उत्तराखंड में जनसांख्यकी बदलाव: मैदानी जिलों में मुस्लिम आबादी वृद्धि और चुनौतियां
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उत्तराखंड में जनसांख्यकी बदलाव: मैदानी जिलों में मुस्लिम आबादी वृद्धि और चुनौतियां

उत्तराखंड के मैदानी जिलों में मुस्लिम आबादी की तेज वृद्धि और डेमोग्राफी चेंज की समस्या। धामी सरकार के कदम और हिमाचल मॉडल की चर्चा।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Aug 29, 2025, 10:37 am IST
inउत्तराखंड
Uttarakhand Demographic change

प्रतीकात्मक तस्वीर

देहरादून: यूपी के संभल शहर के लिए गठित एक न्यायिक जांच आयोग ने संभल दंगे के बाद क्षेत्र में तेजी से हुए डेमोग्राफी चेंज का जिक्र किया है, जिसकी रिपोर्ट विधान सभा में रखी जानी है। सूत्रों के अनुसार 1936 में हुए दंगों में 213 लोग मारे गए थे जिनमें 209 हिन्दू थे। जबकि 1978 के दंगों में184 हिंदुओं की हत्या हुई थी। 2024 में भी तनाव के हालात पैदा हुए थे। सम्भल में हुए दंगों में नवाब इकबाल और शफीकुर्रहमान बर्क जैसे नेताओं की आपसी वर्चस्व की लड़ाई को भी चिन्हित किया गया है।
दंगों का दंश झेल रहे संभल शहर जहां कभी हिन्दू आबादी का वर्चस्व था वहीं अब हिंदू करीब 14 प्रतिशत ही रह गए है। ऐसा ही हाल उत्तराखंड का भी है। यहां भी तेजी से जनसाख्यकी को बदलने की साजिश रची जा रही है।

उत्तराखंड में भी बदल रहे हैं हालात

उत्तराखंड में कुछ सालो में डेमोग्राफी चेंज समस्या, एक चैलेंज बनने जा रही है। धामी सरकार को केंद्र के तरफ से भी इस समस्या को गंभीरता से लेने को कहा गया है। खबर है कि डेमोग्राफी चेंज को रोकने के लिए धामी सरकार भविष्य में कुछ कड़े फैसले ले सकती है। उल्लेखनीय है कि हिमाचल राज्य जब 1971 में बना  तबसे अब तक मुस्लिम आबादी 2 प्रतिशत के ही आसपास है। हिमाचल में भू कानून की वजह से मुस्लिम आबादी ने विस्तार नहीं पाया और यही वजह है कि आज तक कोई मुस्लिम एमएलए विधानसभा में नहीं पहुंच पाया।

करीब 16 प्रतिशत से अधिक है मुस्लिम आबादी

गौरतलब बात ये है कि  उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी सोलह से अधिक प्रतिशत हो जाने का अनुमान है। 1971 में उत्तराखंड के  जिलों में मुस्लिम आबादी डेढ़ प्रतिशत के आसपास थी। यूपी से लगे उत्तराखंड के चार मैदानी जिलों की मुस्लिम आबादी 32 प्रतिशत से अधिक हो गई है। जनगणना आंकड़ों के अनुसार उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी असम के बाद सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इस बढ़ती आबादी को राज्य में डेमोग्राफी चेंज की समस्या माना जा रहा है। उत्तराखंड के मैदानी जिलों की सामाजिक और राजनीतिक समीकरण ऐसे हो गए हैं कि यहां मुस्लिम वोट निर्णायक हो गए हैं। ऐसा उत्तराखंड में कांग्रेस की सत्ता के दौरान ज्यादा हुआ।

हरिद्वार समेत चार जिलों में 30 फीसदी से अधिक मुस्लिम

उत्तराखंड के चार मैदानी जिलों में हरिद्वार में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी हो गई है यहां कुल आबादी का करीब 38 प्रतिशत हिस्सा मुस्लिम  है, इसी तरह उधम सिंह नगर जिले में भी 32 फीसदी, नैनीताल जिले और देहरादून जिले में 30 से  32 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है, और अब पौड़ी जिले के मैदानी क्षेत्रों में भी मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ने लगी है। उल्लेखनीय है कि 2001 में राज्य के जिलों में मुस्लिम आबादी 10.50 प्रतिशत थी, हरिद्वार जुड़ जाने से यहां मुस्लिम आबादी ने तेज़ी से विस्तार पाया। राज्य के जनगणना आंकड़े बताते हैं कि 2011 में यह 13.9 प्रतिशत थी और अब 2025 में इसके 17 प्रतिशत से ज्यादा हो जाने का अनुमान है।

इसे भी पढ़ें: उत्तराखंड: मदरसा बोर्ड होगा खत्म, राष्ट्रीय पाठ्यक्रम न पढ़ाने वाले मदरसे होंगे बंद, सीएम धामी ने की घोषणा

पूरे राज्य की दृष्टि से 10 से 17 प्रतिशत होना ज्यादा नहीं दिखता किंतु जब चार मैदानी जिलों पर नजर डालते हैं तो ये आबादी 35 फीसदी से अधिक दिखाई देती है। हालांकि, अभी आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, लेकिन जिस हिसाब से वोटर बढ़ा है उसके औसत से ये आंकड़ा आंखे खोल देता है।

असम के बाद उत्तराखंड में सबसे तेजी से बढ़े मुस्लिम

उत्तराखंड भारत में असम के बाद सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ती मुस्लिम आबादी वाला राज्य हो गया है। केरल और बंगाल में मुस्लिम आबादी वृद्धि दर देवभूमि उत्तराखंड से कम है। बात करें हिमाचल जिसकी भगौलिक सरंचना उत्तराखंड से मेल खाती है, सांस्कृतिक दृष्टि से हिमाचल को भी देव भूमि कहा जाता था है और उत्तराखंड को भी देव भूमि का दर्जा प्राप्त है। 25 जनवरी 1971 को हिमाचल को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला था तब यहां मुस्लिम आबादी कुल राज्य की आबादी का दो प्रतिशत से कुछ कम थी और आज भी ये आबादी प्रतिशत 2.1प्रतिशत ही है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह हिमाचल का भू कानून है। इस कानून की वजह से राज्य से बाहर का कोई भी व्यक्ति यहां जमीन नहीं खरीद सकता अलबत्ता उसे लीज पर ले सकता है। इस कानून की वजह से हिमाचल में अभी तक हिंदू आबादी वाले राज्य के रूप में संरक्षित है।

2001 में हिमाचल में मुस्लिम आबादी 1,19,512 थी। फिर दस साल बाद यानि 2011 में 1,49,881 और 2022 में इसके 1,63, 820 हो जाने का अनुमान था। हिमाचल की तुलना में उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी ने सशक्त भू कानून नहीं होने की वजह से पांव पसार लिए हैं। हर दस साल में दो प्रतिशत मुस्लिम आबादी की वृद्धि दर दर्ज हो रही है। असम में हर दस साल में 3.3 प्रतिशत मुस्लिम आबादी बढ़ रही है, जबकि केरल में 1.9 और बंगाल में 1.8 प्रतिशत की वृद्धि दर है। ये वो आबादी है जो कि  उत्तराखंड के जनसंख्या रजिस्टर में दर्ज होगी, अभी यहां लाखों की संख्या में बाहरी राज्यों से आए मुस्लिम लोग किराए पर रह रहे हैं।

उत्तराखंड में हिमाचल जैसा सख्त कानून नहीं

और धीरे-धीरे वे भी यहां स्थाई निवासी हो जाने हैं क्योंकि यहां उनके बसने में हिमाचल की तरह कोई रोक टोक नहीं है।
राज्य प्रशासन की राजस्व विभाग की भ्रष्ट कार्य प्रणाली भी एक बड़ी वजह है। जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर मुस्लिम आबादी को यहां बसने दे रही है। इसके उदाहरण देहरादून जिले में ही मिल जाएंगे। मुस्लिम आबादी में अवैध मदरसों, मस्जिदों की भरमार हो गई है, सरकारी जमीनों पर कब्जे हो चुके हैं। यहां तक की जंगल की जमीनों पर भी अवैध रूप से मुस्लिमों ने अंदर तक जाकर कब्जे कर लिए हैं और वहां से बहुमूल्य वन संपदा का दोहन किया जा रहा है। मुस्लिम आबादी में यूपी बिहार के लोग तो हैं ही, जानकारी के मुताबिक बड़ी संख्या में बांग्लादेश और म्यांमार से आए रोहिंग्या भी बसते जा रहे हैं।

राजनीतिक संरक्षण पा रहे रोहिंग्या मुस्लिम

ये लोग पहले असम, बंगाल, झारखंड से अपने आधार कार्ड बनवाते है, फिर उत्तराखंड आकर, यहां के मुस्लिम जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में बसावट कर रहे हैं। मुस्लिम जनप्रतिनिधियों को राजनीतिक संरक्षण मिला रहा है। वो इन्हीं के दम पर विधानसभा में पहुंचते रहे हैं। एक जानकारी के मुताबिक, कभी उत्तरकाशी में मुस्लिम वोटर संख्या 150 के आसपास हुआ करती थी और ये अब 5000 से भी ज्यादा हो गई है।

पछुवा दून में जनसंख्या असंतुलन

देहरादून के विकास नगर में 6000 मुस्लिम वोटर हुआ करते थे जो अब 32 हजार हो गए हैं। देहरादून में सेलाकुई, विकासनगर, सहसपुर क्षेत्र जो यूपी के सहारनपुर जिले से लगता है, मुस्लिम बाहुल्य हो चुका है, पछुवा दून के 28 गांव राज्य बनने के दौरान हिंदू बाहुल्य हुआ करते थे अब मुस्लिम बाहुल्य हो गए है। यहां के ग्राम प्रधान मुस्लिम हो गए और यूपी बिहार से अपने रिश्तेदारों के नाम परिवार रजिस्टर में चढ़ा कर ग्राम सभा/समाज की भूमि को खुर्दबुर्द कर उन्हें बसाने लगे। इससे उनका वोट बैंक मजबूत हुआ और हिन्दू भी असहज होकर वहां से पलायन करने लगे।

नैनीताल जिले में भी जनसांख्यिकी बदलाव

नैनीताल जिले, रामनगर ग्रामीण, कालाढूंगी, हल्द्वानी शहर में मुस्लिम आबादी ने नदियों किनारे सरकारी वन और रेलवे की जमीनों पर कब्जे कर घर बसा लिए हैं। नैनीताल शहर में ही मुस्लिम आबादी ने करीब दस गुना की वृद्धि ले ली है। पहाड़ों पर भवाली श्यामखेत में मुस्लिम आबादी ने पांव पसार लिए हैं। नैनीताल जिले में ही अवैध कालोनियों की भरमार हो गई है जानकारी के मुताबिक, मुस्लिम ठेकेदार कृषि भूमि को खरीद कर उसे स्टांप पेपर पर बेच कर मुस्लिम बस्तियां बसा रहे हैं।

प्राधिकरण बेबस, जिला पंचायत के अपने कानून

प्राधिकरण परिधि से बाहर जिला पंचायत क्षेत्रों में नक्शे जिला पंचायत अधिकारी, ग्राम प्रधान मोहर लगा कर  नक्शे  पास कर देते है और बाहर से आए लोग स्थाई निवासी बन जा रहे है। प्राधिकरण,जिला पंचायत और उद्योग विभाग तीनों अपने अपने हिसाब से नक्शे पास कर रहे, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमीनों की रजिस्ट्रियां होने की खबरे चिंता पैदा कर रही है।

भू कानून के बाद, धामी सरकार मैदानी जिलों की कर रही है समीक्षा

पहाड़ी क्षेत्रों में सशक्त भू कानून लागू किए जाने के बाद चार मैदानी जिलों में हो रहे डेमोग्राफी चेंज की सूचनाओं की धामी सरकार समीक्षा कर रही है। इस बारे में शासन ने चारो जनपदों से ग्राउंड रिपोर्ट मांगी है। सीएम पुष्कर धामी लगातार ये कहते आए हैं कि उत्तराखंड के देव स्वरूप कायम रखा जाएगा, इससे छेड़छाड़ करने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।

Topics: धामी सरकारdhami governmentडेमोग्राफी चेंजDemography Changeउत्तराखंड जनसंख्याUttarakhand populationमुस्लिम आबादीMuslim populationजनसंख्या असंतुलनpopulation imbalance
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