राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे राजगुरु? जानिए असली इतिहास, जो बच्चों को कभी पढ़ाया नहीं गया
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे राजगुरु? जानिए असली इतिहास, जो बच्चों को कभी पढ़ाया नहीं गया

दुर्भाग्य देखिये जब इतिहास लिखा गया तो अंग्रेजी इतिहासकारों के साथ उनकी लीक पर चलकर एक दल विशेष के समर्थन से भारतीय परजीवी इतिहासकारों ने और वामपंथी इतिहासकारों ने इन महारथियों को आतंकवादी बताया और स्कूल के पाठ्यक्रमों में भी यही पढ़ाया

Written byडॉ. आनंद सिंह राणाडॉ. आनंद सिंह राणा
Aug 24, 2025, 06:15 pm IST
inसंघ @100
आद्य सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार जी और महान क्रांतिकारी राजगुरु जी

आद्य सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार जी और महान क्रांतिकारी राजगुरु जी

17 दिसंबर 1928 को राजगुरु ने पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के हत्यारे जे. पी. सांडर्स पर पहला फायर खोला। इसके बाद सरदार भगत सिंह और सुखदेव ने सांडर्स का वध कर दिया। आज शिवराम हरि राजगुरु (रघुनाथ/एम महाराष्ट्र) की जयंती है। राजगुरु महान् क्रान्तिकारी थे। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में राजगुरु का बलिदान एक महत्वपूर्ण घटना थी।

राजगुरु का जन्म 24 अगस्त 1908 में पुणे जिला के खेड़ा गांव (अब राजगुरु नगर) में हुआ था। छह वर्ष की आयु में पिता का निधन हुआ और बहुत छोटी उम्र में ही वह वाराणसी विद्या अध्ययन एवं संस्कृत सीखने आ गये थे। हिन्दू धर्म-ग्रंन्थों तथा वेदों का अध्ययन तो किया ही लघु सिद्धान्त कौमुदी जैसा क्लिष्ट ग्रन्थ बहुत कम आयु में कण्ठस्थ कर लिया था। इन्हें कसरत (व्यायाम) का बेहद शौक था और छत्रपति शिवाजी की छापामार युद्ध-शैली के बड़े प्रशंसक थे। वाराणसी में रहते हुए राजगुरु का सम्पर्क अनेक क्रान्तिकारियों से हुआ।

चन्द्रशेखर आजाद से इतने अधिक प्रभावित हुए कि उनकी पार्टी हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी से तत्काल जुड़ गये। आजाद की पार्टी के अन्दर इन्हें रघुनाथ के छद्म-नाम से जाना जाता था; राजगुरु के नाम से नहीं चन्द्रशेखर आज़ाद,सरदार भगत सिंह और यतीन्द्रनाथ दास आदि क्रान्तिकारी इनके अभिन्न मित्र थे। राजगुरु बेहतरीन निशानेबाज भी थे।

सांडर्स का वध करने में उन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव का पूरा साथ दिया था, जबकि चन्द्रशेखर आज़ाद ने छाया की भाँति इन तीनों को सामरिक सुरक्षा प्रदान की थी। 23 मार्च सन् 1931 को उन्होंने भगत सिंह तथा सुखदेव के साथ लाहौर सेण्ट्रल जेल में फाँसी के तख्ते पर झूल कर अपने नाम को भारत के अमर बलिदानियों में प्रमुखता से दर्ज करा दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व प्रचारक एवं पत्रकार नरेंद्र सहगल जी ने प्रामाणिक स्रोतों के आधार पर ‘भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ पुस्तक लिखी है, जिसके अनुसार, ‘सरदार भगत सिंह और राजगुरु ने अंग्रेज अफसर सांडर्स को लाहौर की मालरोड पर गोलियों से उड़ा दिया। फिर दोनों लाहौर से निकल गए। राजगुरु नागपुर आकर डॉ. हेडगेवार से मिले। राजगुरु संघ के स्वयंसेवक थे’।

नरेंद्र सहगल की पुस्तक में प्रमाणित किया गया है कि राजगुरु संघ की मोहिते के बाड़े की शाखा के स्वयंसेवक थे। सहगल की लिखी पुस्तक के अनुसार नागपुर के भोंसले वेदशाला के छात्र रहते हुए राजगुरु, संघ संस्थापक हेडगेवार के बेहद करीबी रहे। पुस्तक में यह भी बताया गया कि सुभाष चंद्र बोस भी संघ से काफी प्रभावित थे। भारतवर्ष की सर्वांग स्वतंत्रता’ की भूमिका सरसंघचालक श्री मोहन भागवत जी ने लिखी है।

यह इसलिए भी प्रमाणित है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ आद्य संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार, कलकत्ता में अपने अध्ययनकाल से ही क्रांतिकारी संगठन अनुशीलन समिति के अंतरंग समिति के सदस्य थे, और विभिन्न क्रांतिकारी संगठनों के क्रान्तिकारी, ब्रिटिश सरकार की पकड़ से दूर रहकर गुप्त प्रवास हेतु बुंदेलखंड,महाकौशल और नागपुर आते थे। नागपुर उस समय मध्य प्रांत और बरार की राजधानी था, तथा भौगोलिक दृष्टि से गुप्त प्रवास के लिए अत्यंत सुरक्षित था और डॉ. हेडगेवार ने भी नागपुर आकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना कर ली थी। इसलिए क्रांतिकारियों का ब्रिटिश सरकार की पकड़ से दूर रहने के लिए,डॉ. हेडगेवार के पास गुप्त प्रवास पर आना स्वाभाविक था, साथ ही शाखाओं में स्वयंसेवक के रूप भाग लेना, गुप्त प्रवास का ही एक हिस्सा रहा होगा। राजगुरु निश्चित ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक थे और इसलिए उन्होंने संघ में प्रचलित काली टोपी सदैव धारण की।

परंतु दुर्भाग्य देखिये जब इतिहास लिखा गया तो अंग्रेजी इतिहासकारों के साथ उनकी लीक पर चलकर एक दल विशेष के समर्थन से भारतीय परजीवी इतिहासकारों ने और वामपंथी इतिहासकारों ने इन महारथियों को – आतंकवादी बताया और स्कूल के पाठ्यक्रमों में भी यही पढ़ाया गया। अब न्याय करना होगा और असली नायकों को इतिहास में समुचित स्थान देना होगा ताकि भावी पीढ़ी को भारत के वीरोचित इतिहास पर गर्व हो सके।

 

Topics: लाला लाजपत रायचंद्रशेखर आजादराजगुरुराजगुरु का पूरा नामRSSशिवराम हरि राजगुरुभगत सिंह और सुखदेवसांडर्स वधनरेंद्र सहगलराष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ24 अगस्त की तारीखमोहन भागवतडॉ. हेडगेवार
डॉ. आनंद सिंह राणा
डॉ. आनंद सिंह राणा
'स्व ' के आलोक में भारत के निर्माण और और स्वाधीनता संग्राम के इतिहास में उपेक्षित महान् जनजातीय नायकों,महारथियों और वीरांगनाओं का इतिहास लेखन। प्रकाशन एवं वृत्तचित्र - महाकौशल में स्वाधीनता आंदोलन तथा क्षेत्र की सामाजिक एवं आर्थिक संरचना,म. प्र. में समाज सुधार के विकास का एक विवेचनात्मक अध्ययन : समाचार पत्रों के योगदान के विशेष संदर्भ में, महाकौशल की जनजातियों का सामाजिक , सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य, सामाजिक समरसता सूत्र, महाकौशल में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास, चित्रोत्पला त्रैमासिक शोध पत्रिका, भारत का स्वाधीनता संग्राम : महाकौशल, बुंदेलखंड और बघेलखंड प्रांत के संदर्भ में (संदृश्य प्रलेख), म. प्र. शासन जन संपर्क विभाग, स्वदेश समाचार पत्र समूह, विश्व संवाद केंद्र, नई दुनिया, पत्रिका दैनिक भास्कर,पद्मावती एक्सप्रेस आदि समाचार पत्रों में शोध आलेखों का अनवरत प्रकाशन। शोध पत्रिकाओं के साथ सोशल मीडिया के अन्य माध्यमों से शोध आलेखों का प्रकाशन एवं प्रसारण। स्वातंत्र्य समर में महाकौशल की जनजातियों का अवदान और जबलपुर समग्र प्रकाशनाधीन हैं।भारतीय ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व के विषयों के साथ स्वाधीनता संग्राम के जनजातीय महारथियों पर विविध चैनलों के माध्यम से 20 से भी अधिक दस्तावेजी वृत्तचित्र (डाक्यूमेंट्री फिल्म) का निर्माण। शोध उपागम - अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के मार्गदर्शन में 500 से भी अधिक मौलिक शोध आलेख। भारतीय इतिहास, धर्म - दर्शन और संस्कृति के आध्यात्मिक, वैज्ञानिक तथा मनोसामाजिक पहलुओं के प्रति वामियों, मिशनरियों, पश्चिमी विद्वानों, मुस्लिम लेखकों, और तथाकथित सेक्यूलरों के पूर्वाग्रही मत प्रवाह को प्रामाणिकता के आधार खंडित कर वास्तविक मत प्रवाह को प्रस्तुत करने हेतु विविध आयामों में शोधपरक लेखन। भारतीय स्वाधीनता संग्राम और उसके उपरांत 'स्व' के आलोक शोधपरक लेखन। भारतीय संस्कृति के मूलाधार जनजाति कुटुम्ब के विरुद्ध वामियों,मिशनरियों तथाकथित सेक्यूलरों और मुस्लिम लेखकों के द्वारा फैलाए गए वितंडावाद और मंतातरण के कुत्सित षड्यंत्र के विरुद्ध शोधपरक लेखन। शिक्षा - बी. एस-सी, एम. ए.(इतिहास),पी-एच.डी., एल-एल.बी.। संप्रति - प्रो. एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग(30वर्ष अध्यापन का अनुभव )श्रीजानकीरमण कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय एवं उपाध्यक्ष इतिहास संकलन समिति महाकौशल प्रांत। जिला संगठक राष्ट्रीय सेवा योजना, जबलपुर (म.प्र.) [Read more]
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