'जो बीत गई सो बात गई', पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने ढाका में यह कहकर किया '71 के अत्याचारों के लिए माफी मांगने से इंकार
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‘जो बीत गई सो बात गई’, पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने ढाका में यह कहकर किया ’71 के अत्याचारों के लिए माफी मांगने से इंकार

डार कट्टरपंथी जमाते इस्लामी के आमिर से मिलने उसके घर गए थे। जमाते इस्लामी के मजहबी उन्मादी 1971 के दौरान पाकिस्तान और रजाकारों के साथ मिलकर नागरिकों पर जुल्म कर रहे थे

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Aug 25, 2025, 06:32 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
ढाका में पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री इशाक डार और बांग्लादेश के विदेश सलाहाकर तौहीद हुसैन के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता

ढाका में पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री इशाक डार और बांग्लादेश के विदेश सलाहाकर तौहीद हुसैन के बीच प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता

भारत के पड़ोसी जिन्ना के कट्टर इस्लामी देश के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार कभी कट्टर दुश्मन रहे दो दिन की बांग्लादेश की यात्रा पर आकर लौट चुके हैं। 2012 के बाद, पहली बार कोई इस कद का पाकिस्तानी नेता या मंत्री बांग्लादेश गया है। 2012 में हिना रब्बानी खार विदेश मंत्री के नाते ढाका गई थीं। गत वर्ष शेख हसीना को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के कथित सहयोग से अपदस्थ करने के बाद, सत्ता पर जमी अंतरिम सरकार ने ‘आका’ पाकिस्तान को अपने यहां खुली छूट देने का मन बना लिया दिखता है। इशाक डार के इस ढाका दौरे में दोनों देशों ने द्विपक्षीय सहयोग के छह समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इधर डार के इस दौरे को लेकर रक्षा विशेषज्ञों की नजरें भी सतर्क हैं। कारण, दोनों ही देश इस वक्त भारत की सीमाओं को अशांत करने के साथ ही, भारत विरोधी मजहबी कट्टर तत्वों को खुली छूट दे रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री का यह दौरा क्या दोनों देशों के बीच कोई नया भारत विरोधी खाका तो नहीं तैयार कर रहा है। इशाक डार का ढाका मे जमाते इस्लामी के नेताओं से मिलना भी सचेत होने के संकेत देता है। यह वही जमाते इस्लामी है जिसने पाकिस्तान से बांग्लादेश के कटने का विरोध किया था। यानी यह जमात पहले से पाकिस्तान की कट्टर सोच की समर्थक रही है।

डार की यह यात्रा बेशक, दोनों देशों के बीच संबंधों को फिर से जिलाने की दिशा में एक पहल के तौर पर देखी जा रही है। इस यात्रा के दौरान जिन छह समझौतों पर हस्ताक्षर हुए उनमें वीजा-मुक्त यात्रा, शिक्षा, व्यापार, मीडिया और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देश इस बात पर राजी हुए हैं कि सरकारी और राजनयिक पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा-मुक्त यात्रा होगी। यह कदम दिखाता है कि दोंनों के बीच बहुत जल्दी और बहुत नजदीकी संबंध बने हैं।

पाकिस्तानी उपप्रधानमंत्री इशाक डार और बांग्लादेश के मुख्य सलाहाकर मोहम्मद यूनुस

एक अन्य समझौते के तहत व्यापार और निवेश के लिए एक संयुक्त कार्य समूह का गठन किया गया है जो व्यापारिक अवसरों को खंगालेगा। साथ ही, पाकिस्तान ने अगले पांच वर्ष में बांग्लादेशी छात्रों को 500 छात्रवृत्तियां देने की घोषणा की है, जिनमें 25 प्रतिशत मेडिकल शिक्षा के लिए होंगी। साथ ही 100 बांग्लादेशी लोकसेवकों को पाकिस्तान में प्रशिक्षण दिया जाएगा। एक अन्य समझौते के तहत पाकिस्तान की एसोसिएटेड प्रेस और बांग्लादेश की संवाद संस्था के बीच साझेदारी होगी।

दोनों देश सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए तैयार हुए हैं। इसके अंतर्गत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू किया जाएगा जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और सौहार्द बढ़ेगा। दोनों देशों के थिंक टैंक संस्थानों के बीच शोध और संवाद को बढ़ावा मिलेगा। दोनों की विदेश सेवा अकादमियां सहयोग करेंगी।

दरअसल डार कल यानी रविवार को कट्टरपंथी जमाते इस्लामी के आमिर शफीकुर्रहमान से मिलने उसके घर गए थे। जमाते इस्लामी के मजहबी उन्मादी 1971 के दौरान पाकिस्तान और रजाकारों के साथ मिलकर नागरिकों पर जुल्म कर रहे थे। 1971 में बांग्लादेश में पाकिस्तानी सैनिकों द्वारा महिलाओं और राष्ट्रभक्त बांग्ला लोगों पर अत्याचार करने की माफी मांगने की अपील पर डार कन्नियां झांकने लगे थे। डार ने पाकिस्तान की ओर से माफी मांगने से इंकार कर दिया। इशाक डार ने यह कहकर माफी मांगने से मना कर दिया कि अब उस पुराने विषय पर बात क्या करनी, जिसे लेकर पूर्व में दो बार चर्चा हो चुकी है, अब आगे बढ़ने का वक्त है।

डार कल यानी रविवार को कट्टरपंथी जमाते इस्लामी के आमिर शफीकुर्रहमान से मिलने उसके घर गए थे

जैसा पहले बताया, भारत के लिए यह घटनाक्रम विशेष रूप से गौर करने वाला है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती नजदीकियां भारत की ‘पड़ोसी पहले’ की नीति के लिए चुनौती बन सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसमें भारत को उसके पड़ोसियों के माध्यम से घेरने की कोशिश की जा रही है।

पाकिस्तान-बांग्लादेश ‘नॉलेज कॉरिडोर’ के बारे में कुछ बातें सुनने में आई हैं और यह भी कि यह पाकिस्तान की सॉफ्ट पावर को बढ़ाने का प्रयास है, जो भारत के लिए कूटनीतिक और रणनीतिक रूप से चिंता का मुद्दा हो सकता है। यदि बांग्लादेश पाकिस्तान के साथ व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में संबंध बढ़ाता है, तो भारत को इस माध्यम से चुनौती देने का प्रयास हो सकता है।

 

Topics: पाकिस्तानPakistanBangladeshबांग्लादेशbilateraldiplomacyIndiadhakaजमाते इस्लामी1971 war
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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