अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने एक करीबी सहयोगी सर्जियो गोर को भारत में अमेरिका का नया राजदूत नियुक्त किया है। सर्जियो गोर वर्तमान अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी की जगह लेंगे। एरिक गार्सेटी को 2023 में राष्ट्रपति जो बाइडन ने भारत के लिए राजदूत नियुक्त किया था। अब ट्रंप ने सर्जियो गोर को इस पद के लिए चुना है, जो कि उनके बेहद करीबी माने जाते हैं।
कौन हैं सर्जियो गोर- सर्जियो गोर की उम्र केवल 39 वर्ष है। उनका जन्म उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में हुआ था। वर्ष 1999 में उनका परिवार अमेरिका शिफ्ट हो गया था। सर्जियो ने लॉस एंजेलिस में स्कूली पढ़ाई की और फिर वॉशिंगटन विश्वविद्यालय से स्नातक (ग्रेजुएशन) की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन से ही सर्जियो को राजनीति में गहरी रुचि थी। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी से जुड़ाव बनाना शुरू कर दिया था और कई अमेरिकी सांसदों के साथ काम किया। इसी दौरान उन्होंने राजनीति में अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की।
ट्रंप के करीबी कैसे बने- साल 2020 में जब डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार अभियान शुरू किया, तब सर्जियो गोर उनके साथ जुड़े। वह ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान में एक महत्वपूर्ण चेहरा बन गए। उनके संगठन कौशल और नीतिगत समझ की वजह से ट्रंप ने उन्हें अपनी टीम में अहम जगह दी। सर्जियो गोर अभी तक व्हाइट हाउस में “डायरेक्टर ऑफ प्रेसिडेंशियल पर्सनल” के पद पर काम कर रहे थे। ट्रंप का उन पर खास भरोसा है, इसी वजह से अब उन्हें भारत में राजदूत के साथ-साथ दक्षिण और मध्य एशिया मामलों के विशेष दूत की जिम्मेदारी भी सौंपी जा सकती है। इस नई भूमिका में सर्जियो गोर न केवल भारत, बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य दक्षिण एशियाई देशों से जुड़े रणनीतिक मामलों पर भी काम करेंगे।
विवादों से भी जुड़ा है नाम- सर्जियो गोर का नाम पिछले कुछ वर्षों में कई विवादों से भी जुड़ा रहा है। उन पर कुछ समय पहले रूसी जासूस होने के आरोप लगाए गए थे। इसको लेकर टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने भी उन पर टिप्पणी करते हुए उन्हें “सांप” कहा था। इसके अलावा, उन पर अपने जन्मस्थान को लेकर गलत जानकारी देने का भी आरोप लग चुका है। कहा जाता है कि उन्होंने पहले खुद को अमेरिका में जन्मा बताया था, जबकि वास्तव में उनका जन्म उज्बेकिस्तान में हुआ था। हालांकि, इस बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

















