उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद में मंदिर का घंटा 25 साल पहले चोरी हुआ था। पुलिस ने 3 चोरों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। घंटे को वापस प्राप्त करने के लिए मंदिर के पुजारी के पास किसी प्रकार के कोई कागजात उपलब्ध नहीं थे इसलिए मंदिर का घंटा थाने के मालखाने में जमा हो गया।
पुलिस निरीक्षण और घंटे की पहचान
गत दिनों गाज़ियाबाद के पुलिस कमिश्नर ने थाने का मुआयना किया। मालखाने में उनकी नजर इस घंटे पर पड़ी। निरीक्षण के दौरान गाजियाबाद के एडिशनल पुलिस कमिश्नर आलोक प्रियदर्शी भी वहां उपस्थित थे। वर्ष 2000 में जब यह घंटा चोरी हुआ था, तब आलोक प्रियदर्शी मोदीनगर के क्षेत्राधिकारी थे। वर्तमान समय में आलोक प्रियदर्शी गाजियाबाद में एडिशनल पुलिस कमिश्नर हैं। निरीक्षण के दौरान आलोक प्रियदर्शी ने ही पुलिस कमिश्नर को इस पूरे प्रकरण से अवगत कराया।
घंटे को मंदिर को सौंपने का आदेश
इसके बारे में जानने के बाद पुलिस कमिश्नर ने विधिक सलाह ली और घंटा मंदिर को सौंपने का आदेश दिया। बताया जा रहा है कि मंदिर का घंटा तांबा, पीतल और कई मिश्रित धातुओं से निर्मित है। इस घंटे का वजन 51 किलो है। इस मंदिर समिति के अध्यक्ष का कार्यभार उप जिलाधिकारी के पास है। पुलिस कमिश्नर जे. रविंदर गौड के आदेश पर थाना मोदीनगर के इन्स्पेक्टर ने मंदिर का घंटा गांव की पूर्व प्रधान संसार देवी को सौंप दिया। इन्स्पेक्टर नरेश शर्मा ने बताया कि घंटे का वजन काफी है, एक व्यक्ति के लिए उठा पाना आसान नहीं है।
पूर्व वर्षों में घंटे की मांग
बीते वर्षों में कई पुजारियों और गांव के प्रधानों ने घंटे की मांग की थी लेकिन मंदिर के पुजारी के पास कागजात न होने के कारण पुलिस ने यह घंटा मंदिर को नहीं दिया। घंटा, मोदीनगर थाने के मालखाने में ही बंद पड़ा रहा। इस घंटे की कीमत करीब ढाई लाख रुपये बताई जा रही है।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
जानकारी के अनुसार गाज़ियाबाद के गांव सीकरी खुर्द स्थित महामाया देवी मंदिर परिसर में चैत्र नवरात्र मेला भी लगता है। इस मेले में भारी संख्या में लोग मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं। मंदिर के मुख्य महंत देवेन्द्र शास्त्री का कहना है कि अत्यंत प्राचीन काल में मंदिर की स्थापना की गई थी। मंदिर में प्रतिदिन काफी संख्या में लोग दर्शन करने के लिए आते हैं। मंदिर परिसर में मौजूद वटवृक्ष आज भी आजादी की लड़ाई का गवाह है।

















