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अवैध शरणार्थियों के लिए कहां लिखे गए वैलेंटाइन पत्र और वह भी बच्चों ने?

बच्चों के एक समूह ने "आपका यहाँ स्वागत है!" जैसे नारों के साथ दिल के आकार के संदेश बनाए। इसको लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Aug 29, 2025, 06:10 pm IST
inविश्व

ब्रिटेन से अवैध शरणार्थियों को लेकर एक और चौंकाने वाला समाचार आया है। बर्मिंघम के स्कूलों में पांच साल तक के बच्चों को शरणार्थियों के लिए वैलेंटाइन डे के कार्ड लिखने के लिए कहा गया है।

टेलीग्राफ के अनुसार इसका आयोजन लेबर सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में आयोजित कार्यक्रमों का समन्वय स्कूल्स ऑफ सैंक्चुअरी नेटवर्क द्वारा किया गया, जिसमें देश भर के अनुमानित 1,200 प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल शामिल हैं।

बच्चों के एक समूह ने “आपका यहाँ स्वागत है!” जैसे नारों के साथ दिल के आकार के संदेश बनाए। इसको लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी आईं। शैडो एजुकेशन सचिव लॉराय ट्राट ने कहा, “पांच साल के छोटे बच्चों को राजनीतिक एजेंडे से दूर रखना चाहिए!” शैडो होम सेक्रेटरी क्रिस फिलिप ने कहा, “कक्षाएं गणित पढ़ाने के लिए होनी चाहिए, न कि इमिग्रेशन के लिए। लेबर पार्टी द्वारा संचालित बर्मिंघम परिषद हमारे स्कूलों में राजनीतिक प्रचार को घुसने दे रही है।”

सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर काफी हंगामा हुआ। चरलोटते गिल ने लिखा कि आखिर छोटे बच्चों द्वारा शरणार्थियों के लिए दिल के आकार के कार्ड की जरूरत क्या है?” लोगों ने प्रश्न किये कि आखिर बच्चों को इस प्रकार राजनीतिक लाभ के लिए प्रयोग क्यों किया जा रहा है? डेली मेल के अनुसार यह प्रोग्राम पिछले साल शुरू किया गया था। इसमें जो नारे लिखे गए थे वह और भी चौंकाने वाले थे। इन कार्ड्स में नारे लिखे गए थे। “’You’re welcome here!’, and ‘I love refugee rights, stop the Rwanda scheme.’ (“‘आपका यहां स्वागत है!’, और ‘मुझे शरणार्थी अधिकार पसंद हैं, रवांडा योजना को रोकें।’)

एक कार्ड में कविता थी, जैसे ‘Roses are red, violets are blue, refugees are people, just like me and you.’
जो कार्ड्स अब वायरल हो रहे हैं, उनमें कई तरह के और शब्द हैं जैसे कि दयालुता, मानवता और समानता। बच्चों को इसलिए भी प्रोत्साहित किया गया था कि वे अपनी कक्षाओं या बड़े स्कूल्स से चैरिटी के लिए पैसे इकट्ठे करें।

कुछ कार्ड्स में नारंगी दिल बना था, और टुगेदर विद रिफ्यूजीज के अनुसार, यह एक ऐसा बैनर है जो युद्ध से भाग रहे लोगों के प्रति सहानुभूति दर्शाता है तथा शरणार्थी राष्ट्र ध्वज से प्रेरित है। इस विषय में नेता ही नहीं बल्कि आम लोग भी अपना विरोध दर्ज कर रहे हैं। लोगों का साफ तौर पर प्रश्न है कि आखिर क्या कारण है कि छोटे बच्चों को इस तरह प्रयोग किया गया? हालांकि इस विषय को लेकर स्कूल्स ऑफ सैंक्चुअरी का कहना था कि वह एक पंजीकृत चैरिटी है और इस प्रकार अराजनीतिक है। उसकी अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि “’हमारा प्राथमिक ध्यान सुरक्षा चाहने वाले व्यक्तियों की गरिमा और मानवता तथा एक दयालु, अधिक सहानुभूतिपूर्ण समाज के निर्माण पर है – न कि इमिग्रेशन नीतियों से जुड़ी राजनीति पर।’

लेकिन लोगों का विश्वास इस ओर नहीं है। कई लोगों ने डेली मेल की इस स्टोरी को नकारने का भी प्रयास किया कि ऐसा कुछ नहीं हो रहा है, मगर एक्स पर सारा एजेंडा विफल कर दिया गया। बर्मिंघम ही वह शहर है, जहां पर हाल ही में कचरे की समस्या पैदा हुई थी और यह भी कि कैसे बिल्ली के आकार के चूहे शहर पर कब्जा करते जा रहे हैं।

बर्मिंघम में गंदगी के वीडियो सोशल मीडिया में आते रहते हैं। सोशल मीडिया पर एक वीडियो और वायरल हुआ था, जो बर्मिंघम के नो गो ज़ोन के विषय में था और वीडियो बनाने वाले ने यह भी लिखा था कि आखिर ये लोग कैसे इतनी गंदगी में रह सकते हैं? यहां के सांसद भी पाकिस्तानी मूल के ताहिर अली हैं, जिनका सपना मीरपुर में अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाना है और वे खुलकर इस्लामोफोबिया का कार्ड खेलते हैं।

ऐसा नहीं है कि बच्चों को पहली बार ही शरणार्थियों का स्वागत करने के लिए प्रयोग किया गया हो, इससे पहले भी यूरोप के कई देशों में संस्थाएं ऐसा कर चुकी हैं। बहरहाल इन कार्ड्स को लेकर जहां जनता में नाराजगी है वहीं संस्था का कहना है कि “यह गतिविधि उन लोगों के स्वागत के एक विचारशील और दयालु कार्य को दर्शाती है जो ब्रिटेन भाग आए हैं और शरण के अपने दावों की समीक्षा का इंतज़ार कर रहे हैं। हमारा मानना है कि करुणा के इन सरल कार्यों की आलोचना करने के बजाय उनका जश्न मनाया जाना चाहिए।” लेकिन लोगों का कहना है कि जहां रोज आप्रवासियों के हाथों अपराध बढ़ रहे हैं, श्वेत लड़कियों के साथ यौन शोषण की घटनाएं सामने आ रही हैं, तो ऐसे समय में बच्चों को शरणार्थियों के प्रति सचेत करना चाहिए या फिर स्वागत करने जैसा कदम उठाना चाहिए? यह नहीं भूलना चाहिए कि ब्रिटेन इन दिनों ग्रूमिंग गैंग्स की कहानियों का रोज ही सामना कर रहा है।

Topics: बच्चों के संदेशवैलेंटाइन डे कार्डस्कूल्स ऑफ सैंक्चुअरी नेटवर्कब्रिटेनपाञ्चजन्य विशेषअवैध शरणार्थीलेबर सरकारबर्मिंघमब्रिटेन अवैध शरणार्थीबर्मिंघम में शरणार्थी
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