सन 1947 में अनंत संभावनाओं, कोटि-कोटि भुजाओं के सामर्थ्य के साथ हमारा देश आजाद हुआ। देश की आकांक्षाएं उड़ानें भर रही थीं, लेकिन चुनौतियां उससे भी कुछ ज्यादा थीं। पूज्य बापू के सिद्धांतों पर चलते हुए संविधान सभा के सदस्यों ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। भारत का संविधान 75 वर्ष से एक प्रकाश-स्तंभ बनकर हमें मार्ग दिखाता रहा है। भारत के संविधान के निर्माण में बाबासाहब आंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, पंडित नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन समेत हमारी नारी-शक्ति का भी योगदान कम नहीं था। हंसा मेहता जी, दक्षयनी वेलायुधन जैसी विदुषियों ने भी संविधान को सशक्त बनाने में भूमिका निभाई थी।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान
इस वर्ष हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती भी मना रहे हैं। वे भारत के संविधान के लिए बलिदान देने वाले देश के पहले महापुरुष थे। संविधान के लिए बलिदान, अनुच्छेद-370 की दीवार गिराकर, एक देश-एक संविधान के मंत्र को जब हमने साकार किया, वह उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि थी।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से सिखाया सबक
22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आतंकियों ने आकर जिस प्रकार कत्लेआम किया, धर्म पूछ-पूछ कर लोगों को मारा, पत्नी के सामने पति को गोलियां मारीं, बच्चों के सामने पिता को मौत के घाट उतारा। पूरा देश आक्रोशित था। पूरा विश्व इस नरसंहार से चौंक गया था। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ उसी आक्रोश की अभिव्यक्ति है। हमने सेना को खुली छूट दे दी। वे रणनीति तय करें, लक्ष्य तय करें, समय भी वही चुनें और हमारी सेना ने वह करके दिखाया जो दशकों तक कभी हुआ नहीं था। सैकड़ों किलोमीटर दुश्मन की धरती पर घुसकर आतंकियों के ठिकानों को मिट्टी में मिला दिया।
आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब
हमारा देश कई दशकों से आतंकवाद झेलता आया है। अब हमने न्यू नॉर्मल स्थापित किया—आतंक को और आतंकियों को पालने-पोसने वाले, उन्हें ताकत देने वालों को अब हम अलग-अलग नहीं मानेंगे। वे मानवता के समान दुश्मन हैं, उनके बीच कोई फर्क नहीं है। भारत ने तय कर लिया है कि परमाणु धमकियों को हम सहने वाले नहीं हैं। ‘न्यूक्लियर ब्लैकमेल’ लंबे अरसे से चला आया है, अब वह नहीं सहा जाएगा। आगे भी अगर दुश्मनों ने ये कोशिश जारी रखी तो हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे। सिंधु का समझौता कितना अन्यायपूर्ण था कि भारत की नदियों का पानी दुश्मनों के खेत को सींच रहा था। देश के हक का जो पानी है उस पर अधिकार सिर्फ और सिर्फ देश व देशवासियों का है, किसानों का है। किसान हित में, राष्ट्रहित में यह समझौता हमें मंजूर नहीं है।

आत्मनिर्भर भारत
जो दूसरों पर ज्यादा निर्भर रहता है, उसकी आजादी पर उतना ही बड़ा प्रश्नचिह्न लग जाता है। आत्मनिर्भरता का नाता सिर्फ आयात और निर्यात, रुपये, पैसे, पाउंड, डॉलर तक सीमित नहीं है। आत्मनिर्भरता का नाता हमारे सामर्थ्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए सामर्थ्य को बचाए रखने, बनाए रखने और बढ़ाए रखने के लिए आत्मनिर्भर होना बहुत अनिवार्य है। हमने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मेड इन इंडिया की ताकत देखी। दुश्मन को पता तक न चला कि कौन से शस्त्र-अस्त्र हमारे पास हैं। यह कौन सा सामर्थ्य है जो पल भर में उनको नष्ट कर रहा है। हम पिछले 10 साल से लगातार सैन्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को एक मिशन के तहत लेकर चल रहे थे, यह उसी का परिणाम है।
तकनीक में महारथ जरूरी
इतिहास गवाह है जिन-जिन देशों ने तकनीक में महारथ हासिल की, वे विकास की ऊंचाइयों के शिखर पर पहुंच गए। मैं यहां लाल किले से किसी की भी, किसी सरकार की आलोचना करने के लिए खड़ा नहीं हूं और न करना चाहता हूं। लेकिन देश की युवा पीढ़ी को इसकी जानकारी होना भी जरूरी है। हमारे देश में 50–60 साल पहले सेमीकंडक्टर को लेकर फाइलें शुरू हुईं, वो अटक गईं, लटक गईं। सेमीकंडक्टर के विचार की ही भ्रूण हत्या हो गई। हमारे बाद कई देश सेमीकंडक्टर में महारथ हासिल कर दुनिया में अपनी ताकत को स्थापित कर रहे हैं। आज हमने उस बोझ से मुक्त होकर मिशन मोड में सेमीकंडक्टर के काम को आगे बढ़ाया है। सेमीकंडक्टर की 6 अलग-अलग इकाइयां जमीन पर उतर रही है। चार नए यूनिट्स को हमने पहले ही हरी झंडी दिखा दी है। इसी वर्ष के अंत तक ‘मेड इन इंडिया’ चिप्स बाजार में आ जाएंगी।
हम एनर्जी के लिए बहुत सारे देशों पर निर्भर हैं—डीजल हो, गैस हो, लाखों करोड़ रुपये हमें खर्च करके लाना पड़ता है। हमें इस संकट से देश को आत्मनिर्भर बनाना है।
भविष्य की ऊर्जा को ध्यान में रखकर हम 10 नए न्यूक्लियर रिएक्टर पर तेजी से काम कर रहे हैं। 2047 हमने विकसित भारत का लक्ष्य तय किया है। तब तक हम परमाणु ऊर्जा क्षमता को 10 गुना से भी अधिक बढ़ाने का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं। भारत ने 2030 तक स्वच्छ ऊर्जा 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा था, जिसे 2025 में ही प्राप्त कर लिया।
‘बड़े लक्ष्य के लिए छोटे-छोटे संकल्प लेकर आगे बढ़ें’

उन्होंने कहा कि देश में सबको सुख, शांति और प्रतिष्ठा दिलाने के साथ-साथ लड़खड़ाते विश्व के समक्ष उत्पन्न समस्याओं का सामना अपनी दृष्टि और धर्म-दृष्टि के आधार पर करते हुए, नई सुख-शांति पूर्ण दुनिया बनाने के उपाय देना हमारा कर्तव्य है। इसके लिए हमें वही परिश्रम, त्याग और बलिदान करना होगा जो हमारे पूर्वजों ने स्वतंत्रता को पाने के लिए किया था। स्वतंत्रता प्राप्त किए हुए अब 78 वर्ष हो गए हैं, लेकिन इसका रास्ता आसान नहीं था। ब्रिटिश शासन से आजादी का पहला बड़ा प्रयास 1857 में हुआ था। इसके बाद तीन पीढ़ियों तक सशस्त्र और निशस्त्र आंदोलनों को माध्यम से लोग प्राण अर्पित करते रहे और जेल भी गए। परिस्थितियां बदलती रहीं, लेकिन उस समय के समाज और नेताओं ने स्वतंत्रता की प्राप्ति तक प्रयास जारी रखे। उन्होंने कहा कि हमें उन प्रयासों को स्मरण करना चाहिए, जिनसे हमारे पूर्वजों ने यह स्वतंत्रता पाई। इसे बनाए रखना और प्रगति की ओर ले जाने में भी उतनी ही मेहनत करनी होगी।
सरसंघचालक जी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करते समय यह नहीं सोचा कि अनुकूल परिस्थितियां कब आएंगी। हमें भी परिस्थिति की परवाह किए बिना अपने देश के सुख, शांति, एकता, सम्मान और प्रतिष्ठा के लिए कार्य करना होगा। इसके साथ ही विश्व में कलह मुक्त वातावरण, पर्यावरण की समस्याओं का समाधान कर एक सुखी, सुंदर दुनिया बनाने वाला विश्वगुरु भारत खड़ा करना हमारा कर्तव्य है। राष्ट्रध्वज का केसरिया रंग त्याग, कर्मशीलता और ज्ञान का प्रतीक है। सफेद रंग शुद्ध चरित्र और निर्मलता का प्रतिनिधि है। जब ये दोनों—शुद्ध चरित्र वाले लोग निस्वार्थ बुद्धि से त्यागपूर्वक कर्म करते हैं, परिश्रम करते हैं और ज्ञान की आराधना करते हैं, तब समृद्धि आती है, जिसका प्रतीक हरा रंग है। हम सभी अपने कर्तव्य का स्मरण करें और बड़े लक्ष्य के लिए छोटे-छोटे संकल्प लेकर जीवन में आगे बढ़ें। जैसे संघ के स्वयंसेवक ‘पंच परिवर्तन’ की बात करते हैं, वैसे ही छोटे-छोटे संकल्पों से समाज, देश और अंततः विश्व में परिवर्तन लाना संभव होगा।
‘भारत के अंतःसत्व फीनिक्स पक्षी के समान’

मुंबई के रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी के प्रकृति-समृद्ध परिसर में भारतीय स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने ध्वजारोहण किया। उन्होंने उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन करते हुए देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले स्वतंत्रता सेनानियों को स्मरण किया। इसके साथ ही, आभार व्यक्त किया उन सभी सैनिकों और अर्धसैनिक बलों के जवानों के प्रति, जो वर्तमान में भारत की बाह्य और आंतरिक सुरक्षा के लिए निरंतर सजग हैं। उनके पराक्रम और समर्पण के कारण ही देश की सीमाएं अविचलित और सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से भारतीय राष्ट्र में किसी भी संकट को पार करने, फिर से उठ खड़ा होने, प्रगति करने और बेहतर बनने की अंगभूत क्षमता रही है। भारत का अंतःसत्व फीनिक्स पक्षी के समान है। इस अवसर पर प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष डॉ. विनय सहस्रबुद्धे ने उपस्थित सदस्यों का स्वागत किया और स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। प्रबोधिनी के कोषाध्यक्ष नीलेश गोसावी और मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. प्रकाश आवडे भी इस अवसर पर मौजूद थे। रामभाऊ म्हाळगी प्रबोधिनी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘वैश्विक आउटरीच कार्यक्रम’ भी आयोजित किया गया। देश-विदेश से आए स्वंयसेवकों और पदाधिकारियों ने ध्वजारोहण समारोह में भाग लिया। ध्वजारोहण एवं राष्ट्रगान के पश्चात् कार्यक्रम के प्रतिभागियों ने भारत माता की पूजा-अर्चना कर इस विशेष आयोजन का समापन किया।
अंतरिक्ष में कामयाबी
आज अंतरिक्ष के क्षेत्र में हमारा कमाल हर देशवासी देख रहा है। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ‘स्पेस स्टेशन’ से लौट चुके हैं और भारत आ रहे हैं। हम अंतरिक्ष में भी अपने दम पर आत्मनिर्भर गगनयान की तैयारी कर रहे हैं। अपना स्पेस स्टेशन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। देश के 300 से ज्यादा स्टार्टअप्स अब सिर्फ स्पेस सेक्टर में काम कर रहे हैं। 140 करोड़ भारतवासी 2047 में जब आजादी के 100 साल होंगे, विकसित भारत के संकल्प को परिपूर्ण करने के लिए पूरी ताकत से जुटे हैं। इस संकल्प की पूर्ति के लिए हर सेक्टर में आधुनिक इकोसिस्टम तैयार हो रहा है, जो देश को आत्मनिर्भर बनाएगा।
नौजवानों के सामर्थ्य पर भरोसा
मुझे देश के नौजवानों के सामर्थ्य पर भरोसा है। कोविड के समय हम बहुत सारी चीजों के लिए दूसरों पर निर्भर थे। जब देश के नौजवानों को कहा गया कि अपनी वैक्सीन चाहिए, तो उन्होंने करक दिखाया। कोविन प्लेटफार्म बनाया। हमनें करोड़ों लोगों की जिंदगी बचाई। हमें जीवन के हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए अपना सब कुछ देना है। पिछले 11 साल में उद्यमशीलता को बहुत बड़ी ताकत मिली है। मुद्रा योजना से हमारे देश के नौजवान, बेटियां सहित करोड़ों लोग मुद्रा से लोन लेकर अपना कारोबार कर रहे हैं। यह आगे बढ़ने का अवसर है, बड़े सपने देखने का अवसर है, संकल्प के लिए समर्पित होने का अवसर है। हम नया इतिहास बना सकते हैं।
सेवा, समर्पण और अनुशासन संघ की पहचान
देश का निर्माण केवल सरकारें, शासक या प्रशासनिक व्यवस्था नहीं करतीं। यह कोटि-कोटि जनों के पुरुषार्थ से बनता है। ऋषियों, मुनियों, वैज्ञानिकों, शिक्षकों, किसानों, जवानों, सैनिकों, मजदूरों और प्रत्येक व्यक्ति व संस्था, हर किसी के प्रयास और योगदान से देश बनता है। आज मैं गर्व के साथ एक विशेष प्रसंग का उल्लेख करना चाहता हूं। आज से 100 वर्ष पहले एक संगठन का जन्म हुआ था- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ, “व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण” के मंत्र को लेकर, इस संगठन ने मां भारती के कल्याण के लिए स्वयंसेवकों की पूरी पीढ़ी समर्पित की। सेवा, समर्पण, संगठन और अनुशासन—यह इसकी पहचान रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, सेवा के विस्तार और अनुशासन के बल पर, आज दुनिया में सबसे बड़ा स्वयंसेवी संगठन है। 100 वर्षों की यह भव्य और समर्पित यात्रा भारत के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। आज, लाल किले की प्राचीर से, मैं इस राष्ट्र-सेवा की 100 वर्ष की यात्रा में योगदान देने वाले सभी स्वयंसेवकों को आदरपूर्वक नमन करता हूं और विश्वास व्यक्त करता हूं कि यह यात्रा आने वाले समय में भी हम सभी को प्रेरित करती रहेगी।
जनजातीय नायक बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि
यह भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का अवसर है। इनकी गाथाएं औपनिवेशिक इतिहास में दबा दी गईं। सरकार ‘जनजातीय गौरव दिवस’ व आदिवासी संग्रहालय जैसे प्रयासों से इन्हें सामने ला रही है।
1 लाख करोड़ का युवा सशक्तिकरण अभियान
इस योजना में कौशल विकास, नवउद्यमों के लिए सहायता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता व हरित तकनीक में शोधवृत्ति और छोटे शहरों में खेल व शिक्षा ढांचे को बढ़ावा शामिल है। प्रधानमंत्री ने युवाओं को ‘विकसित भारत का इंजन’ कहा।
परमाणु धमकियां बर्दाश्त नहीं
पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष संदेश देते हुए कहा कि ‘भारत परमाणु धमकी स्वीकार नहीं करेगा’ और आतंकवाद व उसके समर्थकों के खिलाफ ‘शून्य सहनशीलता’ की नीति पर जोर दिया।
देशी सेमीकंडक्टर चिप इस साल
दिसंबर 2025 तक भारत अपनी पहली स्वदेशी चिप बनाएगा और उपयोग में लाएगा। यह 76,000 करोड़ के सेमीकंडक्टर मिशन का हिस्सा है।
भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन
स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन बनाने का लक्ष्य, जिसमें लंबी अवधि के मानव मिशन और वैज्ञानिक प्रयोग होंगे। यह चंद्रयान व गगनयान पर आधारित है।
‘विकसित भारत 2047’ का आह्वान
स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ तक विकसित भारत बनाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी, जनभागीदारी और स्वतंत्रता सेनानियों व जनजातीय नायकों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया।
हमारा डेटा, हमारे पास
ऑपरेटिंग सिस्टम से लेकर के साइबर सुरक्षा तक, डिप टेक से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक, सारी चीजें हमारी अपनी हो, जिस पर हमारे ही लोगों का सामर्थ्य जुटा हुआ हो, उनकी सामर्थ्य शक्ति का विश्व को परिचय कराएं।
क्रिटिकल मिनरल्स मिशन
“आज पूरा विश्व क्रिटिकल मिनरल्स के महत्व को समझ रहा है। जो विषय कल तक हाशिये पर था, वह आज विकास और सुरक्षा की केंद्रीय कसौटी बन गया है। ऊर्जा, उद्योग, रक्षा या तकनीक—हर क्षेत्र में क्रिटिकल मिनरल्स की अहम भूमिका है। इनके बिना आधुनिक टेक्नोलॉजी और औद्योगिक शक्ति की कल्पना अधूरी है। इसीलिए भारत ने नेशनल क्रिटिकल मिनरल्स मिशन शुरू किया है। 1200 से अधिक स्थलों पर खोज अभियान चल रहा है और हम इस क्षेत्र में भी पूर्ण आत्मनिर्भरता की दिशा में दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ रहे हैं।”
जीएसटी में दो स्लैब की तैयारी

वित्त मंत्रालय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स को प्रस्ताव भेजा है जिसमें मौजूदा चार स्लैब वाले जीएसटी (5%, 12%, 18%, 28%) को समाप्त कर केवल दो स्लैब—‘स्टैंडर्ड’ और ‘मेरिट’ को लागू करने की योजना है। इसके साथ चुनिंदा वस्तुओं के लिए विशेष कर दरें भी रखी जाएंगी। इस सुधार का उद्देश्य कर व्यवस्था को सरल बनाना, कर दरों को तर्कसंगत करना और आम जनता के लिए जीवन को आसान बनाना है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में सितंबर में जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा होगी। यदि मंजूरी मिलती है तो इस वित्तीय वर्ष में आम उपयोग की वस्तुओं पर कर का बोझ कम होने के साथ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को भी लाभ मिलेगा।
समृद्ध भारत हो मंत्र
आज 140 करोड़ देशवासियों का एक ही मंत्र होना चाहिए समृद्ध भारत। अगर कोटि-कोटि लोगों के बलिदान से स्वतंत्र भारत हो सकता है, तो कोटि-कोटि लोगों के संकल्प, पुरुषार्थ, आत्मनिर्भर बनने से, वोकल फॉर लोकल से, स्वदेशी के मंत्र से भारत समृद्ध बन सकता है। हम भारत में बनी चीजें खरीदेंगे, जो आत्मनिर्भरता के संकल्प को ताकत देता हो। हम उसी का उपयोग करेंगे। यह हमारा सामूहिक संकल्प होगा, तो हम देखते-देखते दुनिया बदल देंगे। किसी दूसरे की लकीर छोटी करने के लिए हमें अपनी ऊर्जा नहीं खपानी है। हमें पूरी ऊर्जा के साथ अपनी लकीर को लंबा करना है। हम अगर अपनी लकीर लंबी करते हैं, तो दुनिया भी हमारा लोहा मानेंगी।
नारी शक्ति का योगदान
आज भारत में नारी शक्ति का लोहा हर कोई मानने लगा है। बढ़ती अर्थव्यवस्था को गति देने में नारी शक्ति का भी बहुत बड़ा योगदान है। स्टार्टअप से लेकर अंतरिक्ष तक हमारी बेटियां छाई हुई हैं। खेल के मैदान, फौज में आज गर्व के साथ नारी कंधे से कंधा मिलाकर देश की विकास यात्रा में भागीदार हो रही है। वह देश के लिए गर्व का क्ष था, जब एनडीए का ‘वूमेन कैंडिडेट्स’ पहला बैच पहला पासआउट हुआ। 10 करोड़ स्वयं सहायता समूह की बहनें कमाल कर रही हैं। ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना नारी शक्ति की नई पहचान बनी।
किसान हमारी प्राथमिकता
भारत की अर्थव्यवस्था में किसानों का बहुत बड़ा योगदान है। उनकी मेहनत रंग ला रही है। पिछले साल अनाज उत्पादन में देश ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। जमीन उतनी ही है, लेकिन व्यवस्थाएं बदलीं, पानी खेतों तक पहुंचने लगा। किसानों को अच्छे बीज मिलने लगे, अच्छी सुविधाएं मिलने लगी हैं, तो वे अपने सामर्थ्य से देश को बढ़ा रहे हैं। आज भारत दूध, दाल, जूट जैसे उत्पादन में दुनिया में पहले स्थान पर है। मछली उत्पादन में दूसरे और चावल, गेहूं,फल व सब्जी उत्पादन में भी दुनिया में दूसरे स्थान पर है। देश के किसानों ने हमें ताकत दी है। किसान, पशुपालक, मछुआरे हमारी प्राथमिकता हैं।
जनहितैषी हो सरकार
गरीबी क्या होती है, यह मुझे किताबों में पढ़ना नहीं पड़ा है। मैं जानता हूं। सरकार की योजनाएं फाइलों में नहीं, देश के नागरिकों के जीवन में होनी चाहिए। योजनाएं पहले भी आती थीं, लेकिन हम उन्हें जमीन पर उतार रहे हैं। कोई हकदार छूटे नहीं, हकदार के घर तक सरकार जाए और उसे अपने हक की चीजें मिले, उसके लिए हम काम कर रहे हैं। ऐसा नहीं कि जब जनधन खाते खोले गए तो वे सिर्फ बैंक खाते थे। गरीबों को उससे स्वाभिमान मिला कि बैंक के दरवाजे मेरे लिए भी खुलते हैं। मैं भी बैंक जाकर टेबल पर हाथ रखकर बात कर सकता हूं।
‘आयुष्मान भारत’ ने बीमारी को सहने की आदत से मुक्ति दिलाने और अच्छे स्वास्थ्य के लिए मदद करने का काम किया। प्रधानमंत्री आवास योजना से 4 करोड़ परिवारों को पक्का मकान मिला। एक ऐसी छत, जो केवल ईंट-पत्थर की दीवार नहीं, बल्कि परिवार की इज्जत और सुरक्षा का प्रतीक है। पीएम स्वनिधि योजना ने रेहड़ी-पटरी वालों, छोटे दुकानदारों को साहूकारों की बेड़ियों से आजाद किया। रेहड़ी पटरी वाला आज यूपीआई से पैसे लेता है, यूपीआई से पैसे देता है। यह बदलाव है। आखिरी व्यक्ति तक की चिंता करने वाली सरकार होनी चाहिए। तभी जमीन से जुड़ी ऐसी योजनाएं बनती हैं और यही योजनाएं जीवन में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम बन जाती हैं। हम योजनाएं गरीब के घर तक ले जाते हैं तो उसके मन में विश्वास पैदा करते हैं। 10 वर्ष में 25 करोड़ से ज्यादा गरीब गरीबी को परास्त कर बाहर निकले हैं।
महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती आ रही है। पिछड़े को प्राथमिकता देते हुए हम परिवर्तन की ऊंचाइयों को प्राप्त करना चाहते हैं। हम सिर्फ सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की ही चिंता में सीमित नहीं हैं, बल्कि भौगोलिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों को भी बराबरी पर लाना चाहते हैं। इसीलिए हमने 100 Aspirational Districts और 500 Aspirational Blocks के लिए मिशन मोड में काम शुरू किया है। विशेष रूप से पूर्वी भारत के विकास के लिए हजारों करोड़ रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम हो रहा है—ताकि वहां का जीवन बदल सके और वह देश की विकास यात्रा में पूर्ण भागीदार बन सके।
खेलों का भी महत्व
खेलों को बढ़ावा देने के लिए हम ‘नेशनल स्पोर्ट्स पॉलिसी’ लेकर आए हैं ताकि खेल जगत का सर्वांगीण विकास हो। स्कूल से लेकर के ओलंपिक तक हम एक पूरा व्यवस्थित तंत्र विकसित करना चाहते हैं। खेलों को बढ़ावा देने के साथ-साथ हमारे देश के हर परिवार को चिंता करनी चाहिए वह अपने को स्वस्थ रखें। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा हमारे देश के लिए बहुत बड़ा संकट बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में हर तीसरे व्यक्ति में एक व्यक्ति मोटापे का शिकार होगा। हमें मोटापे से बचना है, स्वस्थ रहना है।
सांस्कृतिक विविधता हमारी ताकत
हमारी विविधता हमारा गौरव है। यह विविधता हमारे लिए बहुत बड़ी हमारी विरासत हैं। हमने प्रयागराज के महाकुंभ में देखा, भारत की विविधता को कैसे जिया जाता है। एक स्थान पर करोड़ों लोग एक ही भाव, एक ही प्राण, एक ही प्रयास दुनिया के लिए बहुत बड़ा अजूबा है। महाकुंभ की सफलता भारत की एकता, भारत के सामर्थ्य की दुहाई देती है।
मेरा मत है, हमारी भाषाएं जितनी विकसित होंगी, हमारी सभी भाषाएं जितनी समृद्ध हाेंगी, इतना हमारे ‘नॉलेज सिस्टम’ को बल मिलेगा। आज जब डेटा का जमाना है न तो हमारी ये ताकत दुनिया के लिए भी बड़ी ताकत बन सकती है, इतना सामर्थ्य हमारी भाषाओं में है। पांडुलिपियों में हमारे ज्ञान के भंडार पड़े हैं, लेकिन उसके प्रति उदासीनता रही है। हम श्ज्ञान भारतम् योजनाश् के तहत देशभर में जहां भी हस्तलिखित ग्रंथ है, जहां पांडुलिपियां हैं, सदियों पुराने जो दस्तावेज हैं, उनको खोज कर एकत्रित कर रहे हैं ताकि वह ज्ञान आने वाली पीढ़ियों के लिए काम आए।

नक्सलवाद पर प्रहार
पिछले 11 वर्षों में राष्ट्र सुरक्षा, राष्ट्र रक्षा, राष्ट्र के नागरिकों की रक्षा, इन सभी मोर्चों पर हमने पूरे समर्पण भाव से काम किया है। हम बदलाव लाने में सफल हुए।यह देश जानता है कि हमारे देश का बहुत बड़ा जनजातीय क्षेत्र नक्सलवाद की चपेट में, माओवाद की चपेट में पिछले कई दशकों से लहूलुहान हो चुका था। सबसे ज्यादा नुकसान मेरे जनजातीय परिवारों को हुआ। माताओं-बहनों ने अपने सपने के होनहार बच्चों को खो दिया। नौजवान बेटे गलत रास्ते पर खींच लिए गए, भटकाए गए, उनके जीवन को तबाह कर दिया गया। कभी सवा सौ से ज्यादा जिलों में नक्सलवाद अपनी जड़ें जमा चुका था। आज हम इन्हें 20 पर ले आए हैं। नक्सलवाद पर कार्रवाई इसकेे पूरी तरह खात्मे तक जारी रहेगी।
घुसपैठिए बर्दाश्त नहीं
मैं आज देश के सामने एक चिंता, एक चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं। षड्यंत्र के तहत, सोची समझी साजिश के तहत देश की जनसांख्यिकी संतुलन को बदला जा रहा है। एक नए संकट के बीच बोए जा रहे हैं और यह घुसपैठिए, मेरे देश के नौजवानों के रोजी-रोटी छीन रहे हैं। घुसपैठिए मेरे देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं, यह बर्दाश्त नहीं होगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में जब जनसांख्यिकी परिवर्तन होता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संकट पैदा होता है। देश की एकता, अखंडता और प्रगति के लिए यह संकट पैदा करता है। सामाजिक तनाव के बीज बो देता है। हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से आजादी पाई है। हमें स्वतंत्र भारत दिया है, उन महापुरुषों के प्रति हमारा कर्तव्य हैं कि हम हमारे देश में ऐसी हरकतों को स्वीकार न करें। मैं आज लाल किले को प्राचीर से कहना चाहता हूं कि हमने एक ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन’ शुरू करने का निर्णय किया है। यह मिशन देश पर मंडरा रहे इस संकट को निपटाने के लिए तय समय में सुविचारित निश्चित रूप कार्य करेगा।
सुदर्शन चक्र : नया स्वदेशी रक्षा तंत्र
हम देख रहे हैं कि पूरे विश्व में आज युद्ध के तौर-तरीके बदल रहे हैं। आने वाले 10 साल, 2035 तक मैं यह राष्ट्रीय सुरक्षा कवच का विस्तार करना चाहता हूं, मजबूती देना चाहता हूं, आधुनिक बनाना चाहता हूं और इसलिए भगवान श्री कृष्ण से प्रेरणा पाकर के हमने श्री कृष्ण का जो सुदर्शन चक्र था, उस सुदर्शन चक्र की राह को चुना है। आप में से बहुत लोगों को याद होगा, जब महाभारत की लड़ाई चल रही थी, श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से सूर्य के प्रकाश को रोक दिया था और दिन में ही अंधेरा कर दिया था। सूर्य प्रकाश को सुदर्शन चक्र से रोक दिया था और तब अर्जुन ने जो शपथ ली थी, जयद्रथ का वध करने की, उस प्रतिज्ञा को अर्जुन पूर्ण कर पाए थे। वह सुदर्शन चक्र के पराक्रम और रणनीति का परिणाम है। अब देश सुदर्शन चक्र मिशन लॉन्च करेगा। सुदर्शन चक्र की एक ताकत थी, वह बहुत ही सटीक तरीके से काम करता था, जहां जाना होता था वहीं जाता था और वापस भगवान श्रीकृष्ण के पास लौट आता था। हम इस सुदर्शन चक्र मिशन के द्वारा भी ‘टारगेटेड प्रिसाइज एक्शन’ की व्यवस्था को विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। युद्ध के बदलते तौर-तरीकों में राष्ट्र की सुरक्षा, नागरिकों की सुरक्षा के लिए मैं बड़ी प्रतिबद्धता के साथ इस कार्य को आगे बढ़ाने के लिए वचन देता हूं।

आपातकाल याद रखना जरूरी
जब हम लोकतंत्र की बात करते हैं, स्वतंत्र भारत की बात करते हैं, तब हमारा संविधान हमारे लिए सर्वोत्तम दीप स्तंभ होता है, हमारा प्रेरणा का केंद्र होता है, लेकिन आज से 50 साल पहले भारत के संविधान का गला घोट दिया गया था। भारत के संविधान की पीठ में छुरा घोंप दिया गया था, देश को जेल खाना बना दिया गया था, आपातकाल लगा दिया गया था। आपातकाल के 50 साल हो रहे हैं, देश की किसी भी पीढ़ी को संविधान की हत्या के इस पाप को कभी भूलना नहीं चाहिए। संविधान की हत्या करने वाले पापियों को नहीं भूलना चाहिए और हमें भारत के संविधान के प्रति अपने समर्पण को और मजबूती देते हुए आगे बढ़ना चाहिए, वह हमारी प्रेरणा है।
दीवाली पर मिलेगा देश को तोहफा
इस दिवाली मैं आपको एक बहुत बड़ा तोहफा देशवासियों को मिलने वाला है। पिछले 8 साल से हमने जीएसटी का बहुत बड़ा रिफॉर्म किया, पूरे देश में कर के बोझ को कम किया, कर की व्यवस्थाओं को सरल किया और 8 साल के बाद समय की मांग है, कि हम एक बार फिर इसकी समीक्षा करें। हमने हाई पावर कमेटी को बिठाकर समीक्षा की, राज्यों से भी विचार विमर्श किया। इस बार हम ‘नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स’ लेकर के आ रहे हैं, ये दिवाली पर आपके लिए तोहफा होगा। सामान्य मानवीय की जरूरत के टैक्स भारी मात्रा में काम कर दिए जाएंगे।
बनाएंगे विकसित भारत
मैंने इसी लाल किले से पंच प्रण की बात कही थी। मैं आज लाल किले से फिर से एक बार मेरे देशवासियों का पुनः स्मरण जरूर करना चाहता हूं। विकसित भारत बनाने के लिए ना हम रुकेंगे, ना हम झुकेंगे, हम परिश्रम की पराकाष्ठा करते रहेंगे और अपनी आंखों के सामने 2047 में विकसित भारत बना करके रहेंगे। हमारा दूसरा प्रण है कि हम हमारे जीवन में, हमारी व्यवस्थाओं में, हमारे नियम कानून परंपराओं में, गुलामी का एक भी कण अब बचने नहीं देंगे। हम हर प्रकार की गुलामी से मुक्ति पाकर के ही रहेंगे।
हम अपनी विरासत पर गर्व करेंगे। हमारी इस पहचान का सबसे बड़ा आभूषण, सबसे बड़ा गहना, सबसे बड़ा मुकुटमणि, हमारी विरासत है, हम विरासत का गर्व करेंगे। इन सबके लिए एकता, यह मंत्र सबसे बड़ा शक्तिशाली मंत्र है और इसलिए एकता की डोर को कोई काट न सके यह हमारा सामूहिक संकल्प होगा। 2047 विकसित भारत के लक्ष्य को पार करने के लिए अपने आप को खपा देंगे, अपने आप को झोंक देंगे।

















