स्वतंत्रता की 79वीं वर्षगांठ पर, 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए स्वदेशी और राष्ट्रीय सुरक्षा के अपने संकल्प को दोहराया तथा 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का रोडमैप प्रस्तुत किया। इससे मात्र 13 दिन पहले, 2 अगस्त 2025 को वाराणसी में उन्होंने स्वदेशी के समर्थन में जोरदार आह्वान करते हुए कहा था कि यदि भारत को अपने हितों की रक्षा करनी है, तो हर राजनीतिक दल, हर नेता और हर नागरिक को स्वदेशी को बढ़ावा देना होगा। उन्होंने व्यापारियों और दुकानदारों से आग्रह किया कि स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री को ही देश की सच्ची सेवा मानें और आम नागरिकों से अपील की कि वही सामान खरीदें जिसमें देश के लोगों का पसीना और मेहनत शामिल हो।

राष्ट्रीय सह संयोजक, स्वदेशी जागरण मंच
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में, जब अमेरिका समेत अन्य देश भारत की स्वतंत्र आर्थिक एवं विदेश नीति तथा उसकी बढ़ती आर्थिक व सामरिक शक्ति पर अंकुश लगाने की कोशिश कर रहे हैं, प्रधानमंत्री का यह आह्वान विशेष महत्व रखता है। ध्यान देने योग्य है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत से आने वाले कई उत्पादों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त आयात शुल्क (कुल 50 प्रतिशत) लगाने और उस पर जुर्माना ठोकने की घोषणा की थी—यह कहते हुए कि भारत रूस से तेल खरीदकर यूक्रेन युद्ध में रूस की मदद कर रहा है। हालांकि, भारत ने इस आरोप को खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि अमेरिका इस मामले में दोहरे मापदंड अपना रहा है, क्योंकि वह स्वयं भी अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए लगातार रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए हुए है।
स्पष्ट नीतिगत दिशा
वाराणसी के अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों के बीच स्वदेशी के महत्व को रेखांकित किया था।
समझना होगा कि 15 अगस्त को लाल किले से दिया गया प्रधानमंत्री का संदेश सिर्फ एक भावनात्मक अपील नहीं है, बल्कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साधने के लिए उनकी सरकार की स्पष्ट नीतिगत दिशा का भी उद्घोष है।
2014 में सत्ता संभालने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी ने देश को आर्थिक रूप से मज़बूत बनाने के लिए मेक इन इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, कौशल विकास और उद्यमिता विकास जैसे अभियानों पर निरंतर बल दिया है। हालांकि, स्वदेशी के प्रति इतना स्पष्ट और प्रत्यक्ष आग्रह पहले कभी दिखाई नहीं दिया। उन्होंने सदैव यह विश्वास जताया है कि देश को सशक्त बनाने में युवाओं, वैज्ञानिकों, महिलाओं और उद्यमियों की महत्वपूर्ण भूमिका है और इसके सुखद परिणाम भी समय-समय पर देखने को मिले हैं। लेकिन स्वदेशी की असली ताक़त का एहसास कोविड-19 के दौरान हुआ। जब पूरी दुनिया महामारी के सामने घुटने टेक चुकी थी और अपने आप को ‘विकसित’ कहने वाले देश भारत जैसे विकासशील देशों की मदद करना तो दूर अपनी सुरक्षा को लेकर भी आश्वस्त नहीं थे, तब भारत के समाज ने एक मिसाल कायम की। हमने न केवल अपने आसपास के परिवेश की सेवा और सुरक्षा की, बल्कि वैक्सीन बनाकर देश की पूरी जनसंख्या को सुरक्षित किया।
यही नहीं, दवाओं और स्वास्थ्य उपकरणों का निर्माण कर भारत ने पूरी दुनिया को चकित कर दिया। परिणामस्वरूप, कोविड का असर भारत में बाकी दुनिया की तुलना में कहीं कम रहा।

स्वदेशी पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए हर क्षेत्र में स्वदेशी के आधार पर आगे बढ़ने के संकल्प को दोहराते नजर आए। उन्होंने कहा, “हम किसानों के लिए उर्वरक तो बनाएंगे ही, अपने लड़ाकू विमानों के लिए इंजन भी खुद बनाएंगे। अब समय आ गया है कि हम वैश्विक बाजारों में अपने गुणवत्तापूर्ण उत्पादों के साथ मजबूती से उतरें।”
अनिश्चित वैश्विक माहौल में उन्होंने इसे और भी आवश्यक बताते हुए कहा कि भारत में उत्पादन कम लागत में संभव है, इसलिए हमें इस मंत्र पर काम करना होगा, ‘दाम कम और दम ज्यादा।’ प्रधानमंत्री का यह उद्घोष भारत-अमेरिका व्यापार वार्ताओं में आए गतिरोध और अमेरिकी प्रशासन के प्रतिकूल रुख के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। जहां भूमंडलीकरण के समर्थक देशों के बीच आपसी निर्भरता का तर्क देते रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री का यह स्पष्ट संदेश कि “दूसरे देशों पर निर्भरता ख़तरनाक है और अपने हितों की रक्षा के लिए हमें आत्मनिर्भर बनना होगा”-भूमंडलीकरण के विचार को सीधे चुनौती देता है।
उन्होंने कहा-वैश्विक व्यापार की अनिश्चितताओं के कारण भारत आत्मनिर्भरता और ऊर्जा स्वातंत्र्य की दिशा में तेज़ी से बढ़ रहा है।
उन्होंने स्वीकार किया कि हमारी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कई देशों पर निर्भर है, लेकिन सच्चे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए हमें ऊर्जा स्वतंत्रता हासिल करनी होगी। प्रधानमंत्री ने बताया कि पिछले वर्षों में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता 20 गुना बढ़ चुकी है। वर्तमान में 10 नए परमाणु रिएक्टर चालू हैं और जब भारत स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब हमारा लक्ष्य अपनी परमाणु क्षमता को 10 गुना बढ़ाने का है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि इस वर्ष के अंत तक भारत सेमीकंडक्टर की पहली खेप तैयार करने में सफल हो जाएगा। अमेरिका द्वारा भारत के डेयरी और कृषि बाजार तक पहुंच की मांग के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भारत के किसानों, मछुआरों और डेयरी उद्योग में कार्यरत लोगों के हितों की रक्षा के लिए ‘दीवार’ की तरह खड़े रहेंगे। प्रधानमंत्री ने बताया कि भारत का कृषि निर्यात आज 4 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।
उन्होंने देश के सभी छोटे और बड़े दुकानदारों से आग्रह किया कि वे अपने साइनबोर्ड पर यह लिखें कि ‘हम स्वदेशी सामान बेचते हैं।’
प्रधानमंत्री ने कहा, “स्वदेशी भारत की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत का प्रतीक है और जरूरत पड़ने पर यही ताकत दूसरों को कमजोर करने का माध्यम भी बनेगी।” उल्लेखनीय है कि स्वदेशी जागरण मंच इस प्रकार के आग्रह को वर्षों से आगे बढ़ाता रहा है।

सुरक्षा को प्राथमिकता
हाल ही में पाकिस्तानी आतंकियों ने पहलगाम में 26 निर्दोष लोगों की निर्मम हत्या कर दी। इसके जवाब में पाकिस्तान के आतंकियों और उसकी सैन्य क्षमता को नेस्तनाबूत करने के उद्देश्य से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया। इस ऑपरेशन के दौरान भारत ने अपनी प्रतिरक्षा क्षमता का जो अद्वितीय प्रदर्शन दुनिया के सामने किया, उसने न केवल पाकिस्तान की रक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर दिया, बल्कि अमेरिका, यूरोप जैसे विकसित देशों और चीन के दंभ को भी तोड़ दिया।
अब तक ये देश स्वयं को सबसे बड़ी सैन्य शक्ति मानने का दावा करते रहे थे। लेकिन अमेरिका और यूरोप, जो अपने स्वार्थ के लिए रूस-यूक्रेन युद्ध को हवा देते रहे हैं, मात्र चार दिनों के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से ही विचलित हो उठे और ‘विश्व शांति’ की दुहाई देते हुए युद्धविराम की अपील करने लगे। असल कारण यह था कि इन देशों को अपने सैन्य उपकरणों के वैश्विक बाजार पर खतरा मंडराता दिखाई देने लगा। यह समझना जरूरी है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत का सैन्य वस्तु निर्यात 6 गुना बढ़कर 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। आज हमारे प्रतिरक्षा उपकरणों का घरेलू उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है, जो आत्मनिर्भर भारत की रक्षा क्षमता और आर्थिक मजबूती का परिचायक है।
सुरक्षा के मोर्चे पर प्रधानमंत्री ने अगली पीढ़ी के स्वदेशी लड़ाकू विमानों के निर्माण की आवश्यकता पर खास जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय महत्व के सभी स्थल-रक्षा प्रतिष्ठान, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और पूजा स्थल-एक उन्नत सुरक्षा कवच से लैस किए जाएंगे। भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र से प्रेरित होकर सरकार ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ शुरू कर रही है। यह मिशन आधुनिक तकनीक का उपयोग कर न केवल दुश्मन के हमले को पूरी तरह निष्क्रिय करेगा, बल्कि कई गुना अधिक ताकत से जवाबी हमला भी करेगा।
घुसपैठ पर चिंता
हालांकि, समय-समय पर प्रधानमंत्री और सरकार ने घुसपैठ की समस्या पर चिंता जताते हुए उसके समाधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है और इस पर कार्रवाई भी की है, लेकिन किसी संगठित मिशन के रूप में इससे निपटने की पहली घोषणा प्रधानमंत्री के हालिया भाषण में सामने आई। प्रधानमंत्री ने कहा कि घुसपैठ हमारे देश में जनसांख्यिकीय परिवर्तन ला रही है, जो न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि हमारी एकता, अखंडता और प्रगति के लिए भी गंभीर संकट उत्पन्न कर रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “यह सामाजिक तनाव के बीज बोती है। दुनिया का कोई भी देश खुद को घुसपैठियों के हवाले नहीं कर सकता, तो हम भारत को उनके हवाले कैसे कर सकते हैं?” प्रधानमंत्री ने घोषणा की-“हमने एक उच्च-स्तरीय जनसांख्यिकीय मिशन शुरू करने का निर्णय लिया है। यह मिशन इस गंभीर संकट से निपटेगा और तय समय-सीमा में भारत पर मंडरा रहे खतरे का समाधान करेगा। हम इस दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं।”
कर का बोझ कम
हालांकि, प्रधानमंत्री के भाषण का मुख्य हिस्सा स्वदेशी, आंतरिक व बाहरी सुरक्षा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उद्योग, कृषि और प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को समर्पित था, लेकिन अपने लगभग 110 मिनट के संबोधन में उन्होंने आम जनता को प्रत्यक्ष लाभ देने की प्रतिबद्धता को भी दृढ़ता से दोहराया। लोगों के लिए ‘डबल दिवाली’ का वादा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार जल्द ही वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) व्यवस्था में अगली पीढ़ी के सुधार लाएगी। इन सुधारों का उद्देश्य आम लोगों पर कर का बोझ कम करना है, ताकि दैनिक जरूरतों की वस्तुएं सस्ती हो सकें और जनता को सीधा राहत मिले।
युवाओं के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लाख करोड़ रुपये की प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना की घोषणा की। उन्होंने बताया कि सरकार, निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले किसी भी युवा को 15,000 रुपये की राशि प्रदान करेगी। इसके साथ ही, सरकार उन कंपनियों को भी प्रोत्साहन देगी जो नए रोजगार सृजित करने में योगदान देंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस योजना से लगभग 3.5 करोड़ युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। इससे पहले, 2024-25 के केंद्रीय बजट में प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना की घोषणा की गई थी, जिसके तहत युवाओं को एक वर्ष के लिए 5,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता प्रदान की जाती है। प्रधानमंत्री ने यह भी घोषणा की कि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को साधने के लिए अगली पीढ़ी के सुधारों पर सिफारिश करने हेतु एक राष्ट्रीय टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा, जो निश्चित समय-सीमा के भीतर अपना कार्य पूरा करेगी।
















