उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के अबूनगर इलाके में स्थित नवाब अब्दुल समद का मकबरा इन दिनों बड़े विवाद का कारण बना हुआ है। यह जगह पहले से ही राष्ट्रीय संपत्ति और वक्फ भूमि घोषित है, लेकिन अब इस पर मंदिर होने का दावा भी किया जा रहा है।
कुछ हिंदू संगठनों के अनुसार, यहां पहले मंदिर था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे नवाब और उनके बेटे की कब्र मानता है। हाल ही में यह विवाद उस समय और बढ़ गया, जब कुछ हिंदू कार्यकर्ता अचानक परिसर में घुस गए, भगवा झंडा फहराने की कोशिश की और धार्मिक अनुष्ठान करना चाहा। पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए बैरिकेडिंग और लाठीचार्ज का सहारा लिया।इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एक उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई। इसमें 2 अपर जिलाधिकारी (ADM), 3 उपजिलाधिकारी (SDM), 2 तहसीलदार और 12 लेखपाल शामिल थे।समिति ने कई पुराने और नए दस्तावेजों की जांच की, जिनमें- खतौनी (जमीन का रिकॉर्ड), जमींदारी काल के कागजात, वक्फ बोर्ड के दस्तावेज, म्यूटेशन और खाता संख्या से जुड़े रिकॉर्ड इन सभी की गहन पड़ताल की गई। जांच के बाद तैयार की गई 75 पन्नों की रिपोर्ट को मंडलायुक्त (कमिश्नर) के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, गाटा संख्या 753 के नाम से दर्ज इस मकबरे की जमीन मौजूदा खतौनी में 11 बीघा बताई गई है। लेकिन वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में सिर्फ 15 बिस्वा जमीन ही वक्फ संपत्ति के रूप में दर्ज है। इसका मतलब है कि दोनों रिकॉर्ड में करीब 10 बीघा से ज्यादा का अंतर है। यही अंतर अब विवाद की जड़ बन गया है। हिंदू संगठनों का कहना है कि वक्फ बोर्ड ने असल जमीन से कहीं ज्यादा हिस्से पर दावा कर रखा है।
रिपोर्ट में क्या-क्या दर्ज है- प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में गाटा संख्या 753 की पूरी उत्पत्ति, कब और कैसे इसका म्यूटेशन हुआ, खाता संख्या में किए गए बदलाव, जमीन का वर्षों से किस उपयोग में लाया गया ब्यौरा, मकबरे के निर्माण काल से जुड़े तथ्य। इन सभी पहलुओं का विस्तार से उल्लेख है। रिपोर्ट में सभी पक्षों के दावों और दस्तावेजों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया गया है। साथ ही प्रशासन ने सरकार को स्पष्ट सुझाव भी दिए हैं कि आगे इस पर क्या कदम उठाए जाने चाहिए। अब अंतिम फैसला राज्य सरकार के हाथ में है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम- मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने अबूनगर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। खुफिया एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। किसी भी तरह की अप्रिय घटना रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। अब सभी की नजरें सरकार के फैसले पर टिकी हैं। क्या जमीन को वक्फ संपत्ति माना जाएगा या फिर हिंदू संगठनों की दावेदारी को आधार मिलेगा? इस विवाद ने इलाके का माहौल गरमा दिया है और हिंदू संगठनों में 10 बीघा जमीन की विसंगति को लेकर और चिंता बढ़ गई है।

















