नई दिल्ली: तीन साल से भी ज्यादा हो गये हैं लेकिन रूस और यूक्रेन के बीच अभी भी युद्ध जारी है। दोनों देश एक-दूसरे को जंग के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लेकिन इस बीच रूस की तरफ से एक ऐसा बयान आया है, जिससे ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि दोनों देशों के बीच जारी युद्ध रुक सकता है। इसके लिए पुतिन और जलेंस्की आपस में बात कर सकते हैं। यह इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव का कहना है कि पुतिन यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से बातचीत करने को तैयार हैं। लेकिन इसके साथ ही उन्होंने जेलेंस्की की वैधता पर भी सवाल उठा दिया।
क्या है पूरा मामला, जानते हैं?
लावरोव ने अपने एक इंटरव्यू में कहा है कि अगर हमें किसी समझौते पर दस्तखत करने होंगे तो पहले यह साफ होना चाहिए कि साइन करने वाला व्यक्ति वैध है। यूक्रेन के संविधान के हिसाब से जेलेंस्की अब राष्ट्रपति नहीं हैं। वह यूक्रेन की सरकार के ‘डिफैक्टो प्रमुख’ हैं। असली सवाल यह है कि समझौते पर हस्ताक्षर कौन करेगा? जेलेंस्की की ओर से लगातार बैठक की अपील उनकी वैधता को मजबूत करने का एक राजनीतिक तरीका है।
इसी साल मई में जेलेंस्की का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। यूक्रेन का कहना है कि मार्शल लॉ के कारण जेलेंस्की की राष्ट्रपति पद की शक्तियां स्वतः बढ़ जाती हैं और वह अभी भी देश के वैध प्रमुख हैं। लेकिन रूस उनकी वैधता पर सवाल उठा रहा है। लावरोव का कहना है कि रूस का मकसद क्षेत्र पर कब्जा करना नहीं है बल्कि यूक्रेन में रहने वाले रूसी मूल और रूसी भाषा बोलने वाले लोगों की सुरक्षा करना है। उन्होंने कहा कि हमारे पास दुनिया का सबसे बड़ा भूभाग है। हमें जमीन की भूख नहीं है। हमें अपने खिलाफ सुरक्षा खतरों को खत्म करना है। हमारा लक्ष्य यूक्रेन की तरफ से आने वाले किसी भी खतरे को खत्म करना है।


















