प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल के स्कूलों में शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं की जांच के तहत सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के विधायक जीबनकृष्ण साहा को गिरफ्तार कर लिया। साहा मुर्शिदाबाद जिले के बुरवान विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं।
ईडी की टीम ने यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) की जांच के तहत की, जो केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की एक प्राथमिकी के आधार पर शुरू हुई थी। सीबीआई को यह जांच कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देश पर सौंपी गई थी। हाई कोर्ट ने राज्य में ग्रुप ‘सी’ और ‘डी’ कर्मचारियों, कक्षा 9 से 12 तक के सहायक शिक्षकों और प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में गड़बड़ियों की जांच का आदेश दिया था।
छापेमारी और गिरफ्तारी की पूरी कार्रवाई- ईडी ने सोमवार को कोलकाता सहित मुर्शिदाबाद और बीरभूम जिले के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इसी क्रम में मुर्शिदाबाद जिले के आंदी इलाके में स्थित जीबनकृष्ण साहा के आवास पर भी छापा मारा गया। अधिकारियों के साथ केंद्रीय बलों के जवान भी तैनात थे ताकि सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
सूत्रों के अनुसार, जब ईडी की टीम उनके घर पहुंची तो साहा ने वहां से भागने की कोशिश की। उन्होंने अपना मोबाइल फोन एक झाड़ी में फेंक दिया ताकि साक्ष्य न मिले, लेकिन ईडी अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया और उनका फोन भी बरामद कर लिया। इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए कोलकाता लाया गया। यह कोई पहला मौका नहीं है जब साहा पर आरोप लगे हैं। 2023 में भी जब सीबीआई की टीम ने उनके घर पर छापा मारा था, तब उन्होंने दो मोबाइल फोन सबूत मिटाने के इरादे से एक तालाब में फेंक दिए थे। ईडी की जांच केवल विधायक तक सीमित नहीं रही। टीम ने साहा के ससुराल, जो रघुनाथगंज के पियारापुर में स्थित है, वहां भी तलाशी अभियान चलाया। इसके अलावा बीरभूम जिले के साईंथिया में उनकी मौसी और टीएमसी पार्षद माया साहा के घर पर भी छापा मारा गया।
मुर्शिदाबाद के महिषग्राम इलाके में एक बैंक कर्मचारी राजेश घोष के आवास पर भी ईडी ने तलाशी ली। माना जा रहा है कि इन सभी ठिकानों से ईडी को कई अहम दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिले हैं, जो जांच में मददगार साबित हो सकते हैं। यह गिरफ्तारी तृणमूल कांग्रेस के लिए एक और झटका है, क्योंकि पहले से ही कई नेताओं के नाम इस भर्ती घोटाले में सामने आ चुके हैं। राज्य में शिक्षक भर्ती से जुड़े इस घोटाले को लेकर विपक्ष भी सरकार पर लगातार निशाना साधता रहा है।ईडी की कार्रवाई पीएमएलए के अंतर्गत की गई है। जांच एजेंसी का मानना है कि इस भर्ती घोटाले से जुड़े पैसों को छुपाने और वैध दिखाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग की गई थी।
















