात ने रिश्तों में सुधार की शुरुआत की। उस समय दोनों देशों ने लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने और गश्त शुरू करने पर सहमति जताई थी। इस बार की मुलाकात में सीमा विवाद, व्यापार, और आपसी सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पीएम मोदी ने जापानी अखबार ‘द योमिउरी शिंबुन’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत-चीन के स्थिर रिश्ते हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक शांति के लिए जरूरी हैं।
SCO शिखर सम्मेलन का मंच
यह मुलाकात SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हो रही है, जो 31 अगस्त से 1 सितंबर तक तियानजिन में आयोजित है। इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य वैश्विक नेता भी शामिल होंगे। मोदी 1 सितंबर को पुतिन से भी मुलाकात करेंगे। SCO का यह आयोजन इसलिए भी खास है क्योंकि यह ग्लोबल साउथ की एकजुटता को दर्शाता है, खासकर तब जब अमेरिका ने भारत समेत कई देशों पर भारी टैरिफ लगाए हैं।
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अमेरिका की नजर क्यों?
अमेरिका ने हाल ही में भारत से रूस के तेल खरीदने पर आपत्ति जताई और 50% टैरिफ लगाए, जिसमें 25% रूस से तेल खरीद के खिलाफ सजा के रूप में है। ऐसे में भारत और चीन के बीच बेहतर रिश्ते अमेरिका के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं। यह मुलाकात वैश्विक व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी अहम मानी जा रही है।
मोदी और जिनपिंग की यह मुलाकात भारत-चीन रिश्तों को और बेहतर करने का मौका देगी। सीमा पर शांति, व्यापार बढ़ाने, और डायरेक्ट फ्लाइट्स शुरू करने जैसे कदमों पर चर्चा हो सकती है। यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय रिश्तों, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को भी प्रभावित कर सकती है।

















