सत्य, प्रेम और अपनापन है हिंदुत्व का सार : सरसंघचालक जी ने दूसरे दिन गांधी की चेतावनी और संघ की निष्ठा पर की बात
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सत्य, प्रेम और अपनापन है हिंदुत्व का सार : सरसंघचालक जी ने दूसरे दिन गांधी की चेतावनी और संघ की निष्ठा पर की बात

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्ष की यात्रा पर सरसंघचालक मोहन भागवत जी का विज्ञान भवन में दूसरे दिन संबोधन। हिंदुत्व का सार, गांधी की चेतावनी और संघ की निष्ठा पर रखी बात....

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 27, 2025, 07:25 pm IST
in भारत, संघ @100, दिल्ली
श्री मोहन भागवत जी, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

श्री मोहन भागवत जी, सरसंघचालक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार, 26 अगस्त से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ के दूसरे दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा- हिंदुत्व किसी संकीर्णता का नाम नहीं है, बल्कि इसका सार सत्य, प्रेम और अपनापन है। यही भावना भारत को विश्व के लिए बड़े भाई के रूप में प्रस्तुत करती है, ताकि पूरी दुनिया जीवन की विद्या भारत से सीख सके।

धर्म का अर्थ और मध्यम मार्ग

सरसंघचालक जी ने स्पष्ट किया कि धर्म का अर्थ केवल पूजा, पंथ या कर्मकांड नहीं है। धर्म का वास्तविक अर्थ है विविधता को स्वीकार करना और संतुलित जीवन जीना। यही संतुलन भारत की परंपरा का मध्यम मार्ग है, जो दुनिया को शांति और समन्वय की राह दिखाता है।

महात्मा गांधी की चेतावनी और आज की स्थिति

उन्होंने कहा कि बीते ढाई-तीन सौ वर्षों में जड़वाद और उपभोक्तावादी विचारों ने जीवन की भद्रता को कम किया है। महात्मा गांधी द्वारा बताए गए सात सामाजिक पाप— काम बिना परिश्रम, आनंद बिना विवेक, ज्ञान बिना चरित्र, व्यापार बिना नैतिकता, विज्ञान बिना मानवता, धर्म बिना बलिदान और राजनीति बिना सिद्धांत— आज और अधिक बढ़ गए हैं।

संघ की 100 साल की यात्रा और निष्ठा

उन्होंने कहा- संघ की यात्रा उपेक्षा और विरोध के वातावरण में शुरू हुई। स्वयंसेवकों ने अपने त्याग और निष्ठा के बल पर संघ को इन कठिन कालखंडों से पार लगाया। कई बार विरोध और कटु अनुभव आए, लेकिन स्वयंसेवकों के हृदय में संपूर्ण समाज के लिए शुद्ध सात्त्विक प्रेम ही रहा और वही आज भी संघ कार्य का आधार है।

अनुकूल समय और स्वयंसेवकों की सोच

सरसंघचालक जी ने कहा कि अब समय अनुकूल है और समाज की मान्यता भी है। विरोध बहुत कम हो गया है, लेकिन फिर भी स्वयंसेवक सुविधाभोगी नहीं बनते। उनका लक्ष्य है—संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन। इसके लिए संघ चार सिद्धांतों पर कार्य करता है: सज्जनों से मैत्री, असज्जनों की उपेक्षा, अच्छे कार्य पर आनंद और दुर्जनों के प्रति करुणा।

संघ कार्य : हिम्मत वालों का काम

उन्होंने कहा- संघ में स्वयंसेवकों को कोई प्रोत्साहन (इंसेंटिव) नहीं मिलता, बल्कि कई बार व्यक्तिगत हानि भी उठानी पड़ती है। लेकिन इस निस्वार्थ सेवा से उन्हें जीवन में सार्थकता और आनंद मिलता है। यही प्रेरणा उन्हें सतत परिश्रमशील बनाए रखती है। लोग जब पूछते हैं कि संघ में आकर क्या मिलेगा, तो डॉ. भागवत का उत्तर है—“कुछ नहीं मिलेगा, बल्कि जो है वह भी चला जाएगा। हिम्मत है तो करो।” संघ का कार्य केवल निस्वार्थ सेवा है, जिसमें व्यक्तिगत लाभ नहीं, बल्कि समाज और विश्व के कल्याण का भाव है।

संघ का ध्येय और सात्त्विक प्रेम

सरसंघचालक जी ने बताया कि संघ का ध्येय व्यक्तिगत नहीं है। यह एक भव्य लक्ष्य की ओर सामूहिक यात्रा है। स्वयंसेवकों का संबंध शुद्ध सात्त्विक प्रेम पर आधारित है, जो मोह का नहीं बल्कि समाज और विश्व कल्याण का संबंध है। यही उन्हें निस्वार्थ सेवा के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

यह भी जरुर पढ़े – शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है, यही संघ है : सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी

Topics: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघHindutva PhilosophyRashtriya Swayamsevak SanghGandhi Warningमोहन भागवतMohan Bhagwat speechRSS 100 YearsRSSHindu Rashtra visionहिंदुत्व का सारMahatma Gandhi Seven SinsRSS Vigyan Bhawanसंघ की निष्ठाRSS Speech 2025
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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