शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है, यही संघ है : सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी
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शुद्ध सात्विक प्रेम अपने कार्य का आधार है, यही संघ है : सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत जी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100 साल की यात्रा, डॉ. मोहन भागवत का विज्ञान भवन संबोधन, हिंदू राष्ट्र का जीवन मिशन और समाज के लिए दिया संदेश

Written byShivam DixitShivam Dixit
Aug 27, 2025, 07:08 pm IST
in भारत, संघ @100, दिल्ली
100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज कार्यक्रम में मोहन भागवत

100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज कार्यक्रम में मोहन भागवत

नई दिल्ली । संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार, 26 अगस्त से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय व्याख्यानमाला कार्यक्रम ‘100 वर्ष की संघ यात्रा: नए क्षितिज’ शुरू हो गया है। आज 27 अगस्त को इस कार्यक्रम का दूसरा दिन है।

आज भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 साल की यात्रा अपेक्षाओं और विरोध के वातावरण में शुरू हुई। स्वयंसेवकों ने अपनी निष्ठा और साहस से संघ को खड़ा किया। अनेक बाधाओं और कटु अनुभवों के बावजूद उनके हृदय में संपूर्ण समाज के लिए शुद्ध सात्त्विक प्रेम ही रहा और आज भी वही आधार है।

अनुकूलता का समय और संघ की दिशा

सरसंघचालक ने कहा- आज का समय संघ के लिए अनुकूल है। समाज की मान्यता है और विरोध बहुत कम हो गया है। लेकिन स्वयंसेवक सुविधा-भोगी नहीं बनता। उसका ध्येय है—संपूर्ण हिंदू समाज का संगठन और सतत प्रगति की ओर अग्रसर रहना।

चार सिद्धांतों पर आधारित जीवन दृष्टि

उन्होंने कहा- संघ के कार्य की नींव चार शब्दों पर टिकी है—मैत्री, करुणा, मुदिता और उपेक्षा।
– सज्जनों से मैत्री करना।
– उदासीन लोगों की उपेक्षा करना।
– किसी भी अच्छे कार्य पर आनंद जताना, चाहे वह विरोधी ने ही क्यों न किया हो।
– दुर्जनों और पापियों के प्रति करुणा रखना, घृणा नहीं।

निस्वार्थ सेवा ही संघ की पहचान

सरसंघचालक ने कहा- स्वयंसेवक को संघ से कोई भौतिक लाभ नहीं मिलता। बल्कि कई बार उसे अपने पास का भी त्याग करना पड़ता है। लेकिन इस निस्वार्थ सेवा से उसे जीवन में सार्थकता और आनंद मिलता है। यही अनुभव उसे निरंतर सेवा-पथ पर आगे बढ़ाता है।

आत्मनो मोक्षार्थं जगद्धिताय च

उन्होंने बताया- संघ का कार्य केवल व्यक्तिगत उत्थान के लिए नहीं है, बल्कि पूरे समाज और विश्व के कल्याण के लिए है। यही ध्येय स्वयंसेवकों को प्रेरित करता है। यह प्रेम मोह पर आधारित नहीं, बल्कि एक भव्य राष्ट्रीय लक्ष्य पर आधारित है।

संघ कार्य की परिभाषा

सरसंघचालक ने कहा- हमारे एक पुराने कार्यकर्ता जो अब नहीं रहे.. दादाराव परमार जी ने संघ के कार्य को एक पंक्ति में परिभाषित किया— “RSS is innovation life of Hindu Nation.” यानी संघ हिंदू राष्ट्र के जीवन-कार्य का विकास अपने राष्ट्रीय हित में कर रहा है।

हिंदू राष्ट्र का जीवन मिशन क्या है?

उन्होंने कहा- हिंदुस्तान का प्रयोजन विश्वकल्याण है। भारत का राष्ट्र “नेशन-स्टेट” नहीं है, बल्कि एक सांस्कृतिक और आध्यात्मिक राष्ट्र है। यहां खोज केवल बाहर नहीं, भीतर भी हुई। ऋषियों ने शरीर, मन और बुद्धि से आगे चौथे तत्व को खोजा, जो सबको जोड़ता है।

सच्चे सुख का आधार और उपभोग का संकट

सरसंघचालक ने कहा- ऋषियों ने पाया कि वास्तविक सुख इंद्रियों के उपभोग में नहीं, बल्कि उस चौथे तत्व से जुड़ाव में है। उपभोग की होड़ झगड़े और विनाश को जन्म देती है। आज की दुनिया में यही संकट दिख रहा है। समाधान केवल सात्त्विक मार्ग में है।

Topics: Hindu Nation philosophyविज्ञान भवन व्याख्यानमालाराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 वर्षसंघ का इतिहासRSS 100 years journeyMohan Bhagwat Speech 2025Hindu Rashtra visionमोहन भागवत विचार
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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