नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत को बार-बार टैरिफ के नाम पर धमकाने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पोल खोल दी है। उन्होंने मॉस्को की धरती से कहा कि रूस से तेल खरीदने में नंबर वन चीन है। यानी रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक भारत नहीं, बल्कि चीन है। वहीं, एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार भारत नहीं, बल्कि यूरोपीय संघ है। विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा बेहद अहम माना जा रहा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वह इस बात से हैरान हैं कि वास्तव में अमेरिका से नई दिल्ली की तेल खरीद बढ़ गई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप भारत पर मास्को से तेल खरीदना बंद करने का दबाव बना रहे हैं। अमेरिका का दावा है कि भारत के रूस से तेल खरीदने पर यूक्रेन के खिलाफ रूस की आक्रामकता बढ़ रही है। हालांकि भारत ने अमेरिका के इस बयान पर नाराजगी जताई है। मास्को में अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय बैठक में विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि हम वह देश नहीं हैं जिसका 2022 के बाद रूस के साथ व्यापार में सबसे बड़ा उछाल आया है।
हाल ही में अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाया है। इसमें से 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ रूस से तेल खरीदने पर लगाया है। इसके पीछे अमेरिका ने तर्क दिया है कि भारत, रूस से कच्चा तेल खरीदता है और अप्रत्यक्ष तौर पर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में उसकी मदद कर रहा है। हालांकि ट्रंप प्रशासन ही उनके भारत पर टैरिफ लगाने के फैसले का विरोध कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने ट्रंप को आईना दिखाते हुए कहा कि भारत को चीन जैसा विरोधी नहीं, बल्कि एक मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार मानना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका भारत के साथ पिछले 25 वर्षों से बने संबंधों की रफ्तार रोकता है, तो यह एक रणनीतिक आपदा होगी।

















