उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में गत वर्ष 24 नवंबर को हिंसक वारदात को अंजाम दिया गया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यायिक आयोग का गठन किया था. न्यायिक आयोग ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि गत 24 नवंबर को जो हिंसा हुई थी.
उसमें समाजवादी पार्टी के सांसद बर्क, विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल और जामा मस्जिद के इंतजामिया कमेटी ने मिलकर हिंसा की साजिश रची थी. नमाजियों को भड़काया गया था. वहां पर हिंसा करने के लिए विदेशी हथियारों का भी पहले से इंतजाम किया गया था. हरिहर मंदिर में सर्वे होने की सूचना उन लोगों को पहले ही मिल गई थी. हमलावर पहले से ही घात लगाकर बैठे हुए थे.
भड़काऊ भाषण और साजिश
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 22 नवंबर 2024 को संभल के समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान रहमान बर्क ने काफी भड़काऊ भाषण दिया था. उन्होंने कहा था कि हम इस देश के मालिक हैं. हम नौकर और गुलाम नहीं हैं.
तुर्क और कन्वर्टेड पठानों के बीच टकराव
रिपोर्ट में कहा गया है कि तुर्क खुद को इस देश का मालिक एवं कन्वर्टेड पठानों और हिंदुओं को अपना गुलाम समझते हैं. इसलिए यह लड़ाई तुर्क एवं कन्वर्टेड हिंदू पठानों के बीच में हुई. संभल जनपद में डेमोग्राफी बदलने के बाद कन्वर्टेड हिंदू पठान को तुर्क काफी तुच्छ भावना से देखते हैं. सांसद बर्क के बयान के बाद संभल में माहौल काफी गर्म हो गया था. जब कन्वर्टेड हिंदू पठानों ने इसका विरोध किया तो 24 नवंबर को दोनों पक्ष आमने-सामने हिंसा पर उतारू हो गए. इस दौरान वहां पर गोली चली जिसमें चार लोगों की मौत हो गई.
आईएसआई कनेक्शन और अंतरराष्ट्रीय तार
रिपोर्ट में संभल के शारिक साठा का भी उल्लेख किया गया है. वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर जाली नोटों का कारोबार कर रहा था. उस दौरान शारिक वहां पर सक्रिय था. हिंसा में कई विदेशी हथियारों का इस्तेमाल किया गया था जिन पर मेड इन यूएसए अंकित है. इससे यह स्पष्ट है कि हिंसा सिर्फ स्थानीय राजनीति का परिणाम नहीं थी बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से भी जुड़े हुए थे.

















